Tuesday, April 27, 2010

मेरे ख़ूने जिगर से ही, सही इक जाम हो जाए ......


जब तक तुम मिलो हमसे, न उम्र की शाम हो जाए
ज़िक्र तेरा करूँ ख़ुद से, और चर्चा आम हो जाए

तुझे मिलने की ख्वाहिश और तमन्ना दिल पे तारी है
ख़्वाबों और हक़ीकत में, न क़त्ले आम हो जाए

दहाने ज़ख्म के दिल के, ज़िन्दगी सोग करती है 
हुनर ये ज़िन्दगी का है, पर दिल गुलफाम हो जाए

वो बारिश जो कभी खुल कर, खुली छत पर बरसती है 
मेरे कमरे में भी बरसे तो मेरा काम हो जाए 

करिश्मा ग़र कोई ऐसा, मेरा क़ातिल ही कर जाए 
मेरे ख़ूने जिगर से ही, सही इक जाम हो जाए  

38 comments:

  1. ऐसा न हो तुम मिलो हमसे, उम्र की शाम हो जाए
    ज़िक्र तेरा करूँ ख़ुद से, और चर्चा आम हो जाए


    -पूरा है अपने आप में. बहुत खूब!! बेहतरीन गज़ल!

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  2. वो बारिश जो कभी खुल कर, खुली छत पर बरसती है
    मेरे कमरे में भी बरसे तो मेरा काम हो जाए

    कमरा क्या यह तो
    एहसास को भी भिगो देगी
    बस्स्स
    थोड़ी नमी तो बढ जाये

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  3. वो बारिश जो कभी खुल कर, खुली छत पर बरसती है
    मेरे कमरे में भी बरसे तो मेरा काम हो जाए ।
    बहुत खूब । पूरी की पूरी गज़ल ही बेहद खूबसूरत है बिल्कुल आपके तस्वीरे जाम की तरह ।

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  4. वो बारिश जो कभी खुल कर, खुली छत पर बरसती है मेरे कमरे में भी बरसे तो मेरा काम हो जाए ...
    बहुत सुन्दर ग़ज़ल है ... हर शेर अच्छा लगा ...

    आस्मां में जो बादल हैं उनसे ये कह दो जाकर
    आकर इस दिल में बसे, यही पर मुकाम हो जाये

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  5. वाह
    ग़र खून-ए-ज़िगर का जाम मिल जाए तो बेहतर है
    तेरी यादों का हमको ईनाम मिल जाए तो बेहतर है
    राह तेरी तकी दिन भर कभी पीछे कभी आगे
    तेरे आने का हवाओं से पैग़ाम मिल तो बेहतर है

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  6. अदा जी आज तो बहुत ही नायाब गजल लगाई है!
    बधाई अच्छे लेखन के लिए!

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  7. waah bahut khub!
    acchi lagi rachna!

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  8. waah bahut khub!
    acchi lagi rachna!

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  9. बहुत ही सुन्दरता से पिरोयी रचना । पढ़कर वाह निकल गया मुख से ।

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  10. बहुत ही नायाब गजल, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  11. बहुत खुब,सुंदर गजल
    आभार

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  12. Ada ji dil chhoo liya aapki gazal ne...

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  13. उड़ी बाबा,
    ये तो बड़ा ख़ून-खराबे वाला इश्क है...

    जय हिंद...

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  14. Hello Adaa ji,

    करिश्मा ग़र कोई ऐसा मेरा, क़ातिल ही कर जाए
    मेरे ख़ूने जिगर से ही, सही इक जाम हो जाए

    Waah.. bahut hi badiya!!

    Regards,
    Dimple

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  15. बहुत खूब, बहुत खूब।

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  16. जवाब नहीं इस रचना का ........लाजवाब प्रस्तुती

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  17. मेरे ख़ूने जिगर से ही, सही इक जाम हो जाए

    bahut khoob

    -Shruti

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  18. बेहतरीन प्रस्तुती,,,हर बार की तरह एक और अतुलनीय रचना ...
    विकास पाण्डेय
    www.vicharokadarpan.blogspot.com

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  19. Aapki srujan sheelta dang kar deti hai!

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  20. सच में आपकी रचना लाजवाब है!कुछ बहुत अच्छा पढ़ कुछ भी अपने-आप ही लिखा जाता है!

    यहाँ भी मै खुद को रोक ना सका!


    जो तुने चाहा वो तो कब का कर चुका हूँ,
    अब क्या मारते हो मै तो कब का मर चुका हूँ!
    कोई यद् रखे ना ना रखे,ये वक़्त ना भूल पायेगा,
    उसकी छाती पे ये दो-चार बोल जो धर चुका हूँ!



    कुंवर जी,

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  21. क्‍या खूब लिखा है। हमारे कमरे में पानी क्‍या छत पर भी नहीं है। एकदम सूखा है।

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  22. बेहतरीन गज़ल!बधाई!

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  23. वो बारिश जो कभी खुल कर, खुली छत पर बरसती है
    मेरे कमरे में बरसे तो मेरा भी काम हो जाए
    विचारों की गति ही सौन्दर्य है। सौंदर्य से भरी ग़ज़ल।

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  24. जब तक तुम मिलो हमसे, न उम्र की शाम हो जाए
    ज़िक्र तेरा करूँ ख़ुद से, और चर्चा आम हो जाए
    waah apki msst jaam k liye sukriya

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  25. अदा जी,
    बेहद की हद तोड़ दी है इस पोस्ट में आपने।

    कैसा तो वो कातिल होगा और कैसा ये मकतूल है कि अपने खूने जिगर से जाम की पेशकश कर दी?

    लाजवाब, बेजोड़, नायाब।

    आभारी हमेशा से।

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  26. मेरे ख़ूने जिगर से ही, सही इक जाम हो जाए
    बड़ी भयानक ख्वाहिश है भई.....

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  27. मेरे खूने जिगर का एक जाम हो जाए ...
    कोई भूत पलित लग गया है क्या पीछे ...??

    वो बारिश जो खुली छत पर बरसती है ...मेरे कमरे में भी बरसे ...
    ये ख्वाहिश जोरदार मजेदार लज्जतदार है ....

    मजाक को छोड़ दू तो ...

    ग़ज़ल सचमुच बहुत अच्छी लगी ....
    बेहतरीन ...बढ़िया ....!!

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  28. Parimal ji ne kaha :

    bahut khoobsurat ghazal.

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  29. करिश्मा ग़र कोई ऐसा, मेरा क़ातिल ही कर जाए
    मेरे ख़ूने जिगर से ही, सही इक जाम हो जाए
    ........वल्लाह।

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  30. वो बारिश जो कभी खुल कर, खुली छत पर बरसती है
    मेरे कमरे में भी बरसे तो मेरा काम हो जाए

    sabse acchha sher ye laga...ek dam naya sa. bahut sunder gazel.badhayi.

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  31. वाह ! क्या बात है, बेहतरीन !

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  32. बेहतरीन गज़ल है...एक एक शेर बब्बर शेर है...

    जब तक ना मिलो हमसे तो उम्र वहीँ रुक जाए
    चर्चा हो ना हो पर हर बात में तेरा ज़िक्र ज़रूर आये ...

    खूने जिगर से जाम वाली बात तो कमाल ही कही है....
    बहुत खूब

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  33. कुछ खटके लिए हुए,,,

    बहुत ..बहुत,,बहुत प्यारी ग़ज़ल....

    कसम से..बहुत प्यारी...

    तुझे मिलने की ख्वाहिश और तमन्ना दिल पे तारी है
    ख़्वाबों और हक़ीकत में, न क़त्ले आम हो जाए

    :)

    बहुत प्यारी..

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  34. कुछ खटके लिए हुए,,,

    बहुत ..बहुत,,बहुत प्यारी ग़ज़ल....

    कसम से..बहुत प्यारी...

    तुझे मिलने की ख्वाहिश और तमन्ना दिल पे तारी है
    ख़्वाबों और हक़ीकत में, न क़त्ले आम हो जाए

    :)

    बहुत प्यारी..

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