Monday, September 21, 2009

नहीं तो हम बस खुदा घर चले


हम अब घर के रहे न घाट के रहे
धोबी का गधा बना कर चले

घातों से बातों से इतना नवाजा
इनकी भी आदत लगा कर चले

मैके जो जातीं तो जल्दी कब आतीं
कब आएँगी ये तो बता कर चले

शोपिंग को जाती हैं डालर लुटातीं
क्रेडिट उमर भर अदा कर चले

मोर्निंग उठता हूँ दिन भर खटता हूँ
मेनू हमें बस पकडा कर चले

आप ही आइये हाथ कुछ बटाइये
नहीं तो हम बस खुदा घर चले

30 comments:

  1. अदा जी आप तो लाजवाब लिखती हैं

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  2. आप ही आइये हाथ कुछ बटाइये
    नहीं तो हम बस खुदा घर चले
    wow !!

    humour main to aap kamal kar deti ho....
    bade dino baad aisa rang dekne ko mila...

    wo hain hamare 'lifetime free credit card'
    hamahu daddy ka paisa uda kar chale.

    wo neta hain ya koi zadugar?
    fir se humein ullu bana kar chale.

    ka kahein ,ka na kahein bus ab?
    hum to aiwen hi tipya kar chale !!

    bekar hain na?
    Bhai banaya hai to jhelo !!

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  3. इतनी नाराजी क्यों की खुदा घर चले . वाह वाह .उम्दा.

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  4. आप ही आइये हाथ कुछ बटाइये
    नहीं तो हम बस खुदा घर चले

    अरे नहीं ऐसा गजब ना करिये, आप जब कहिये हम आ जहिऐ।

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  5. लाजवाब रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  6. दी .................अच्छा अब मेरे जैसे चोरे से दर गयी न ....................सो खुदा घर चले .......................मैं आपको बताऊँ आज ईद पर ज़रा , खुदा भी आपके पास सिवैयां खाने बेक़रार हैं और आप उल्टा जा रही हैं ....................... आलसी हो आप ..........बनाना नहीं होगा ............या हो सके खिलाने की कंजूसी हैं ..........चालों मुझसे एक ग़ज़ल उधार ले लो ...............वो सुबह वाली ...................वैसे आप तो जानती हैं न खुदा के पास मेरी रूह उधार हैं .............................

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  7. वाह मज़ा आ गया.
    बहुत सुन्दर

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  8. ांअपकी तो अदा ही निराली है क्या बात है बधाई

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  9. मीना Sorry अदा जी,
    क्या बात है!
    सच में पर वापस आ गया हूं, आपके आने और सराहने क शुक्रिया, आप की दाद पाने लायक एक प्रयास ’सच में’ पर प्र्स्तुत है, नवाज़िश करे और Comment ज़रूर दें!ईद और नवरात्रि की शुभकामनाएं!

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  10. दी बहुत गलत बात .........................मैंने टिप्पणी पढ़ ली हैं ............................दरअसल दर्पण तो ज़िगरी हैं मेरा ...............................और मुझसे कही आगे ............बहुत हुनरमंद ...................आप सब की सोहबत में मैं थोड़ा सा ज़ी लेता हूँ ................और बहुत ज्यादा सीख लेता हूँ ........................सच्चे दिल से कहता हूँ दी ......................जो दिल में हो मुझसे कहो ..................सिर्फ़ किसी रचना पर ही नहीं मेरी किसी भी बात पर मुझे मेरी आलोचनाये सर्वाधिक प्रिय हैं ....................................फिर अभी तो आपने बिलकुल सहो बात कही .....................मैं दो-चार दिन का पंछी हूँ .................................और मेरा दर्पण .................................किसी को भी दर्पण और दर्शन दिखने वाला ...............................और हां आप मुझे डबल सूरज हमेशा कहती रहिये .........................मैं भोला भला भालू फूल कर कुप्पा हो जाता हूँ ...................................सादर-चरण स्पर्श! ........................

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  11. मोर्निंग उठता हूँ दिन भर खटता हूँ
    मेनू हमें बस पकडा कर चले

    आप ही आइये हाथ कुछ बटाइये
    नहीं तो हम बस खुदा घर चले

    आपमें विषयों की विविधता भी है,यह जानकर ताज्जुब होता है, कि कविता करना आपके लिए उतना ही सहज है जितना कि सांसे ।

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  12. आप ही आइये हाथ कुछ बटाइये
    नहीं तो हम बस खुदा घर चले

    -अब बचा का है जी....नमस्ते कर चले!! :)

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  13. 'धोबी का कुत्ता बना कर चले'

    माफ़ करें,इसका मतलब नहीं समझ सके,

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  14. Sochati hun, mere mankee baaten aapko kaise pata chal jatee hain????

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  15. मैके जो जातीं तो जल्दी कब आतीं
    कब आएँगी ये तो बता कर चले

    शोपिंग को जाती हैं डालर लुटातीं
    क्रेडिट उमर भर अदा कर चले

    HA HA HA...
    KYA LIKH DIYA 'ADA' JI AAPNE
    BAHUT KHOOB.

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  16. This comment has been removed by the author.

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  17. लातों से बातों से इतना नवाजा
    इनकी भी आदत लगा कर चले

    मैके जो जातीं तो जल्दी कब आतीं
    कब आएँगी ये तो बता कर चले

    शोपिंग को जाती हैं डालर लुटातीं
    क्रेडिट उमर भर अदा कर चले

    मोर्निंग उठता हूँ दिन भर खटता हूँ
    मेनू हमें बस पकडा कर चले

    आप ही आइये हाथ कुछ बटाइये
    नहीं तो हम बस खुदा घर चले
    अदा जी,
    कमाल कर दिया जी आपने..
    बस आप 'कुत्ता' को बदल कर 'गधा' कर दो' please
    बाकि सब बहुत अच्छा हास्य है ..
    लेकिन कौन लिख रहा है ?
    फिर भी पसंद आया...
    देख रहा हूँ कलकत्ता वाले लोग भी आये हुए हैं
    हम्म्म कहते हैं हम फुर्सत में हैं...अजी हम ही जानते हैं की वक्त कैसे निकालते हैं इस पागलपन के लिए.
    ब्लॉग्गिंग से तो अच्छा है किसी को चरस-गांजे की लत लग जाए..
    फिर भी ब्लागगिंग के बिना रह नहीं सकते हैं न..

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  18. लातों से बातों से इतना नवाजा
    इनकी भी आदत लगा कर चले

    मैके जो जातीं तो जल्दी कब आतीं
    कब आएँगी ये तो बता कर चले

    शोपिंग को जाती हैं डालर लुटातीं
    क्रेडिट उमर भर अदा कर चले

    मोर्निंग उठता हूँ दिन भर खटता हूँ
    मेनू हमें बस पकडा कर चले

    आप ही आइये हाथ कुछ बटाइये
    नहीं तो हम बस खुदा घर चले
    अदा जी,
    कमाल कर दिया जी आपने..
    बस आप 'कुत्ता' को बदल कर 'गधा' कर दो' please
    बाकि सब बहुत अच्छा हास्य है ..
    लेकिन कौन लिख रहा है ?
    फिर भी पसंद आया...
    देख रहा हूँ कलकत्ता वाले लोग भी आये हुए हैं
    हम्म्म कहते हैं हम फुर्सत में हैं...अजी हम ही जानते हैं की वक्त कैसे निकालते हैं इस पागलपन के लिए.
    ब्लॉग्गिंग से तो अच्छा है किसी को चरस-गांजे की लत लग जाए..
    फिर भी ब्लागगिंग के बिना रह नहीं सकते हैं न..

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  19. रहे न हम अब घर के न घाट के
    धोबी का कुत्ता बना कर चले

    विवेक जी,
    आपसे हाथ जोड़ कर माफ़ी
    इसको 'धोबी का 'कुत्ता' नहीं 'गधा' पढ़े धन्यवाद..
    तो अब पूरा शेर बनता है..

    हम न अब घर रहे के न घाट के रहे
    धोबी का गधा बना कर चले

    परिमल जी,
    आपका ह्रदय से धन्यवाद..

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  20. घातों से बातों से इतना नवाजा
    इनकी भी आदत लगा कर चले

    मैके जो जातीं तो जल्दी कब आतीं
    कब आएँगी ये तो बता कर चले

    शोपिंग को जाती हैं डालर लुटातीं
    क्रेडिट उमर भर अदा कर चले
    ada ji,
    ab ham kya kahen aapse kuch bhi kahne layak ab ham hai hi nahi.
    yahi sab to ho raha hai na hamre saath bhi.
    bas maza aagaya ji isko padh kar.
    bahut hi badhiya.
    aapka shukriya itni jaldi itna accha likhti hain aap kamal hai ji.

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  21. दी ................अब ज़रा ठीक हैं ...................तो फिर दर्पण के पास जा रहा हूँ ......................आपके कछू सीक्रेट मालूम करने हैं ........................कहाँ से आती हैं इतनी खुशबू ....................आपकी महफ़िल में ........................... दीदी धोबी का गधा ..................बात तो सही हैं ..................पर कुत्ते पर मुझे बहुत तेज़ हसी आयी थी .................हहहहहह्हह्हः ................................मतलब बताऊँ .................................अब आपको पता ही हैं ................की मैं गधा भी हूँ ...................................और वो भी धोबी का ................................पर आप एक कार्टून फिल्म की कल्पना कीजिए ................मैं और धोबी का कुत्ता .....................................सारे बच्चे बोलेगें .................दिदिदिदिदिदिदिदिदिदिदिदिदी .............विवेक जी , परिमल जी बहुत शुक्रिया ........................वर्ना मैं गधा .......................धर्म परिवर्तन करा कर कुत्ता बना दिया गया था .....................ये अदागिरी वाले लोग कुछ भी मुमकिन कर देते हैं ..............................और हां हिन्दुस्ता में रात के बारह बाज़ चुके हैं .....................कुत्ते को न सही गधे को तो नींद आती हैं ....................सच बताऊँ कुत्ता तो इंसान से बहुत ज्यादा वफादार होता हैं ..........................और गधा भी कुछ हो न हो ....................जानवर बहुत काम का होता हैं .....................और ये सब मज़हबी भी नहीं होते ................किसी को भी कुछ बना दो ...............................शायद मैं पागल हो चूका हूँ .................................पता नहीं ............पर बहुत से परिचित जो मुझे जानते हैं .......................कह चुके हैं मैं सभ्य समाज में रहने योग्य बिल्ल्कुल नहीं ......................

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  22. अरे ऎसे केसे आप खुदा के यहां जा सकती है ? पहले हमे खुब सारी कविता लिखे फ़िर कभी मिलने पर सिर्फ़ एक ही सुनाये , बस फ़िर ८०, ९० साल बाद जाना, जब आप के पोते पोतिया कविता लिखने लगे:) बहुत सुंदर लिखा, आज मजाक के मुड मै थोडा लिख दिया बुरा ना माने.
    धन्यवाद

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  23. This comment has been removed by a blog administrator.

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  24. Mujhse naaraj to nahi ho na aDaDi ?

    raat itni bhari thi mano chaand ki potli apni peeth pe laadk kar use duboya ho khud maine....
    Subah hone tak aasman khali tha aur dil kuch bhara sa !!

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  25. अदाजी , आज ऐसी बहकी बहकी बातें क्यों कर रही हैं ...कुछ अटपटा सा लग रहा है ...शोपिंग का बिल ..धोबी का कुत्ता ...मतलब ..गधा ...किसको बुला रही हैं हाथ बांटने के लिए और .. खुदा घर जाये आपके दुश्मन...ऐसी मानसिक स्थिति में जाएँगी खुदा के घर ..??

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  26. लाजवाब रचना, शुभकामनाएं.

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  27. aap kiis laajaawab rachna ke liye badhai............ maza aa gay apadh ke........


    आप ही आइये हाथ कुछ बटाइये
    नहीं तो हम बस खुदा घर चले

    abhi to filhaal khaana khaane ja raha hoon....... aa ke haath batata hoon......... par plz abhi mat jayiyega khuda ke ghar......... aata hoon......... phir dono saath chalenge........

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