Saturday, August 29, 2009

पलकें....

हर दिन,
तुम्हारे ख़्वाब
हमारी पलकों पर
दस्तक दे रहे हैं
झिरी में से
अन्दर देख रहे हैं
आज फिर बाहर
वो कतार सजाएं है
न जाने कितनी बार
कुंडा खटखटाएं हैं
पलकें खुलने को
आतुर हो जाती हैं
फिर डर कर
वहीं बैठ जाती हैं
बंद आँखें जागने लगीं हैं
तुम्हारे ख्वाबों से
दूर भागने लगी हैं
अब तो
सारी उम्र हम नहीं सो पायेंगे
तुम ही बताओ
कि अब मेरे ख्वाब कहाँ जायेंगे ??

24 comments:

  1. बंद आँखें जागने लगीं हैं
    तुम्हारे ख्वाबों से
    दूर भागने लगी हैं
    ~~~~~~~~~
    एहसास की यह उधेडबुन
    वाह

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  2. सोकर सपने सभी देखते अच्छा और खराब।
    स्वप्न की मंजूषा क्यों कहती है जगकर देखें ख्वाब।।

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  3. सारी उम्र हम नहीं सो पायेंगे
    तुम ही बताओ
    कि अब मेरे ख्वाब कहाँ जायेंगे ?boht sunder....

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  4. वाह क्या बात कही है आपने ......जिसका कोई जवाब नही .......बधाई

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  5. बंद आँखें जागने लगीं हैं
    तुम्हारे ख्वाबों से
    दूर भागने लगी हैं
    अब तो
    सारी उम्र हम नहीं सो पायेंगे
    तुम ही बताओ
    कि अब मेरे ख्वाब कहाँ जायेंगे ??


    अब मेरे खाब कहाँ जायेंगे....
    बहुत ही खूबसूरत लगा इसे पढ़ना..

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  6. क्या ऐसा संभव है कि एक ही अनुभूति दो लोगों को हो, आज आप को पढ़ कर लग रहा है कि मेरी अनुभूति को आपने शब्द दे दिए ।

    अंदर की आंख जगती है
    तो बाहर की आंख से देखा गया सपना ही लगता है.

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  7. हम भी ऊहापोह में है..... क्योकि जवाब नही मिला.....
    सुन्दर रचना......

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  8. वाह जी वाह!! बहुत सुन्दर!

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  9. हमेशा की तरह ..बस एक लफ्ज़ ..'वाह !'

    'पलकों पे ख्वाबों की कलियाँ सोती हैं ..उनसे कोई पूछता हँसती हैं या रोती हैं '..अल्फाज़ मेरे नही ..और शायद उस क्रमसे नही ..लेकिन 'अनुपमा ' का ये गीत: 'कुछ ऐसी भी बातें होती हैं....', आपने याद दिला दिया!

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  10. ख्वाब तो ख्वाब है वो तो आयेंगे ही । पुराने विषय पर एक नई कविता ।

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  11. This comment has been removed by a blog administrator.

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  12. अब तो
    सारी उम्र हम नहीं सो पायेंगे
    तुम ही बताओ
    कि अब मेरे ख्वाब कहाँ जायेंगे ??
    behad khubsoorat ahsaas.

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  13. पलकें खुलने को
    आतुर हो जाती हैं
    फिर डर कर
    वहीं बैठ जाती हैं
    बंद आँखें जागने लगीं हैं
    तुम्हारे ख्वाबों से
    दूर भागने लगी हैं
    अब तो
    सारी उम्र हम नहीं सो पायेंगे
    तुम ही बताओ
    कि अब मेरे ख्वाब कहाँ जायेंगे ??

    aapki kavita ek alag sa ayaam liye hue hain.
    bahut sundar.
    badhai!!!

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  14. ख्वाब बनाकर ना सजाओ पलकों पर ...कहे देते हैं नींदे ही उडा ले जायेंगे ...अब भुगतो ..!!
    अच्छी रचना ..!!

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  15. .......
    अब तो
    सारी उम्र हम नहीं सो पायेंगे
    तुम ही बताओ
    कि अब मेरे ख्वाब कहाँ जायेंगे ??


    di kya hamesha aisa likh ke bacche ki jaan logi?
    aap chahe kitna bhi accha likho....
    ..Bacche ke comment main humour to hoga hi.....


    ....Kehte hai ki mohabat main neend ud jaati hai....
    ....Koi umse bhi mohabbat kar le humein need bahut aati hai.....

    ....aur, एक बार फिर
    तेरी जफ़ा ओढ़ कर
    कब्र-ए-मोहब्बत में
    चुपके से सो जाते हैं.

    zzzzzzZZZZZZZZZZZZZZZSSSSSSSzzzzzzzzzzsssssssssss......

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  16. बहुत लाजवाब। काफी अच्छा लगा।
    आपा मैं इन चार-पांच दिनों काफी बीज़ी रहा मैग्जीन के काम में, इसलिए कमेंट बॉक्स में मैं नहीं दिखा होउंगा। मंगलवार के बाद से बराबर देखा जाऊंगा, यहीं पे।

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  17. अल्लाह! सारी उम्र ,यूँ निकल जायेगी ,बस यु ही आपको पढ़ते-पढ़ते ..........................

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  18. तुम्हारे ख्वाबों से
    दूर भागने लगी हैं
    अब तो
    सारी उम्र हम नहीं सो पायेंगे
    तुम ही बताओ
    कि अब मेरे ख्वाब कहाँ जायेंगे ??

    bahut hi sahii question poocha hai aapne...

    -Sheena

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  19. हर दिन,
    तुम्हारे ख़्वाब
    हमारी पलकों पर
    दस्तक दे रहे हैं

    bahut sunder


    तुम ही बताओ
    कि अब मेरे ख्वाब कहाँ जायेंगे ??

    ab khwaab hain to sach ho ke door tak zaroor jayenge.......

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  20. JAB UNKE KHWAAB APNI AANKHON MEIN JAGAH BANAANE LAGEN TO HAMAARE KHWAAB KAHAAN JAAYENGE ....... LAJAWAAB PRASTUTI HAI ......... BAHOOT HI KHOOB

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