Wednesday, June 16, 2010

सुनी थी रात उसकी हिचकियाँ ....


Banff  नॅशनल पार्क ..मोरेन लेक...


लहू में कौंध रहीं हैं बिजलियाँ
साँसों में चलने लगीं आँधियां 
यादों का आँचल अब उड़ने लगा
नज़रों में तैर गई परछाईयाँ 
थके थके से मेरे ख़्वाब जागते रहे 
सितारे लेते रहे अंगडाईयाँ 
जाने कौन गुज़रा दीवार के पीछे 
सुनी थी रात उसकी हिचकियाँ 
 

34 comments:

  1. झील के निर्मल पानी के समान ही रचना। बधाई।

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  2. वाह सुन्दर प्रस्तुति...आभार

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  3. सुन्दर रचना

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  4. जाने कौन गुज़रा दीवार के पीछे
    सुनी थी रात उसकी हिचकियाँ

    है तो बहुत ही बहुत सुँदर रचना...
    पर वह... तोई छलाबी लहा होगा..
    वो ही तो हीतकी लेता लैहता है, ना ?


    must be approved

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  5. जो भी गुजरा
    वह अपना था
    यूँ ही राह चलते
    हिचकियाँ नहीं सुनाई देतीं .... एक हिचकी मैं भी सुनती हूँ हर दिन, मुड़कर आँखें दौड़ाई हैं-- कहीं मैं ही तो नहीं

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  6. सुन्दर रचना....

    वाह...वाह...वाह

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  7. भगवान् करे जिंदगी भर आती रहे तुझे हिचकियाँ ....
    बात मत करना कभी मुझसे ...

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  8. बेहद ही खुबसूरत और मनमोहक...

    बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  9. सुंदर भावपूर्ण रचना..छोटी पर बेहद प्रभावशाली..

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  10. the flow is gr8....really good

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  11. एक और खूबसूरत तस्वीर और रचना ।
    अदा जी आपने बताया नहीं ये पार्क कनाडा के कौन से भाग में है ।

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  12. अनुभूतियों की आकर्षक अभिव्यक्ति..बधाई।

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  13. लाजवाब रचना ........बहुत खूब .

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  14. सादर !
    हवा से कुछ खुसबू आई है ऐसी
    लगा मुझको शायद वो गुजरा इधर है
    रत्नेश त्रिपाठी

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  15. @ दराल साहेब,
    सबसे पहले माफ़ी..देर से जवाब देने के लिए...
    Banff नॅशनल पार्क,कनाडा का पहला नॅशनल पार्क है यह ..लभग डेढ़ घंटे की ड्राइविंग दूरी पर , अल्बर्टा के कैलगरी नमक स्थान के पश्चिम में है ..यह पार्क ६६४१ वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है...यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता बेजोड़ है...मैं और तसवीरें दिखाने की कोशिश करुँगी....
    Banff में कनाडा का सबसे बड़ा फिल्म इंस्टिट्यूट भी है...वहां संतोष जी को director की position भी मिली थी लेकिन कुछ कारणवश नहीं जा पाए....

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  16. खूबसूरत एहसास से जागे ज़ज्बात में लिखी नज़्म ... बेहतरीन ...

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  17. बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ। दिल को छू जाने वाली एकदम।

    ये फ़ोटोग्राफ़ न होकर पेंटिंग लग रही हैं, रंग विन्यास और पर्वत पेड़ों की आकृति ऐसे भी दिख सकती है? बहुत शानदार दृश्य।

    सदैव आभारी।

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  18. जाने कौन गुज़रा दीवार के पीछे सुनी थी रात उसकी हिचकियाँ
    सुन्दर रचना।

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  19. waah bahut khoob ..tasveer bhi sundar hai

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  20. @ दाकतल छाहेब ...:)
    हो छकता है छलाबी ही था....अच्छा हुआ...
    हाँ नहीं तो..!!
    :):)

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  21. अच्छी रचना पढ़वाने के लिए आभार.

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  22. सीधे शब्दों में सुन्दर भाव ।

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  23. ऊँहूँ.. हिचकियाँ फिट नहीं बैठ रहा दी... बाकी बहुत अच्छी रचना बन रही है. पूरी कीजिए..

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  24. ऊँहूँ.. हिचकियाँ फिट नहीं बैठ रहा दी... बाकी बहुत अच्छी रचना बन रही है. पूरी कीजिए..

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  25. बेहतरीन। लाजवाब।

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  26. जाने कौन गुज़रा दीवार के पीछे
    सुनी थी रात उसकी हिचकियाँ
    सशक्त और सुन्दर अभिव्यक्ति----

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  27. ऐसे ही एक पंजाबी साहिबा को मियां जी के परदेस जाने के बाद हिचकियां ले लेकर बुरा हाल हो गया...साहिबा ने मियां जी को फोन कर के कहा...याद पये करेंदे हो या जान पये कडेंदे हो...(याद कर रहे हो या जान निकाल रहे हो...)

    जय हिंद...

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