Thursday, May 13, 2010

मंज़िल पर पहुँच कर मैं राह भटकी हूँ ....एक कविता, एक गीत...

आज ब्लॉग समाचार नहीं दे पा रही हूँ....समय का अभाव था....
कल लेकर हाज़िर होऊँगी....माफ़ी चाहती हूँ...



मंज़िल पर पहुँच कर
फिर मैं राह भटकी हूँ 
मेरा शक मुझसे ही
मेरा सबूत माँग रहा है 
इक तसल्ली कर लूँ ज़रा 
कि मैं साँस लेती हूँ  
वर्ना हर गोशे में 
तेरे नाम के अलफ़ाज़ 
मुझसे उलझते हैं 

सब नाराज़ दिखते हैं
यहाँ तक कि 
मेरी शिनाख्स्त से कतराते हैं 
सबूत कहाँ से लाऊँगी अब  ??

मेरे भीगे पाँव की निशानियाँ
बहते पानी में अब नज़र नहीं आ रहीं हैं ......


जब से तेरे नैना मेरे
फिल्म :  सांवरिया 
गायक : शान 
गीतकार :  समीर
संगीतकार : मोंटी शर्मा
यहाँ आवाज़ है  'अदा' की ...



[लागे रे  लागे रे लागे रे नैननवालागे रे लागे रे] - 2

जब से तेरे नैना मेरे नैनों से लागे रे 
जब से तेरे नैना मेरे नैनों से लागे रे  
तब से दीवाना हुआ आ...हा...
सब से बेगाना हुआ
रब भी दीवाना लगे रे ओये ओये
रब भी दीवाना लगे रे हो होहोहो
जब से तेरे नैना मेरे नैनों से लागे रे
तब से दीवाना हुआ आ...हा...
तब से दीवाना हुआ आ...हा...
सब से बेगाना हुआ
रब भी दीवाना लगे रे ओये ओये
रब भी दीवाना लगे रे हो होहोहो
जब से तेरे नैना मेरे नैनों से लागे रे

धिन ताक धिन ताक धिन ताक धिन

दीवाना ये तो दीवाना लगे रे

हो... जब से मिला तेरा इशारा
तब से जगीं हैं बेचैनियाँ
जब से हुई सरगोशियाँ
तब से बढ़ी है मदहोशियाँ

जब से जुड़े यारा
तेरे मेरे मन के धागे
तब से दीवाना हुआ आ...हा...
सब से बेगाना हुआ
रब भी दीवाना लगे रे ओये ओये
रब भी दीवाना लगे रे हो होहोहो

हो जब से हुई है तुझसे शरारत
तब से गया चैनों करार हो हो
जब से तेरा आँचल ढला
तब से कोई जादू चला

जब से तुझे पाया
ये जिया धक धक भागे रे
तब से दीवाना हुआ आ...हा...
तब से दीवाना हुआ आ...हा...
सब से बेगाना हुआ
रब भी दीवाना लगे रे ओये ओये
रब भी दीवाना लगे रे हो होहोहो
जब से तेरे नैना मेरे नैनों से लागे रे

36 comments:

  1. मेरे भीगे पाँव की निशानियाँ
    बहते पानी में अब नज़र नहीं आ रहीं हैं ......

    कौन कहता है पाँव के निशान नहीं थे
    आज ही एक नमी को मुस्कुराते देखा है
    और फिर
    आपकी आवाज को सुनना भी तो बहते पानी में पाँव रखने सा है.. नमी दे गई है.
    पर शायद साथ में जगजीत सिंह भी रिमिक्स का एहसास दे गये.

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  2. मेरे भीगे पाँव की निशानियाँ
    बहते पानी में अब नज़र नहीं आ रहीं हैं ......
    --------- पांवों को अपनी निशानियाँ स्थल पर
    रखनी होंगी , पानी का स्वभाव की हर क्षण आकार
    बदलने का है !
    .............
    गाना अच्छा लगा , हर बार की तरह , पिछली कई प्रविष्टियों
    में इसका अभाव दिखा था , गीत-प्रस्तुति आपके ब्लॉग का अनिवार्य हिस्सा
    बन गया है !
    कल समाचार का इन्तजार रहेगा ! आभार !

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  3. बहुत बढ़िया प्रस्तुति.....आभार.

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  4. मुझे अमृता प्रीतम के उपन्यास की एक पंक्ति याद आ रही है ....पानी में लकीर नहीं खिंची जा सकती ...

    सब नाराज़ दिखते हैं यहाँ तक कि
    मेरी शिनाख्स्त से कतराते हैं सबूत कहाँ से लाऊँगी अब ??
    हम्म्म्म.....

    गीत पहले सुना हुआ है ...दुबारा सुनना भी अच्छा लगा .. इस गीत को बहुत मस्ती के मूड में गया है आपने ...

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  5. बेहतरीन रचना, सुन्दर गीत और कल समाचार का इन्तजार रहेगा.



    एक विनम्र अपील:

    कृपया किसी के प्रति कोई गलत धारणा न बनायें.

    शायद लेखक की कुछ मजबूरियाँ होंगी, उन्हें क्षमा करते हुए अपने आसपास इस वजह से उठ रहे विवादों को नजर अंदाज कर निस्वार्थ हिन्दी की सेवा करते रहें, यही समय की मांग है.

    हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार में आपका योगदान अनुकरणीय है, साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.

    -समीर लाल ’समीर’

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  6. मंज़िल पर पहुँच कर
    फिर मैं राह भटकी हूँ
    मेरा शक मुझसे ही
    मेरा सबूत माँग रहा है
    सुन्दर !

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  7. रचना बहुत सुन्दर है!

    गीत सुनकर तो आनन्द आ गया!

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  8. बहुत खूब रचना है दी..

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  9. मेरे भीगे पाँव की निशानियाँ
    बहते पानी में अब नज़र नहीं आ रहीं हैं ..
    बहुत ही ख़ूबसूरत बिम्ब और अभिव्यक्ति ! बेहतरीन रचना के लिए आभार !

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  10. एकदम सटीक संदेह ,हमारे हिसाब से लोगों को इस संदेह को दूसरो के विचारों और सुझावों को सुनकर सुधारना और तर्कसंगतता की और ले जाने का प्रयास जरूर करना चाहिए /

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  11. सुंदर भाव को समेटे एक बढ़िया प्रस्तुति...

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  12. गाना अच्छा लगा , हर बार की तरह

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  13. सचमुच में एफ एम है
    एफ एम बोले तो फेमिली म्‍यूजिक
    रेडियो एक और नेक कार्यक्रम अनेक
    उनमें से यह गीत भी है एक
    सुन ब्‍लॉगर सुन
    हिन्‍दी में हैं गुण ही गुण
    इन्‍हें गुन उन्‍हें गुन
    सकारात्‍मक विचारों के
    सपने अपने बुन।

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  14. Ada Didi aaj to Kmaal hi gar diya...

    raj ki baat...
    My Favorite song hai

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  15. मेरे भीगे पाँव की निशानियाँ
    बहते पानी में अब नज़र नहीं आ रहीं हैं ......
    अद्भुत!
    उत्तम अभिव्यक्ति!!

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  16. जब से तेरे नैना मेरे नैनों से लागे रे जब से तेरे नैना मेरे नैनों से लागे रे तब से दीवाना हुआ आ.
    Ada didi
    sanjay bhaskar to diwana ho gya..

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  17. aasrniy behn ji aadaab aapne mnzil pr raah bhul kr kthin kaam kiyaa he achchaa likhaa he. bdhaai. akhtar khan akela kota rajathan

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  18. बहुत सुन्दर रचना है, और उसपर ये पंक्तियाँ तो गजब के हैं -
    मेरा शक मुझसे ही
    मेरा सबूत माँग रहा है

    मेरे भीगे पाँव की निशानियाँ बहते पानी में अब नज़र नहीं आ रहीं हैं ......

    गजब!

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  19. बहुत अच्छी रचना।
    किताबे ग़म में ख़ुशी का ठिकाना ढ़ूंढ़ो,
    अगर जीना है तो हंसी का बहाना ढ़ूंढ़ो।

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  20. sundar rachna fir uspe ek sundar geet...sone pe suhaga..

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  21. सुंदर भाव को समेटे एक बढ़िया प्रस्तुति.................

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  22. मेरा शक मुझसे ही
    मेरा सबूत माँग रहा है
    इक तसल्ली कर लूँ ज़रा
    कि मैं साँस लेती हूँ
    वर्ना हर गोशे में
    तेरे नाम के अलफ़ाज़
    मुझसे उलझते हैं
    वाह वाह ...........आपकी इस पोस्ट पर कुछ विलम्ब से आये मगर अच्छा लगा कि आपकी लेखनी से लगातार बेहतरीन कवितायेँ निकल रहीं हैं.....आभार !

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  23. कितना अच्छा हो अगर ब्लाग चर्चा के अलावा भी आपकी सभी रचनायें पढने के साथ सुनने को भी मिलें।
    कल का इंतजार है

    प्रणाम स्वीकार करें

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  24. मेरे भीगे पाँव की निशानियाँ
    बहते पानी में अब नज़र नहीं आ रहीं हैं

    ...सुन्दर अनुभूति...खूबसूरत भावाभिव्यक्तियाँ....बधाई !!

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  25. आपकी आवाज़ तो नहीं सुन पाए हम .......... नेट काफी स्लो है यहाँ पर नज़्म बेहद उम्दा है !! शुभकामनाएं !!

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  26. हमेशा की तरह एक और अद्धितीय रचना ...

    गायकी लाजवाब .

    VIKAS PANDEY

    www.vicharokadarpan.blogspot.com

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  27. अदा जी, आपके पाँव के निशान तो हमें हर जगह नज़र आते हैं, सुन्दर प्रस्तुति!

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  28. एक सौगात रही जी आपकी ये पोस्ट....



    कुंवर जी,

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  29. सब नाराज़ दिखते हैं यहाँ तक कि
    मेरी शिनाख्स्त से कतराते हैं सबूत कहाँ से लाऊँगी अब ??

    hnm...

    bahut jyaadaa prabhaavit karti lines...

    aabhaar aapkaa....

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  30. अदा जी, प्रणाम,
    आज ब्लॉग समाचार नहीं सुन पाए तो आज के दिन में कुछ कमी सी लग रही है, एक लत लगने के बाद ये थोडा मुश्किल होता है, जिस तरह सुबह की चाय के साथ अखबार की आदत होती है वैसे ही अब हमें सुबह की चाय के साथ ब्लॉग समाचार की लत लग चुकी है, अब ये नहीं चलेगा की आप किसी दिन हमें इसके बिना ही चाय पीने को कहें! कभी समय हो तो www.mathurnilesh.blogspot.com पर आइयेगा, धन्यवाद्!

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  31. आपकी आवाज़ सुन्दर है और कविता भी अच्छी है!

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  32. मंज़िल पर पहुंच कर राह भटकी हैं आप?
    मेरे भीगे पाँव की निशानियाँ बहते पानी में अब नज़र नहीं आ रहीं हैं ......
    ???


    आपकी आवाज में गाना सुनकर आनंद न आये, ऐसा हो नहीं सकता।

    मस्त पोस्ट एकदम।

    आभार।

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