फिरदौस ने लिखा है..
ज़रूरी ऐलान
कई 'असामाजिक तत्व' हमारे नाम से अपने ही ब्लॉग में कमेन्ट लिख रहे हैं... और उस पर क्लिक करने पर हमारा ब्लॉग खुलता है...
हम इन 'असामाजिक तत्वों' के ब्लॉग का बहिष्कार कर चुके हैं...हम न तो उनके ब्लॉग पर कोई कमेन्ट लिखते हैं और न ही अपने ब्लॉग पर इन 'असामाजिक तत्वों' के कमेन्ट प्रकाशित करते हैं...ये लोग किस क़द्र नीचता पर उतर आए हैं... इस वक़्त अल्लाह और उसका रसूल भी इन्हें देखे तो उनकी आंखें भी शर्म से झुक जाएं...
अल्लाह के बंदे इस क़द्र नहीं गिर सकते...ये लोग जिसे बहन कहते हैं, उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं... तो ये दूसरे मजहबों की मां-बहनों के साथ क्या करेंगे... कहने की ज़रूरत नहीं...
हमने अपने ब्लॉग पर जो लिखा है, उस पर क़ायम हैं...
कई 'असामाजिक तत्व' हमारे नाम से अपने ही ब्लॉग में कमेन्ट लिख रहे हैं... और उस पर क्लिक करने पर हमारा ब्लॉग खुलता है...
हम इन 'असामाजिक तत्वों' के ब्लॉग का बहिष्कार कर चुके हैं...हम न तो उनके ब्लॉग पर कोई कमेन्ट लिखते हैं और न ही अपने ब्लॉग पर इन 'असामाजिक तत्वों' के कमेन्ट प्रकाशित करते हैं...ये लोग किस क़द्र नीचता पर उतर आए हैं... इस वक़्त अल्लाह और उसका रसूल भी इन्हें देखे तो उनकी आंखें भी शर्म से झुक जाएं...
अल्लाह के बंदे इस क़द्र नहीं गिर सकते...ये लोग जिसे बहन कहते हैं, उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं... तो ये दूसरे मजहबों की मां-बहनों के साथ क्या करेंगे... कहने की ज़रूरत नहीं...
हमने अपने ब्लॉग पर जो लिखा है, उस पर क़ायम हैं...
माफ़ी चाहती हूँ लिखना ही पड़ा...
अब झेल नहीं पा रही हूँ ये तमाशा...
कई दिनों से ये तमाशा देख रही हूँ...बदतमीज़ी की सारी हदें पार कर रहे हैं लोग ...
हमारी एक बहन ने अपनी बात अपनी डायरी में क्या कही और लोगो के पेट में मरोड़ होने लगा...
अब उसके नाम के पोस्ट लिख-लिख कर क्या साबित करना चाहते हैं...???
http://swachchhsandesh.blogspot.com/2010/04/blog-post_20.html
साहिर लुधियानवी का ये नगमा...कुछ (सभी नहीं ) घटिया दिमाग मर्दों की सारी कारस्तानियों का कच्चा चिटठा है ...वो उन मर्दों (सभी नहीं ) को उनकी असलियत बता रहे हैं और ये कह रहे हैं कि तुम सम्हल जाओ...शर्म करो और हो सके तो डूब मरो कहीं जाकर...जिस कोख से जन्म लेते हो उसी कोख को बदनाम करते हो...
हाथ कंगन को आरसी क्या....आप ही देखिये, बहन कहते हो और बहन को ही कदम-कदम पर बदनाम कर रहे हो....ऐसे भाई हैं तो फिर दुश्मनों की क्या ज़रुरत है....उसकी एक ज़रा सी बात बर्दाश्त नहीं हो रही आपलोगों से....जबकि अपने-अपने दिलों से पूछो क्या गलत कहा है उसने...एक-एक हर्फ़ सही है... उसकी बातों में....एक लड़की को बेईज्ज़त करने की हर कोशिश की जा रही है ....और सारा ब्लॉग जगत सिर्फ तमाशा देख रहा है....लानत है....!!!
फिरदौस आज के ज़माने कि एक समझदार, पढ़ी लिखी, बहुत नेक और उम्दा ख्यालों की लड़की है...उसने अपने ख्याल सबके सामने रखे हैं जो भी कहा है बिल्कुल ठीक कहा है....समय के साथ बदलाव ज़रूरी है...हम लोग पाषाण-युग के नियम यहाँ नहीं लगा सकते....एक लड़की या नारी होने से पहले हम इंसान हैं... कोई गाय बकरी नहीं कि खूंटे में बंधने चले आयेंगे....और अब ये तमाशा बंद किया जाए...
हाँ नहीं तो....!!
बसस्सस्सस्स