Saturday, July 21, 2012

बात थोड़ी पुरानी है....

आज बस यूँ ही इंटरनेट खंगालते हुए कुछ नज़र आ गया। सोचा क्यूँ न इसे आपलोगों के साथ साझा  कर ही लिया जाए ।

यहाँ से पढ़ा जा सकता है इसे :


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09.13.2008
 
आरोही साऊथ एशियन प्रोग्राम ने हिन्दी कविता का प्रसारण

 9 दिसम्बर, 2004 - संध्या 8 बजे कैनेडा की राजधानी ओटवा से 97.9 एफ.एम चिन रेडियो के आरोही साऊथ एशियन प्रोग्रामने हिन्दी कविता का प्रसारण किया। संध्या के पाँच बजे के लगभग श्रीमती स्वप्न मंजूषा शैल ने हिन्दी चेतना के सम्पादक श्री श्याम त्रिपाठी जी के सम्पर्क स्थापित किया कि किसी कारणवश उनके रेडियो अतिथि नहीं आ रहे तो उस समय के दौरान वह रेडियो से हिन्दी कविता का प्रसारण करना चाहती हैं। क्या यह त्रिपाठी जी के लिए सम्भव है कि इतने कम समय में कवियों को एकत्रित कर सकें काव्यपाठ के लिये?
त्रिपाठी जी ने तुरन्त हामी भर दी क्योंकि त्रिपाठी जी जानते थे कि कवि तो अवसर ढूँढते रहते हैं कविता सुनाने के लिए और तिस पर रेडियो प्रसारण! कोई समस्या ही नहीं थी! कुछ टेलीफोन की घंटियाँ बजीं और कविगण तैयार होकर बैठ गये संध्या के 8 बजने की प्रतीक्षा में।
 आरोही कार्यक्रमके नियोजक शैल दम्पति हैं। श्री सन्तोष शैल जी टी.वी. से बहुत लम्बे अस्è से सम्बन्धित रहे हैं। डॉ. स्वप्न मंजूषा शैल स्वयं कवयित्री हैं। यह कार्यक्रम ओटवा क्षेत्र से बाहर अंतरजाल  रुरुरु.ारश्हi. पर भी सुना जा सकता है। संतोष और स्वप्न मंजूषा शैल जी ने न केवल टोरोंटो के हिन्दी चेतना से सम्बन्धित कवियों को ही आमन्त्रित किया बल्कि ओटवा क्षेत्र और माँट्रियॉल के कवियों को भी आमन्त्रित किया। परन्तु कार्यक्रम पर टोरोंटो के कवि ही हावी रहे क्योंकि यहाँ का साहित्य समाज बहुत क्रियाशील है। टोरोंटो से भाग लेने वाले कवियों में से - महाकवि हरिशंकर आदेश, राज महेश्वरी, सुरेन्द्र पाठक, भगवत शरण शरण सरोज सोनी, डॉ. शैलजा सक्सेना, सुमन कुमार घई, पाराशर गौड़ और चेतना के संपादक श्याम त्रिपाठी थे। अन्त में डॉ. स्वप्न मंजूषा शैल जी ने भी अपनी एक हास्य कविता सुनाई। सभी प्रवासी भारतीय श्रोताओं ने उस कविता में अपनी छवि देखी। कविता में मंजूषा जी ने पहली बार कैनेडा में एक प्रवासी के सम्मुख आने वाली बाधाओं का बहुत ही सुन्दरता और रोचक रूप में वर्णन किया है।
मेरी बारी आने पर सन्तोष जी ने साहित्य कुंज के विषय में कई प्रश्न पूछे तथा अपने श्रोताओं को सूचित किया कि रुरुरु.ारश्हi.च के मुख्य पृष्ठ द्वारा भी साहित्य कुंज तक पहुँचा जा सकता है। मैं उनके इस प्रयत्न के लिए आभारी हूँ।
पहली बार कैनेडा में हिन्दी कविता के रेडियो प्रसारण पर साहित्य कुंज शैल दम्पती को धन्यवाद व बधाई देता है और आशा रखता है कि भविष्य में भी ऐसा होता रहेगा

16 comments:

  1. फिर बताएं कि भविष्य में ऐसा फिर हुआ क्या????
    साहित्य कुञ्ज की आशाएं पूरी हुईं कि नहीं???

    अनु

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    1. आउल का...
      कैसे नहीं पूरी होतीं भला !!

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  2. हम तो पेले से ही पढ़ चुके हैं इसे, भविष्य में का हुआ, जे और बताना था| हाँ नहीं तो..!!

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    1. ई लो आप भविष्य की बात करे हो...
      हम तो वर्तमान में भी कवि सम्मलेन करवाते ही रहती हूँ...
      रेडियो से दूर हूँ फिलहाल लेकिन बहुत जल्द धमाके के साथ अवतार लेना है...
      हाँ नहीं तो..!!

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  3. बेकरार दिल तू गाये जा..............
    वहाँ कमेन्ट की मनाही क्यूँ???
    fell in love with ur voice....and song was superb too.

    anu
    (don't publish if u dont like...this comment is for u )

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    1. अरे..!
      ग़लती से मिश्टेक हो गया मईडम
      ध्यान में नहीं रहा कि कोमेंत्वा का बक्सा बन्द है...
      कोई बात नहीं ..कमेन्ट हीयाँ हो कि हुवाँ, बात एके है.
      घी कहाँ गिरा, तो दाल में...:)

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  4. उसकी रिकार्डिंग यहां लगानी थी। हम भी सुनते डा. शैल की हास्य कविता।

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    1. ऊ रेकॉर्डिंग तो होगी नहीं हमारे पास ..लेकिन किसी दिन सुना देंगे, अपनी हास्य कविता ज़रूर..
      बाक़ी रही डॉ. की बात, तो एक पी.एच डी हमरे पास भी है..लेकिन उसको हम कहते है , पागल होने की डिग्री (पी.एच.डी.) :):)
      हा हा हा

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  5. साहित्य कुञ्ज में रचनाओं के पुष्प खिलें...

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    1. प्रवीण जी,
      जब साहित्य कुञ्ज ही है, तो रचनाओं के पुष्प खिलना लाज़मी है...

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  6. हायं ...पीएचडी माने ई होता है ..घनघोर एक्सकिलुसिभ सुनाईं जी आप । बकिया पोस्ट रोचक लगी खूब मजेदार ।

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    1. अब का कहें अजय जी,
      एही तो अपुन का घनघोर इश्टाइल है! :)

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  7. पढ़कर बहुत अच्छा लगा दीदी । वैसे आपकी पिछली पोस्ट का लिंक आज की हलचल पर है।
    वहाँ कमेन्ट बॉक्स बंद है :(

    सादर

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  8. “साहित्य कुंज” शैल दम्पती को धन्यवाद व बधाई देता है और आशा रखता है कि भविष्य में भी ऐसा होता रहेगा"

    हम भी इनके सुर में सुर मिलाकर धन्यवाद कहते हैं..इतनी अच्छी पोस्ट शेयर करने के लिए और भविष्य में ऐसी और रिपोर्ट पढ़ने की आकांक्षा रखते हैं.

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  9. आपके हास्य सम्मेलन के अंशों का देर सबेर इंतजार रहेगा ..शानदार संस्मरण ...

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  10. achchhi post, achchha sansmaran....... dhanyawad:)

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