Sunday, May 23, 2010

पर बैठा रहा सिरहाने पर .....





तू प्यार मुझे तन्हाई कर
बस शाने पर अब रख दे सर

तू साथ है तो सब है गौहर
वर्ना है सब कंकर पत्थर

अब कौन ग़मों का हिसाब करे
बस खुशियों पर ही रक्खो नज़र

तेरा प्यार सुलगता दिल में 

और आँखों में खुशनुमा मंजर

इक सच्ची बात कही थी कल
सो आज चढ़ूँगी सूली पर

बोला ही नहीं तू कितने दिन
पर बैठा रहा सिरहाने पर


गौहर = मोती


14 comments:

  1. इक सच्ची बात कही थी कल
    सो आज चढ़ूँगी सूली पर
    पर सच्चे लोग सच्ची बात कहने से कब मानेंगे भला
    बहुत सुन्दर

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  2. waah bahut sundar baat kahi...sundar kavita

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  3. एक सच्ची बात कही थी ...आज चढूँगी सूली पर ...
    सच कहने वालों का यही अंजाम होता रहा है...मगर सच कहने वाले सच ही कहते हैं ...

    नज़्म/कविता पहले पढ़ी हुई है ...इसलिए अब ज्यादा कुछ नहीं

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  4. मन की भावनाओं का पोस्ट के रूप में उतरती हुई सार्थक प्रस्तुती /

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  5. आँखों से कैसे देख लिया,
    यूँ खींच लिया जीवन का डर ।

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  6. बेहतरीन प्रस्तुति.........भावों की सुन्दर,सशक्त अभिव्यक्ति।

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  7. पुनर्पठन भी अच्छा लगा दी..

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  8. बोला ही नहीं तू कितने दिन
    पर बैठा रहा सिरहाने पर
    Very nice... touchy!

    Rgds,
    Dimple

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  9. बोला ही नहीं तू कितने दिन
    पर बैठा रहा सिरहाने पर

    ye to aapne khub kaha...

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  10. इक सच्ची बात कही थी कल
    सो आज चढ़ूँगी सूली पर
    bahut khoob.

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  11. ठीक कहा आपने

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