Wednesday, April 17, 2013

तेरी याद, फिर तेरी याद के, बोझ तले दब जाती है .....


इक मुख्तलिफ़ सी मुलाक़ात की, याद यूँ सताती है 
ज़ीस्त, लाफानी-ए-इश्क, की गुनेह्ग़ार बन जाती है 

मेरी अफ़सुरदादिली संग, मेरे इरादे, ज़िन्दा हैं 
तेरी याद, फिर तेरी याद के, बोझ तले दब जाती है  

तू भी इतना दर्द सहे, तुझे कभी न चैन मिले  
बस घबरा कर बोल पड़े, तू इतनी याद क्यूँ आती है ?

थोड़ी शाम की अपनी उदासी, दिल भी था थोड़ा उदास 
रंगत वाले सारे चेहरे, फिर रंगत क्यूँ उड़ जाती है

अक्सर अजनबियत के गिलाफ़, वो ओढ़ सामने आता है  
शातिराने खेल न खेल, 'अदा' पहचान जाती है  
   

लाफानी-न ख़त्म होने वाली
ज़ीस्त-ज़िन्दगी
अफ़सुरदादिली = दिल की निराशा
चन्दा ओ चन्दा आवाज़ 'अदा ' की ....





45 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार (17-04-2013) के चर्चामंच - बुधवारीय चर्चा ---- ( 1217 साहित्य दर्पण ) (मयंक का कोना) पर भी होगी!
    नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
    सूचनार्थ...सादर!

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    1. धन्यवाद शास्त्री जी, बस आती हूँ देखने।

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    1. बस ! सिर्फ बहुत सुन्दर ! और कुछ नहीं ?
      क्या प्रवीण जी आप भी न ! :)
      हाँ नहीं तो !
      :)

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  3. नींद उड़ जाए तेरी चैन से सोने वाले-- गीत याद आ रहा है!
    यूँ चाहने वालों को बददुआएं देना अच्छी बात नहीं :)

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    1. अरे हमको तो ऊ गाना याद आ रहा है 'मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे' :)
      वोई तो 'यूँ चाहने वालों को बददुआएं देना सिर्फ अच्छी बात नहीं :), ये बहुत अच्छी बात होती है :):)

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  4. सुन्दर अभिव्यक्ति ..सुन्दर आवाज़ ...

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  5. अच्छे शब्द बुने है. मक्ता भी जोड़ दें तो शायरी और असरदार लगेगी ( और कॉपी राईट का क्लेम भी पुख्ता हो जाएगा!)
    लिखते रहिये

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    1. आपका आदेश सर-माथे पर मजाल साहेब, 'मक्ता' जोड़ने की कोशिश की है।
      बहुत बहुत शुक्रिया !

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  6. थोड़ी शाम की अपनी उदासी, दिल भी था थोड़ा उदास
    रंगत वाले सारे चेहरे, फिर रंगत क्यूँ उड़ जाती है ...

    वाह ... लाजवाब शेर है ... जब उदासी घिरने लगती है रंगत उड़ने लगती है ...

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    1. जी हाँ नासावा साहेब,
      अच्छी ख़ासी उड़ जाती है :)
      आपका शुक्रिया !

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  7. बहुत लाजवाब, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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    1. आप भी तो बेमिसाल हैं ! :)
      शुभकामनायें !
      सीते सीते !

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  8. उत्तम शब्द शिल्प है!
    सादर बधाई स्वीकारें।

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    1. बधाई हम स्वीकार कर लिए, आपको भी हमारा हार्दिक धन्यवाद !

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    2. बधाई स्वीकार की इसके लिए आपका आभार अब एक निवेदन भी स्वीकार कर लीजिए वह यह कि http://nirjhar-times.blogspot.com पर आपकी यह रचना लिंक की गई है,कृपया पधारें और अवलोकन करें। और हाँ,आपका सुझाव भी सादर आमंत्रित है।

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  9. lajwab
    la-dawaa hai ye gam
    kya dua karen charagar se ham.

    Aabhaar.

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    1. हम तो इस दर्द से ही मुतमा-इन हैं
      गर दवा करोगे तो 'अदा' मर जायेंगे
      आपका शुक्रिया !

      मुतमा-इन=संतुष्ट


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  10. सचमुच अब अदा पहचान जाती हैं -आप तो मजे हुए शायर की तरह ग़ज़ल लिखती हैं -
    किसकी रही सोहबत
    कहाँ से यह हुनर सीखा ?
    :-)

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    1. 'मजे हुए' ही हैं ज़नाब :)
      अब ट्रिक ऑफ़ दी ट्रेड तो हम बताने से रहे :)

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  11. गाना सुनने लिए सब्र करना था ,पहले क्लिक कर दिया और अब ग़ज़ल पढने में कितना डिस्टर्ब कर रही है ,तेरी आवाज़.
    गाना ख़त्म हो गया..अब दुबारा सुनाने का मन हो रहा है. :)
    ग़ज़ल फिर पढ़ते हैं

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    1. अरे !
      ऊ तो हम घोषित डिस्टर्बिंग एलिमेंट हूँ :):)

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  12. तू भी इतना दर्द सहे, तुझे कभी न चैन मिले
    बस घबरा कर बोल पड़े, तू इतनी याद क्यूँ आती है ?

    क्या बात है , नए तेवर की ग़ज़ल

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    1. अरे बाबा ई तेवर तो पुराना है, बस ज़रा जंग लग गया था तो रिफर्बिश किया है :):)

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  13. लाजवाब रचना | अद्भुत शब्दावली से रचना को सजाया है | शुभकामनायें |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  14. खूबसूरत ग़ज़ल....क्या खूब कहा है....

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    1. अदिति जी,
      स्वागत है आपका।
      आपको रचना पसंद आई, हमारी मेहनत रंग लाई !

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  15. अच्छी और संतुलित रचना.बधाई

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    1. शुक्र है संतुलित तो नज़र आई :)
      आभार !

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  16. खुबसूरत नज़्म सुन्दर शब्द लिए

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  17. बढ़िया है...
    मन भाया...पसंद आया

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  18. आपकी आवाज सुनकर ईश्वर से शिकायत करने की इच्छा होती है कि सबको ऐसी मधुर आवाज क्यों नहीं बख्शते?

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    1. गाना और रोना ईश्वर ने सबको सिखाया है !

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  19. अदा दी नमस्कार
    तू भी इतना दर्द सहे, तुझे कभी न चैन मिले
    बस घबरा कर बोल पड़े, तू इतनी याद क्यूँ आती है ?

    क्या बात है !!

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  20. तू भी इतना दर्द सहे, तुझे कभी न चैन मिले
    बस घबरा कर बोल पड़े, तू इतनी याद क्यूँ आती है ?...
    वाह क्या बात कही है..

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    1. अब का कहें, कभी-कभी गरियाना भी अच्छा लगता है :)

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