छन छन्न छन
मेरी पायल बोलती जाती
और
और
तुम मुदित हुए जाते हो
आँगन में अंगना
बनी मैं
डोल रही हूँ
पायल की झंकार
रस घोल रही है
हक़ है मेरी पायल
को बोलने का
पर मुझे नहीं !!
तुम क्यों
मुझे बोलने दोगे
पर
हक़ है मेरी पायल
को बोलने का
पर मुझे नहीं !!
तुम क्यों
मुझे बोलने दोगे
पर
होठ मेरे अब और
प्रतीक्षा नहीं करेंगे
प्रतीक्षा नहीं करेंगे
छटपटाते हुए
शब्द अब कहाँ
रुकेंगे
शब्द अब कहाँ
रुकेंगे
भाव भी आ रहे हैं बाहर
वाणी की सांकल
अब खुल ही जायेगी
किनारों में बंधी
नहीं रह पाएगी
कगार पर आ गई है
मेरी सोच
कगार पर आ गई है
मेरी सोच
पायल की रुनझुन
ने चिटकनी खोल दी
ने चिटकनी खोल दी
दौड़ गए हैं बाहर
मेरे भी कुछ


