Tuesday, May 11, 2010

ब्लॉग समाचार ....अदा की पसंद....पाँच ब्लॉग और कुछ कमेन्ट.....



ब्लॉग समाचार की दूसरी किश्त हाज़िर है आपके लिए ...फिर  छोटी सी ग़लती हुई है..इसमें ६ ब्लॉग की बात कही गई है ५ ब्लोग्स की जगह...इसे छोटा करने के चक्कर में कुछ एडिट भी किया है...आप लोगों को अगर कहीं कोई कमी लगती है तो दिल खोल कर बताइए...ज़रूरी नहीं है कि सबकी बात मानूँगी लेकिन सुनूँगी ज़रूर...
तो फिर देरी क्या है जी शुरू हो जाइए....

42 comments:

  1. छा गये जी आप तो..गज़ब तरीका ढ़ूंढा है यह चर्चा का. आनन्द आ गया. बहुत बधाई..

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  2. शॉर्ट एंड स्वीट चर्चा...
    इतनी कम क्यों, ये सवाल अच्छा है...बजाय ये पूछने कि इतनी ज़्यादा क्यों...

    नाम पहले मत खोला कीजिए...सस्पेंस बना रहने दिया कीजिए...सुनने पर ही पता चले कि कौन अदा जी की लिस्ट में आ पाया है...

    जय हिंद...

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  3. बहुते आनंददायक चर्चा रही..

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  4. बहुत खूब, लाजबाब !

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  5. ब्लॉग चर्चा .....कि ये नयी पेशकश ..सुपरहिट है .

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  6. वाह.... छा गईं अपनी मधुरता के साथ

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  7. अभिनव और सुंदर प्रयोग। चर्चा के लिए बहुत मुफीद है।

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  8. बहुत ही अच्छे बदलाव खासकर पांच पोस्ट और लगभग 10 मिनट का समय / मेरे राय में 10 पोस्ट और 10 मिनट ठीक रहेगा / बहुत ही उम्दा प्रयास इसे रोज प्रसारित कीजिये / आवाज के तो क्या कहने / इस सराहनीय प्रयास और प्रस्तुती के लिए धन्यवाद /

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  9. शानदार... आपने तो कमाल ही कर दिया...

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  10. ग्रेट आईडिया! शानदार, प्रोफ़ेशनल प्रस्तुति.

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  11. इसका समय कुछ कम सा लगा ....पर पर्याप्त है .....हो सके तो वीक-एंड में एक दिन कुछ समय बढ़ा दीजिये ......वैसे जो है वो भी अच्छा ही ...... आपकी आवाज फिर एक जादू कर गयी ... सुनते -सुनते दिल से तारीफ़ गिर गयी .

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  12. वाह वाह वाह
    बहुत बढिया चर्चा
    कुछ नया कुछ अलग सा

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  13. अदा जी
    क्या हुआ जी
    आप किधर हैं

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  14. बहुत अच्छा लगा बधाई

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  15. बहुत बढ़िया अदा जी
    अच्छा तरीका हैं जी आपका बधाई

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  16. आज हिंदी ब्लागिंग का काला दिन है। ज्ञानदत्त पांडे ने आज एक एक पोस्ट लगाई है जिसमे उन्होने राजा भोज और गंगू तेली की तुलना की है यानि लोगों को लडवाओ और नाम कमाओ.

    लगता है ज्ञानदत्त पांडे स्वयम चुक गये हैं इस तरह की ओछी और आपसी वैमनस्य बढाने वाली पोस्ट लगाते हैं. इस चार की पोस्ट की क्या तुक है? क्या खुद का जनाधार खोता जानकर यह प्रसिद्ध होने की कोशीश नही है?

    सभी जानते हैं कि ज्ञानदत्त पांडे के खुद के पास लिखने को कभी कुछ नही रहा. कभी गंगा जी की फ़ोटो तो कभी कुत्ते के पिल्लों की फ़ोटूये लगा कर ब्लागरी करते रहे. अब जब वो भी खत्म होगये तो इन हरकतों पर उतर आये.

    आप स्वयं फ़ैसला करें. आपसे निवेदन है कि ब्लाग जगत मे ऐसी कुत्सित कोशीशो का पुरजोर विरोध करें.

    जानदत्त पांडे की यह ओछी हरकत है. मैं इसका विरोध करता हूं आप भी करें.

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  17. ब्लाग जगत में काफी कुछ नया और अलग हो रहा है। नए तरीका अपनाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं।

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  18. अदा जी, प्रणाम,
    बहुत ही सुन्दर आवाज़ और अंदाज़ है, बहुत मज़ा आया सुनकर, आप ज़रूर ब्लॉगजगत को एक नयी ऊँचाइयों पर पहुंचाएंगी, शुभकामना!

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  19. बहुत बढ़िया तरीका है यह ...बधाई

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  20. आपका प्रयास बहुत ही बढ़िया लगा , लेकिन मुझे लगता है कि इनमे पाँच चिट्ठे ऊपर से तथा पाँ चिट्ठे निचे से ली जानी चाहिए ,नहीं तो निचे रहने वालों के साथ अन्याय नहीं होगा ।

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  21. शानदार....
    अगर संगीत का भी समावेश हो साथ में...जैसे एक सिग्नेचर ट्यून प्रस्तुति के पहले और बाद में...एक छोटा सा टुकड़ा दो ख़बरों के बीच में....तो और भी मज़ा आ जाएगा....
    कोई तकनीकी समस्या हो तो मुझसे सम्पर्क किया जा सकता है....कोई बहुत समय लेने वाला और मुश्किल काम नहीं है यह....

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  22. वाह बहुत सुन्दर!
    लाजवाब प्रस्तुति!!

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  23. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  24. बहुत सार्थक और अंदाज बडा ही मनमोहक लगा, बहुत शुभकामनाएं इस प्रयोग की सफ़लता के लिये.

    रामराम

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  25. ye to pakka hai ki aapki ye post achchi hogi magar mein to sun nahi pa rahi hun .......open hi nahi ho rahi.

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  26. badi mushkil se open huaa hai aaj ..........bada hi gazab ka andaz hai aapka......aapki kapnashakti bahut hi badhiya hai ....naye naye prayog karti rahtihain aur sabhi hit hote hain......aapka ye andaz bahut hi pasand aaya...........aur meri post ko bhi shamil karne ke liye aabhar aapka.

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  27. अदा जी,
    आइडिया तो बहुत ही अच्छा है पर अच्छे आइडियाज को
    उतने ही अच्छे ढंग से बरतने की चुनौती भी होती है |
    देख रहा हूँ कि आपके प्रतिमान ( कैनन ) ब्लोग्वानी से
    निर्धारित हो रहे हैं , ब्लोग्वानी की वरीयता के बड़े चोंचले हैं , और
    ब्लोग्वानी ने निष्कर्षों पर टिके हुए हमारे निर्णय इन चोचलों का
    ( जैसे चटखा आदि ) प्रकारांतर से महिमा-मंडन भी कर देते हैं |
    जब कि आप भी जानती हैं कि चटखा लगा कर दोयम दर्जों की
    पोस्टों को भी वरीयता-क्रम में चढ़ा दिया जाता है और यह भी किया
    जाता है कि गुटबाजी के चलते कभी - कभी अच्छी पोस्टों को
    भी नापसंदगी का चटखा लगवाया जाता है | इन स्थितियों में आपके
    समाचार प्रस्तुतीकरण में उपयोगी बातों का आना कठिन दिख रहा है |
    इस चुनौती से भी आपको निपटना चाहिए नहीं तो आपके इस नए
    प्रयोग पर ब्लोग्वानी का ही ठप्पा दिखेगा |
    ...........
    आपके आइडिया की तारीफ़ मैंने पिछली पोस्ट में की है , रचनात्मक
    ( सृजनात्मक ) आग्रह के साथ |
    आपका यह प्रयास परिवर्तनकामी और सार्थक तभी हो सकेगा जब
    आपका 'संग्रह-त्याग' का निजी विवेक होगा और इमानदार निष्ठा !
    '' संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने '' कह कर तुलसी दास जी ने इसी को
    लक्षित किया है !
    आभार !

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  28. बहुत अच्छा प्रयास है। आवाज बहुत मधुर है।
    मेरे विचार से आप आज के ब्लॉग या आज के चुनिन्दा ब्लॉग्स की जगह कभी कभी रैन्डम ब्लॉग भी चुनें। हो सकता है कुछ को हमने पढ़ा ही न हो और इस तरह कुछ नए ब्लॉग्स की भी जानकारी मिल जाए।
    घुघूती बासूती

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  29. अदा जी!
    आपका यह नया अन्दाज बहुत ही पसन्द आया!
    पढ़ने का समय नही रहा! बस आँख बन्द कर यह ब्लॉग समाचार सुनना बहुत ही अच्छा लगता है!
    इसे जारी रक्खें!

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  30. समय और पोस्ट्स की संख्या के सापेक्ष आज की प्रस्तुति और भी अच्छी लगी।
    और आज के कमेंट्स में लगभग सभी सुझाव बहुत ही अच्छे व विचारणीय है, जोकि आपके प्रयास के प्रभाव को तो दिखाते ही हैं, श्रोताओं के रुझान को भी दिखाते हैं।
    आपसे अनुरोध है कि सभी सुझावों पर विचार करें।

    शुभकामनायें व आभार।

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  31. बहुत ही शानदार प्रस्तुति..

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  32. बहुत बढिया ...जारी रहे ये समाचार ।

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  33. पहली बार आज सुना ब्लोग समाचार एक नया सा अनुभव हुआ . आपकी आवाज है ही मधुर .
    एक प्रार्थना है समाचारो मे एक ब्लाग लो प्रोफ़ाईल ब्लागरो का भी होना चाहिये

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  34. वल्ले वल्ले कर दी जी आप ने तो, अब रेडियो अदा बन जाना चाहिये....

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  35. वाह ..वाह ....क्या बात है ...मस्त है ब्लॉग रेडियो समाचार ....
    आपकी मधुर आवाज़ में सुनना टॉप ब्लोग्स को ..उम्दा ....बहुत बढ़िया ...!!

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  36. abhi to pichhlaa hi sun sake hain...


    jaane ab kab sunaa jaayegaa...




    :(

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  37. Gazab ka andaaz hai charcha ka ...mazaa aa gaya ..

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