Saturday, June 19, 2010

इन्डली .....ब्लॉग वाणी ....

Indli Hindi - India News, Cinema, Cricket, Lifestyle

कल से ब्लॉग वाणी को बंद देख कर राहत भी हुई है और चिंता भी ...लेकिन एक बार मन ने ज़रूर कहा बहुत अच्छा हुआ ब्लॉग वाणी बंद है...ब्लॉग का माहौल ख़राब करने में नापसंद के चटकों ने बहुत बड़ा योगदान किया था....ब्लॉग वाणी को देख कर ही वितृष्णा सी होती है....अब यही सही समय होगा ब्लॉग-वाणी नापसंद के चटकों से ख़ुद को निजात दिला ले...अपनी असहमति दिखाने के लिए टिप्पणियाँ ही काफी हैं....ब्लाग वाणी को देख कर ऐसा लगता है जैसे ब्लॉग्गिंग नहीं युद्ध हो रहा हो....जो लोग ये कहते हैं कि पसंद-नापसंद के चटके मायने नहीं रखते हैं वो इसकी उपयोगिता को नज़र अंदाज़ करते हैं....जो लोकप्रिय ब्लोग्गर्स हैं, उन्हें तो लोग पढ़ ही लेते हैं फिर चाहे उनको चटके  कैसे भी और कितने भी मिले हों...लेकिन इस होड़ में नए ब्लोग्गर्स बिल्कुल दरकिनार हो जाते हैं....उनकी ओर कोई ध्यान नहीं देता....और फिर उन ब्लोग्गर्स पर हताशा हावी होने लगती है....

परन्तु मैं नए ब्लोग्गर्स से भी कुछ कहना चाहूंगी....बिना मांगे तो माँ भी दूध नहीं देती बच्चों को...उन्हें भी ख़ुद को प्रस्तुत करना चाहिए...संकोच नहीं करना चाहिए....शालीनता से अपनी उपस्थिति को महसूस कराना चाहिए.....याद रखिये किसी को अपने ब्लॉग तक ले जाना और उसे की बोर्ड पर उंगलियाँ फिरवा कर कमेन्ट देने के लिए प्रेरित करना आसन नहीं है....लेकिन आप लोग कर सकते हैं....अगर आप को स्वयं पर विश्वास है तो..आप यह काम कर सकते हैं....

इन्डली का ऐसे समय में अवतरित होना एक सुखद अनुभूति है ..इन्डली ने एक स्वस्थ वातावरण दिया है....सही मायने में अच्छी प्रविष्ठियां अब देखने को मिल रहीं हैं....इन्डली ने नए लोगों के लिए god father का काम किया है...अभी सभी लोग नहीं जुड़ पाए हैं ...लेकिन बहुत जल्द इससे लोग जुड़ेंगे...मेरे ब्लॉग पर इससे जुड़ने का icon भी है...खुद को इससे जोड़िये, तथा अपनी पोस्ट अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाइए.....मुझे यह प्लेटफोर्म अच्छा लगा...नापसंद करने के दो तरीके होंगे यहाँ ...आप पसंद ही मत कीजिये, दूसरा आप टिप्पणी कीजिये...और सबसे अच्छी बात किसने पसंद किया है यह भी देखा जा सकता है....इन्डली के रास्ते सिर्फ़ ब्लोग्गर्स ही नहीं ग़ैर-ब्लोग्गर्स भी आपकी पोस्ट तक पहुँच रहे हैं जो...अतिरिक्त उपलब्धि है....इसलिए निवेदन है ..आप लोग ज़रूर जुड़िये इससे...फायदे में रहेंगे....


18 comments:

  1. हाँ हमने भी देखा, बहुत ही अच्छाअ लगा ये इन्डली :)

    स्वागत है, इन्डली

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  2. हाँ हमने भी देखा, बहुत ही अच्छाअ लगा ये इन्डली :)

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  3. इन्डली ठीक है, लेकिन यह पोस्ट तभी दिखाता है जब आप उस की यूआरएल उसे भेजते हैं। समय भी लेता है।

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  4. अब टिप्पणी में भी कॉपी-पेस्ट के नए आयाम दिख रहे हैं यहाँ! वाह!!
    आपकी समीक्षा अच्छी लगी, मगर मैं पूरी तरह समझ नहीं पाया क्योंकि न पहले वाला ब्लॉगवाणी जानता हूँ न इण्डली। नापसन्द करना है तो इग्नोर या नज़र-अंदाज़ भी तो कर सकते हैं?
    आप कहती हैं तो जोड़ते हैं इण्डली - ठीक ही कहा होगा आपने।

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  5. दी,
    माफ़ी चाहुगी अगर आपको मेरी बात बुरी लगे तो, लेकिन मुझे ये बात बिलकुल पसंद नहीं आई की ब्लोग्वानी को बंद करदिया गया है. इस बात से परेशानी नहीं की इन्डली शुरू किया गया है. लेकिन एक नापसंद चटकों को कारण बना कर ब्लोग्वानी को बंद करना कहा तक उचित है. इसका सीधा सीधा अर्थ तो ये हुआ की आप, हम जो भी लिखते है उसकी आलोचना न हो, बस वह-वाही हो. और अगर ऐसी को आपत्ति थी भी तो चटकों का आप्शन हटा देना चाहिए था न की ब्लोग्वानी को.

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  6. we cant compare the two
    indi clearly says its a social networking site where one can upload the things one wants , one can even barr someoen from reading their uploaded items

    i think ada it would have been better that you had read the indi clearly before comapring it with blogvani

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  7. यह सच है कि ब्लागवाणी अपनी आलोचना नहीं सह पाता।इसका जनम ही विवादों के कारण हुआ था,इसका अंत भी विवादों के साथ होगा।कई बार यह नखरे दिखा चुका है।गलती इनकी खुद की रहती है दोष हमारे आपके ब्लॉगर के जिम्मे मढ़ दिया जाता है जैसा कि पहले पसंद के मामले में हुया था देखिये http://murakhkagyan.blogspot.com/2009/09/blog-post.html
    बजाये सिस्टम सुधारने के,उसके बाद ही यह नापसंद का खेल शुरू किया गया
    इसे रोक देने की एक रणनीति भी हो सकती है सहानूभूति बटोरने की
    यही ढोल पीटा जायेगा कि देखो हम तो हिंदी की सेवा कर रहे और कुछ लोग इसे बदनाम कर रहे
    अपने गिरेबां में झांकने को कह दिया तो आपके कपड़े फाड़ देंगे यह
    अच्छा है बंद ही हो जाये।ब्लागरों में दुश्मनी भी फैल रही इनके कारण।

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  8. हम इन्द्ली परिवार में है पिछले दो माह से .
    भूल ही गए थ. अच्छा लगा नए परिवार में आ के ,प्यार दीजियेगा हम प्यार और सम्मान दोनों देंगे.

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 20.06.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  10. ब्लोगवाणी पर पसंद नापसंद का खेल खेल कर कुछ तिकडमबाज ब्लोगर अपनी पोस्ट हॉट लिस्ट पर जरूर ले जा रहे थे.

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  11. बिलकुल सही कहा आपने.


    आप पढ़िए:

    चर्चा-ए-ब्लॉगवाणी

    चर्चा-ए-ब्लॉगवाणी
    बड़ी दूर तक गया।
    लगता है जैसे अपना
    कोई छूट सा गया।

    कल 'ख्वाहिशे ऐसी' ने
    ख्वाहिश छीन ली सबकी।
    लेख मेरा हॉट होगा
    दे दूंगा सबको पटकी।

    सपना हमारा आज
    फिर यह टूट गया है।
    उदास हैं हम
    मौका हमसे छूट गया है..........





    पूरी हास्य-कविता पढने के लिए निम्न लिंक पर चटका लगाएं:

    http://premras.blogspot.com

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  12. ... मुझे तो लगता है कुछ लोग ब्लागवाणी के पैर छूने न चले जाएं .... हा हा हा !!!!

    ...ढेर सारे ब्लागरों के चीखने-चिल्लाने के बाद भी पसंद/नापसंद के चटके को चालू रखना मतलब मनमानी करना है ...!!!

    ... ब्लागवाणी व इन्डली दोनों का स्वागत है बसर्ते सिस्टम व्यवहारिक व सम्मानजनक हो ...!!!

    ... साहित्य के क्षेत्र में भ्रष्टाचार बरदास्त नहीं होगा ....!!!

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  13. इन्डली ठीक है.

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  14. हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि दान की बछिया के कभी दाँत नहीं गिने जाते....ब्लागवाणी यदि हम लोगों को (वो भी नि:शुल्क)कोई सुविधा दे रहा है तो कम से कम वो शुक्रिया का हकदार तो है ही...हमें तो ब्लागवाणी से कोई शिकायत नहीं, बल्कि उसके बंद होने का अफसोस अवश्य होगा..

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  15. हाम बोलेगा.. तो बोलोगे की बोलता है !
    दुनों में कोन बरोबरी नईं है, मैडम शी !
    बिलोगबानी बोन्द हुआ, अबी आपशे मालूम होआ ।
    आजकोल हम डियूटी से श्सुट्टी लीया है, आझ हाम डियूटी पर आया त खोबर मीला ।

    हाम त पईले ई बोला था कि रूपा का ओन्डरवियर को ऊप्पर फ़ोरोन्टलाइन का बनियाइन पहिनने से एक दीन अईशा होने सकता है ।
    आपुश का झोगड़ा में एक्को बी शाब आगे नहीं आने शकेगा ! बीना तोनखा के हामको बी शोब लोग परशान कोरता, बोलता की फ़िरी में अपना शीटी मारते रहो अऊर लीखने वाला शाब लोग को बोलो कि जागते रहो ।
    चोर बाजारी पसँद के चटकों की,
    पहले थी आदत जो वो हट गयी,
    नापसँद की जो तेरी मेरी,
    फितरत थी जो वो भी हट गयी,
    हिन्दी की तो फ़िक्र कहाँ है,
    ब्लागिंग की अब चिंता मिट गयी…
    मैं ही मैं हूँ, तू भी मैं है, मैं तो मैं हूँ
    खेल यह सारी... देख उलट गयी,


    खैर, फिलहाल यह चुहलबाजी दरकिनार, जो भी हुआ वह दुःखद है ।
    हम पोस्ट ऑफ़िस के डिब्बे का तो कभी गलत इस्तेमाल ही नहीं करते ... साहित्य के क्षेत्र में भ्रष्टाचार बरदास्त नहीं होगा ....!!!
    हम जहाँ तहाँ थूक सकते हैं, दीवारें खुरच सकते हैं, तो आखिर ब्लागवाणी ऎसी किस बगिया का माली है, जो भ्रष्टाचार बरदास्त करें ? अगर आप क्रास वोटिंग को ऍलाऊ नहीं करेंगे, ता ईहाँ आपका कोनो ठौर नहीं है !
    ब्लागवाणी जल्द ही नये रूप में आयेगी, ऎसा मेरा विश्वास है ।
    सुनते हैं कि चिट्ठाजगत ने ब्लागवाणी पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को कम करने और समय की माँग को देखते हुये तकनीक, कला, समाज, इलाकाई, खेल, मस्ती, सेहत के साथ ही एक और वर्ग ’ हल्ला-बोल ’ जोड़ने की हामी भर ली है ।
    अभी से ही इस अपुष्ट खबर पर इलाहाबाद से दिल्ली तक हर्ष की दूरोन्तो लहर दौड़ गयी है ।

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  16. @ उड़ी बाबा ...केतना गोड़बोड़ हाय...:)
    हाम किधर बोला की ब्लॉग बानी बोंदो हुआ हाय...हम बोला आज बोंदो हुआ हाय.... शाब लोग ..हमारा पीछे पोड़ गिया हाय...
    आज केतना आराम देखा ब्लॉग जोगोत में तो बोल दिया....आभी ब्लॉग बानी किछु नाया रूप देखाता हाय तो खूब भालो...केनो की आभी तो शोब पहलवान लोग भी थाक गिया है न...:)

    :):):)

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  17. सभी का योगदान अपनी जगह बेहतरीन है, किसी को कमतर नहीं आंका जा सकता.

    ईन्डली भी बहुत अच्छा है.

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  18. हम तो गुट निरपेक्ष हैं :) वैसे सब अच्छे हैं,
    ये शीर्ष वाला गणित इन aggregators को हटा देना चाहिए फिर मारामारी इतनी नहीं होगी !!

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