Saturday, November 27, 2010

ये दिल मेरा मेरे ख़ुदा, ना दर्द की किताब हो....


सितारों में पनाह लूँ
बेशक़ मेरा ये ख़्वाब हो,  
मगर ये ज़मीं मेरी 
पैकरे-शबाब  हो,
तेरी रहमतों पे तुझे
शायद बहुत नाज़ हो,
मगर इतना करम करो 
गुनाहों का बज़ा हिसाब हो,
मिटी-मिटी हैं इबारतें
यहाँ-वहाँ इधर-उधर,
मैं भी परेशान हूँ
भला अब क्या जवाब हो,
चेहरे क्यूँ जले-जले
हैं आँखें भी धंसीं-धसीं,
कम ख़ुशी ही हो ज़िन्दगी
हर साँस न अज़ाब हो,
सुकून के हुज़ूम बस
झूम जाएँ कभी-कभी,
ये दिल मेरा, मेरे ख़ुदा
ना दर्द की किताब हो....

पैकरे-शबाब = यौवन की मूर्ति
इबारतें = लिखावट
 
जो हमने दास्ताँ अपनी सुनाई....आवाज़ 'अदा' की....


12 comments:

  1. Kya likhtee hain aap...aur utnaahee khoobsoorat gaatee bhee hain! Dono fan gazab ke hain!

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  2. तेरी रहमतों पे तुझे
    शायद बहुत नाज़ हो,
    मगर इतना करम करो
    गुनाहों का बज़ा हिसाब हो,....

    बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति...लाजवाब

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  3. सब कुछ बेहतर और बेहतर पर हम इन दो लाइनों पे फ़िदा हुए ...

    मिटी-मिटी हैं इबारतें
    यहाँ-वहाँ इधर-उधर,

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  4. गज़ब लिखती हैं आप, अभिव्यक्ति का अनूठा अंदाज है।
    "मिटी-मिटी हैं इबारतें
    यहाँ-वहाँ इधर-उधर"
    बहुत शानदार पंक्तियां लगीं।
    गाना बहुत अच्छा लगा।
    आभार स्वीकार करें।

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  5. बेहतरीन अभिव्यक्ति...................

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  6. मिटी-मिटी हैं इबारतें
    यहाँ-वहाँ इधर-उधर,
    मैं भी परेशान हूँ
    भला अब क्या जवाब हो..
    ..सुंदर नज़्म की लाज़वाब पंक्तियाँ।
    ..बधाई स्वीकार करें।

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  7. बहोत ही खुबसूरत ............

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  8. जीभर झूमें, जीवन में हर ओर घूमें।

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  9. कभी लोग कहते थे ग़ालिब की खातिर,
    मगर कह रहा हूँ तुम्हारे लिए मैं, कि:-

    कहते है "अदा जी" का है अंदाज़े-बयां और

    बेहतरीन बेहतरीन बेहतरीन

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  10. बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति.........

    http://saaransh-ek-ant.blogspot.com

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