Thursday, March 25, 2010

उसका अहसास...


रिश्तों का 
कारोबार 
चलता ही है 
अहसास के 
सिक्कों से
जज़्बात के गुँचे 
खिले नहीं कि 
मोहब्बत परवान
चढ़ गयी
फिर जलने लगे
दिलों में 
दर्द के दीये 
बातें, गुस्सा और कभी रूठना
वो उसका दूर चले जाना
फिर
पहले से भी ज्यादा क़रीब आना
जैसे
कोई हाई जम्प से
पहले कुछ क़दम पीछे
जाता है 
और हर बार एक नई ऊँचाई
पाता है
ऐसा ही कुछ
वो भी कर रहा है 
मैं रोक नहीं पा रही  
उसका अहसास 
दिल का एक
और
कमरा भर रहा है .....

मयंक की चित्रकारी :

34 comments:

  1. Bahut jhoobsoorat nayi upmaayen gadhee hain di... badhiya lagi Mayank ki chitrakari aur design kiya gaya logo bhi..

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  2. आज की कविता बहुत सुंदर लगी, सच में। इस अहसास के कारोबार में रिसेशन कभी नहीं आये, यही दुआ है सभी के लिये।
    आज कोई गीत नहीं गुनगुनाया?

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  3. और हां, आपका ब्लाग पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा है, नजर न लग जाये, काजल का टीका लगा लीजिये।

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  4. हर बार दूर जाना और लौट कर आना दुगुने एहसासों से भर जाता है दिल का कमरा ...दिल के हर कमरे का कोना कोना ऐसे ही अहसासों से जगमगाता रहे ...दुआ रहेगी हमेशा ....

    जानती हो ना ...कृष्ण को रणछोड़ क्यों कहा जाता है ...

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  5. वाह !! बहुत खूब .......मयंक की चित्रकारी तो लाजवाब

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  6. जज़्बात के गुँचे
    खिले नहीं कि
    मोहब्बत परवान
    चढ़ गयी
    फिर जलने लगे
    दिलों में
    दर्द के दीये

    मनोभावों का सुन्दर चित्रण किया है आपने!
    मयंक जी को शुभाशीष!

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  7. वाह! काफी अच्छा लिखा है अपने. मैं आपके ब्लॉग को अपने BLOG LIST में जोड़ रहा हूँ. धन्यवाद

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  8. रिश्तों का
    कारोबार
    चलता ही है
    अहसास....
    सुन्दर बात.

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  9. हाईजम्प के बिम्ब का अच्छा प्रयोग है ।

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  10. हर बार एक नई ऊँचाईपाता हैऐसा ही कुछवो भी कर रहा है हर बार उसका अहसास दिल का एकऔरकमरा भर रहा है .....


    अंतिम पंक्तियाँ दिल को छू गयीं.... बहुत सुंदर कविता....

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  11. मेरे पास शब्द नहीं हैं!!!!
    ada ji aapki tareef ke liyee

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  12. आप यूं फासलों से गुजरते रहे,
    दिल के कदमों की आहट होती रही,
    आप यूं फासलों से...

    जय हिंद...

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  13. हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

    अनेक शुभकामनाएँ.

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  14. एक एसएमएस याद आ गया।


    दिलवालों से बड़ा कोई धनवान नहीं मिलता।

    मंदिर जाने से कभी भगवान नहीं मिलता।

    लोग शायद पत्थर इसलिए पूजते है कि
    दुनिया में भरोसे के लायक कोई इंसान नहीं मिलता।

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  15. बहुत सुन्दर रचना है ! मन के बेहद नाज़ुक अहसासों को बड़ी खूबसूरती से बयान किया है आपने ! अहसास चिरंतन होते हुए भी उनका नितांत आधनिक ट्रीटमेंट बहुत अच्छा लगा ! बधाई !

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  16. सुन्दर चित्रण..आपका अपनी तरह और मयंक का अपनी तरह!! आनन्द आया.

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  17. Adaa ji

    aaj kafi time ke baad apka blog pada. bahut achha laga. iska look abhi pehle se jyada achha laga raha hai.

    -Shruti

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  18. सुन्दर रचना, मयंक की चित्रकारी के तो जलवे हैं।

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  19. This comment has been removed by a blog administrator.

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  20. सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  21. It is beautifully written and quite touchy... nice verbiage used :)
    And for Mayank -- Very good work done by him :)

    Regards,
    Dimple

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  22. वाकई शब्द नही है तारीफ़ के लिए,मेरे पास,बस अहसास है रिश्तों का।बहुत सुन्दर और लिटिल चैम्प की तो बात ही निराली है,नज़र ना लगे उसे किसी की।

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  23. रिश्तों का कारोबार चलता ही है अहसास के सिक्कों से जज़्बात के गुँचे खिले नहीं कि मोहब्बत परवान चढ़ गयी....
    ...................
    रिश्तों के मेरे अहसासों को पढ़ें....
    .......
    जाड़े के दिनों में,गरम-गरम,
    गुलगुली-गुलगुली सी रजाई से निकल कर,
    ड्यूटी जाने का मन नहीं करता,
    मन करता है,
    मीठे-मीठे सपने देखने का, बीबी से लिपटकर.
    ........पूरी कविता के लिए लिंक है....
    http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_3507.html

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  24. ehsaaso ka ekdam sateek chitran.........badhaai

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  25. "जज़्बात के गुँचे
    खिले नहीं कि
    मोहब्बत परवान
    चढ़ गयी
    फिर जलने लगे
    दिलों में
    दर्द के दीये"

    वाह!
    बहुत खूब .......

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  26. अति सुंदर रचना और उतनी ही सुंदर चित्रकारी.

    रामराम.

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  27. आज तो अहसासों ने हाई जम्प मारा है।
    बढ़िया लगी ये रचना , और चित्रकारी भी।

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  28. dil ko gahre tak chhu jane wali rachna.busy bee ko badhayi.

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  29. Rachana aur chitrakari dono hi bahut sundar hai...!!

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  30. बहुत अच्छा लगा
    आपके ज़ज्बात पड़कर
    कुछ अपना सा लगा
    यूँही पिरोते रहिये अपने दिले राज़
    अन्दर-बाहर अपने जैसा भी लगा


    कभी अजनबी सी, कभी जानी पहचानी सी, जिंदगी रोज मिलती है क़तरा-क़तरा…
    http://qatraqatra.yatishjain.com/

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