Tuesday, March 30, 2010

फिर एक घाव उसने और लगाया है...


आज फिर उसने मुझको रुलाया है
रूठे हुए थे हम वो मनाने आया है

ज़ख्मों पे पपड़ी सी कुछ जमी हुई थी

नाखून से कुरेद कर उसने हटाया है

दिल के क़तरनों के पैबंद बना कर
हमने भी कई
ज़ख्म सबसे छुपाया है

मरहम धरने की नई साज़िश रचा 

एक और घाव उसने फिर लगाया है

महबूब भी है खौफ़-ए-रक़ीब भी है  
मेरे ही ज़ख्मों से मुझको सजाया है



25 comments:

  1. आज फिर उसने मुझको रुलाया है
    रूठी हुई थी मैं पर उसने मनाया है

    सुंदर गज़ल .... बधाई

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  2. मरहम धरने की नई साज़िश रचा
    फिर एक घाव उसने और लगाया है

    महबूब भी है खौफ़-ए-रक़ीब भी है
    मेरे ही ज़ख्मों से मुझको सजाया है

    ada ji
    aaj to kamaal ki prastuti hai............kin lafzon mein tarif karoon............dil ko choo gaye har sher.

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  3. दिल के क़तरनों के पैबंद बना कर
    हमने भी कई ज़ख्म सबसे छुपाया है

    bahut khoob....waah kya baat hai

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  4. आपने बड़े ख़ूबसूरत ख़यालों से सजा कर एक निहायत उम्दा ग़ज़ल लिखी है।

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  5. मरहम धरने की नई साज़िश रचा
    फिर एक घाव उसने और लगाया है

    उसके हाथों को गर मंजूर हो मरहम लगाना
    उफ भी न करूँगा बेशक् सौ जख्म लगाना

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  6. ADA JI PLZ VISI

    http://yuvatimes.blogspot.com/2010/03/blog-post_30.html

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  7. मरहम धरने की नई साज़िश रचा
    फिर एक घाव उसने और लगाया है

    ye sher achcha laga.

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  8. महबूब भी है खौफ़-ए-रक़ीब भी है
    मेरे ही ज़ख्मों से मुझको सजाया है

    बहुत खूब!
    हो गये इस गजल की अदा पर हम फिदा!

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  9. वाह, क्या बात है! गजलों का मौसम चल रहा है। बहुत खूब लिखा आज भी आपने।

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  10. महक शामिल हुई है, बेवफाई में वफ़ा की भी

    दवा भी किस 'अदा' से ज़ख्म पर मरहम लगाती है..

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  11. बहुत सुंदर रचना.

    रामराम.

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  12. किस खूब सूरत अदा से अदाजी ने कह दिया
    महबूब भी है खौफ़-ए-रक़ीब भी है
    मेरे ही ज़ख्मों से मुझको सजाया है

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  13. पेड़ जंगल के हरे सब हो गए ,
    ख्वाब आंखो मे उतर आया कोई.

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  14. मरहम धरने की नई साज़िश रचा
    एक और घाव उसने फिर लगाया है

    Deep thought Ada Di.. very deep..

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  15. ज़ख्मों पे पपड़ी सी कुछ जमी हुई थी
    नाखून से कुरेद कर उसने हटाया है ...
    kuch "zakhm" achhe hote hain...

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  16. महबूब भी है खौफ़-ए-रक़ीब भी है
    मेरे ही ज़ख्मों से मुझको सजाया है

    बहुत सुन्दर कल्पना

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  17. बेहतरीन गज़ल!!

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  18. Namaste :)

    My my!! What a fabulous work done!!!
    I am really touched...

    Nice line
    --- "नाखून से कुरेद कर उसने हटाया है"

    Hats off!

    Regards,
    Dimple
    http://poemshub.blogspot.com

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  19. ये सब कर गया!!! बहुत बड़ा वो है!

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  20. बेहतरीन ...लाजवाब...विशिष्ट ...उत्तम ...उम्दा ... दर्देजिगर ...निरुत्तर करती ...अद्वितीय ...
    अतिसुंदर ...ख्याल ...

    महबूब भी है खौफ़-ए-रक़ीब भी है
    मेरे ही ज़ख्मों से मुझको सजाया है

    बहुत खूब ...बहुत कुछ

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  21. दर्द को शब्दों में बड़ी खूबसूरती से ढाला है !

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