Thursday, October 7, 2010

मेरे ख़्वाब ......



हिम्मत के
दरवाज़े पर
टंगी
उम्मीद की
पोटली,
इंतज़ार की साँकल से
बार-बार टकराती है !
यकीन को
थपथपाती है !
मेरे ख़्वाब ..
ख़यालों की
कुण्डी खोल कर,
अन्दर आ गए हैं
आंखों की सूखी नदी
जाग गयी,
अब तो तय है कि,
तूफ़ान बा-दस्तूर
आएगा
मेरे सपने
या डूबेंगे
या फिर किनारे
लग जायेंगे,
देखते हैं क्या
होता है,
नज़र न लग जाए
इसलिए ख़ामुशी का
एक ढीठौना
तो लगा ही दिया है मैंने....!
हाँ नहीं तो..!!

आज मेरी पसंद...आवाज़ Alka Yagnik ...फिल्म 'फिर तेरी कहानी याद आई'....

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शायराना सी है ज़िन्दगी की फ़ज़ा
आप भी ज़िन्दगी का मज़ा लीजिये
मैं ग़ज़ल बन गई आपके सामने
शौक से अब मुझे गुनगुना लीजिये
आप सुन तो रहे हैं मेरे दिल की लय
इसमें बेनाम सी इक उदासी भी है
इस उदासी में नग़मा कोई छेड़ कर
एक बेचैन दिल की दुआ लीजिये
आपके प्यार का जो भी मेआर हैं
इससे कब जानेजाँ मुझको इनकार है
जिस तरह आप चाहें नज़र आऊं मैं
मुझको हर रंग में आज़मा लीजिये 


16 comments:

  1. बहुत गहन अभिव्यक्ति!

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    मध्यकालीन भारत-धार्मिक सहनशीलता का काल (भाग-२), राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

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  3. शायराना अंदाज में लिखी दिलचस्प पोस्ट

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  4. बहुत ही खूबसूरती से आपने यादों के जुगनुओं को शब्दों में ढाला है..

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  5. अब तो तय है कि,
    तूफ़ान बा-दस्तूर
    आएगा
    तूफान का नाम ही तो जिन्दगी है.
    सुन्दर रचना .. गहन भाव

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  6. गागर में सागर ...
    बार- बार पढने और सुनने को मन कर रहा है ...!

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  7. नज़र न लग जाए
    इसलिए ख़ामुशी का
    एक ढीठौना
    तो लगा ही दिया है मैंने....!
    हाँ नहीं तो..!!

    बहुत कुछ याद आ गया ... आजकल आपकी पुरानी रचनाएँ ही ज्यादा देखने को मिल रही हैं ????

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  8. ये घर बहुत हसीं है...

    वैसे कल तूफ़ान सिंह मिला था, कह रहा था हाल-फिलहाल कनाडा जाने का कोई प्रोग्राम नहीं है उसका...

    जय हिंद...

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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  10. बहुत ही सुन्‍दर ..........
    अनुपम प्रस्‍तुति ।

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  11. मनभावन रचना...पढकर अच्छा लगा।

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  12. गज़ब के बिम्ब गढे और कविता बड़ी ही मानीखेज बन गयी है सच कहूं तो क्लासिकल !

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  13. "एक ढीठौना" लगा तो दिया है आपने, फ़िर भला कैसी आशंका?
    देखिये न चिट्ठाजगत तक ने करैक्शन कर दी, रैंक फ़िर अपनी रेंज में आ गया।
    टोटका कारगर रहा आपका।
    ये गीत हमें भी बहुत पसंद है।
    आभार आपका।

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  14. अनुपम प्रस्‍तुति ।

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