Monday, July 9, 2012

हम होंगे क़ामयाब...






बोलीवुड का इतिहास उठा कर देखें, मुस्लिम औरतों ने उस समय फिल्मों में करना शुरू किया था, जब हिन्दू औरतों के लिए यह सब कल्पना से परे था । अधिकतर मुसलमान सिने तारिकाएँ, अच्छे घरों से नहीं थीं, किसी का सम्बन्ध, नाचने वाले घरों से था या फिर नौटंकी करने वालों से। फिर भी, ऐसा क्यूँ है कि हम भारतीय हिन्दुओं ने, आज तक कभी किसी भारतीय मुस्लिम सिने तारिका का अनादर नहीं किया है, हमने हमेशा, उन्हें ऊंचे से ऊंचा स्थान दिया है, उनको इज्ज़त बक्शी है, चाहे उनका भूत कैसा भी रहा हो। इसलिए कि, हमें बचपन से यही सिखाया गया है। हम चाह कर भी, किसी स्त्री का अनादर नहीं कर सकते। 

अब उनकी मजबूरी चाहे जो भी रही हो, लेकिन मैं उनके हिम्मत को सलाम करती हूँ, कि उन्होंने समाज और अपने धर्म की परवाह न करते हुए कला को अपनाया । और हिन्दुस्तान की अवाम ने जी भर कर उनका साथ निभाया। सोचती हूँ अगर ये सिने-तारिकाएं, किसी मुसलमान देश में जन्म लेतीं तो क्या वो ये वो मुकाम पातीं, जो यहाँ रह कर उन्होंने पाया ???

उन्हें इतने ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने में भारतीय पुरुषों का सबसे बड़ा हाथ रहा है।  यह भारतीय पुरुष के  संस्कार ही हैं जिन्होंने, इन एक्ट्रेसस के फॅमिली-बैकग्राउंड को कभी तवज्जो नहीं दिया, सिर्फ उनकी कला को देखा और सराहा।  जबकि, 40-70 के दशक की ज्यादातर मुसलमान सिने तारिकाओं का पारिवारिक परिवेश बहुत भव्य नहीं था। 

लेकिन ब्लॉग जगत के मुस्लिम पुरुषों का, अच्छे घरों की हिन्दू महिलाओं, के प्रति रवैय्या देख कर हैरानी होती है, कि कितनी सफाई और कितनी प्लानिंग से वो, हिन्दू महिलाओं की बेईज्ज़ती करके, साफ़ निकल  जाते हैं। उनकी आँखों में धर्मान्धता ऐसी कूट-कूट कर भरी हुई है, कि उनको नज़र ही नहीं आता, कि वो सम्मानित घरों की महिलाओं की प्रतिष्ठा से खेल रहे हैं। प्रतिष्ठा जैसी चीज़ का कोई धर्म नहीं होता। मुसलमान स्त्री की प्रतिष्ठा, हिन्दू स्त्री की प्रतिष्ठा से ऊंची नहीं होती। वो सिर्फ प्रतिष्ठा होती है। उस पर से हज़ारों थोथी दलील देना। ये वो लोग हैं जो औरत की आबरू, इज्ज़त का गाना गाते हुए थकते भी नहीं हैं। लेकिन जब अमल करने की बात आती है, तो धर्म के हिसाब से वो 'प्रतिष्ठा' का बंटवारा करते हैं।

मुसलमान, हिंदी फिल्म तारिकाओं के नाम देखिये:
वहीदा रहमान, मीना कुमारी, मधुबाला, मुमताज़, तब्बू , शबाना आज़मी, नर्गिस, रीना रॉय, सुरैय्या, निगार सुल्ताना, खुर्शीद बानो, सायरा बनो, मंदाकिनी, जीनत अमान , परवीन बाबी, ज़रीना बहाब, जाहिरा, ज़ेबा बख्तियार, दिया मिर्ज़ा , कैटरीना कैफ़  इत्यादि।

सिनेमा में काम ही करना बहुत बड़ा  'बोल्ड' कदम माना जाता था, इसमें से कितनी ऐसी भी, मुसलमान सिने तारिकाएं हैं, जिनकी बोल्डनेस की सीमा रेखा पार करना, आज की तारिकाओं के लिए भी एक चुनौती है, फिर भी हिन्दुस्तान ने न सिर्फ इनकी इज्ज़त अफजाई की है, यहाँ इनको हर वो मुकाम हासिल हुआ है, जिसकी भी इन्होने तमन्ना की है/थी।

कुछ बहुत ही पुरानी तारिकाओं की हम बात करते हैं। बँटवारे के बाद अधिकतर ने हिन्दुस्तान को ही अपना घर माना था, कुछ ऐसी थीं जिन्होंने हिन्दुस्तान छोड़ कर जाने की, कोशिश की या चलीं गयी, गुमनामी के अँधेरे में डूबते वक्त नहीं लगा उनको । नूरजहाँ ने अपना कैरियर बरकरार रखा तो था, लेकिन वो चमक उनको पाकिस्तान में नहीं ही मिली, जो हिन्दुस्तान में उनको मिली थी।

ताज़ा मिसाल हैं रीना रॉय, उन्होंने पकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर मोहसिन खान से शादी की, कुछ ही सालों बाद, उनका पाकिस्तान में जीना मुहाल हो गया, कहते हैं उनकी ज़िन्दगी नरक से भी बदतर कर दी गयी, आखिर उन्हें भाग कर अपने हिन्दुस्तान आना ही पड़ा, जबकि ,उनके मज़हब के लिहाज़ से पकिस्तान उनको माफ़िक आना चाहिए था ।

बटवारे के बाद मशहूर सिने तारिका, खुर्शीद बानो, जो के.एल. सहगल के ज़माने की थीं, ने पकिस्तान को अपना नया घर बनाने का फैसला किया, लिहाज़ा वो अपने पति के साथ करांची शिफ्ट हो गयीं । भारत में उनकी आखरी फिल्म थी 'पपीहा रे'। पाकिस्तान जाकर उन्होंने दो फिल्मों में काम किया, लेकिन दोनों ही फिल्में लचर निर्देशन और फूहड़ तकनीकी की वजह से डब्बा बंद हो गयीं और खुर्शीद बानो के कैरियर का भी पटाक्षेप हो गया।

अक्सर देखती हूँ, पाकिस्तान के बड़े-बड़े गायक, जब तक पाकिस्तान में रहते हैं छोटे-छोटे ही रहते हैं, भारत में कदम रखते ही, उन्हें प्रसिद्धी, पैसा, पोजीशन, पावर और पहचान मिलती है। और कई तो ऐसे हैं जो आकर, वापिस जाने का नाम ही नहीं लेते, जैसे 'अदनान सामी', 'राह्त फ़तेह अली खाँ '।  अदनान सामी या राह्त फ़तेह अली खाँ जब तक, पाकिस्तान में थे, गुमनाम ही थे, यहाँ तक कि फ़तेह अली खाँ को भी नाम तभी मयस्सर हुआ, जब उन्हें हिन्दुस्तान की अवाम का साथ मिला।

आज तक, कोई भी बता दे, एक हिन्दुस्तानी नाम, जो मुसलमान न हो, जिसे कहीं भी, किसी भी मुसलमान देश में  सम्मान मिला हो, किसी भी विषय में। आप ढूँढ ही नहीं पायेंगे। जबकि हिन्दुस्तान ने, कई गैर हिन्दुस्तानियों को, उनकी कला की वजह से, या उनके और दुसरे गुणों के लिए, न सिर्फ पहचान दिया है, बल्कि उन्हें , पैसा, पोजीशन, प्रसिद्धि और भी हर तरह की सौगात से नवाज़ा है। 

हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों का ही दिल इतना बड़ा है, जो ऐसा कर पाते हैं, उसके बावज़ूद, यहाँ के मुसलमान, जो मुसलमान बाद में हैं, पहले हिन्दुस्तानी हैं, यहाँ रह कर, यहीं से सबकुछ लेकर, पहली फुर्सत में हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों के अगेंस्ट हो जाते हैं। क्रिकेट की ही बात लीजिये। हिन्दुस्तान-पाकिस्तान में मैच हो रहा हो, तो पाकिस्तान के जीतने पर मुसलमान मोहल्ले में जश्न मनना, कोई बहुत नयी बात नहीं है। कोई पाकिस्तान में ऐसा जश्न मना कर दिखा दे, हिन्दुस्तान के जीतने पर तो हम मान जाएँ ।

कहते हैं मुसलमान का अर्थ होता है 'मुसल्लम हो ईमान जिसका', ये कैसा ईमान है जो अपनी सर-ज़मीन, उनके अपनों और उन्हें अपनाने वालों का ही नहीं है। जब आप अपने देश के प्रति ही ईमानदार नहीं हैं, देश के लोगों के प्रति इमानदार नहीं हैं, तो फिर ईमान की बात ही कहाँ रह जाती है। मैं यह नहीं कहती कि सारे मुसलमान ऐसे हैं, हज़ारों ऐसे होंगे जिन्हें, हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों से बे-पनाह मोहब्बत होगी। जो हिन्दुस्तान के लिए जान दे सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिनके दिल में हर वक्त धर्म का ज़हर उबाल खाता रहता है। मेरे ऐसा लिखने पर, बहुत सारे आ जायेंगे कहने आपने गलत लिखा है। लेकिन जो कहेगा वो मुझे यह भी तो दिखाए कि ऐसा नहीं है। तो मैं मान जाऊँगी अपनी गलती, और माफ़ी भी मांग लूँगी । लेकिन पहले मुझे ऐसा कोई नज़ारा दिखाया जाए।

सच कहूँ ये मुझे यह लिखते हुए अपार दुःख हो रहा है। लेकिन जो सच है, उसे कहना तो पड़ेगा ही। हिंदी ब्लॉग जगत में गिने चुने मुसलमान हैं, लेकिन उन गिने-चुने में ही, 80% से अधिक ऐसे हैं, जो सिर्फ दहशतगर्दी, गुंडागर्दी के पर्याय हैं। जो बचे हुए हैं, उनकी शराफत, भलमानसहत की कसमें खायी जा सकतीं हैं। लेकिन जो ग़लत हैं, वो निहायत ही ग़लत  हैं। उन्होंने बहुत सोची-समझी साज़िश के तहत, हिन्दू महिलाओं को, ग़लत तरीके से, दुनिया के सामने पेश किया है। ऐसा कैसे होता है कि, सिर्फ हिन्दू महिलाओं की तसवीरें, गलत लेबल के साथ, अभद्र सन्दर्भ से लिथड़ी हुई, उनके ब्लोग्स की शोभा बढ़ातीं हैं ??? कोई हिन्दू महिला अगर अपने दुधमुहे बच्चे को छोड़ कर, बिना तलाक़ लिए हुए किसी मुसलमान पुरुष की अंकशायनी बन जाए तो वो वीरांगना कहाती है ???

हमने बहुत, शराफ़त से आग्रह किया है कि, जो पोस्ट्स हिन्दू महिलाओं के सम्मान को हर्ट कर रहीं हैं, उन पोस्ट्स को हटाया जाए। उनकी तस्वीर हटाई जाए। लेकिन, सुन कर बात को अनसुनी किया जा रहा है। उनके मंसूबे यहाँ एक बार क़ामयाब हो गए हैं। बार-बार नहीं होंगे। हमें उनको बताना होगा कि हम अमन-पसंद हिन्दुस्तानी तो हैं, लेकिन उनकी चालबाजी हमारी समझ में अब आ गयी है। उनकी गलत-सलत दलीलें यहाँ काम नहीं आएँगी। वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए, या तो वो अपना रवैय्या बदलें,  और वो पोस्ट्स तुरंत हटायें या फिर वो तैयार हो जाएँ, क्योंकि अब हर तरह की कार्यवाही की जायेगी और हम क़ामयाब होंगे।

मैं गुज़ारिश करतीं हूँ, उन सभी बहनों से जिन्होंने, ऐसे ब्लोग्स पर अपनी मौजूदगी दर्ज की है, अपना नाम वापिस लें, क्योंकि जो ब्लॉग, आपकी सखियों को प्रतिष्ठा नहीं दे सकता, वो आज नहीं तो कल आपको भी इस योग्य नहीं समझेगा। मैं सिर्फ रिक्वेस्ट कर सकती हूँ। बाकी आप बहनों को जो उचित लगे वही कीजिये। लेकिन अगर आप अपना नाम उन विध्वंशी ब्लोग्स से वापिस लेंगी, तो यकीन कीजिये, एक दिन आप अपने इस फैसले से बहुत खुश होंगी। ये मेरा आपसे वादा भी है और सलाह भी।

आप सबसे निवेदन है कि भारी संख्या में जाकर, इस लिंक पर जाकर अपना विरोध दर्ज करवाएं..:

http://support.google.com/blogger/bin/request.py?hl=en&contact_type=main_tos

मैं विरोध का मसौदा भी यहाँ पर  दे रही हूँ..:

I am presenting  this complaint letter, with reference to a situation, where a community blog has been using Hindu women's pictures, inappropriately, writing about them maliciously and using labels for search
in undignified manner.
I hereby submit the links of the posts that have been submitted for universal audience to view.

Following are the links :
http://blogkikhabren.blogspot.ca/2012/04/vandana-gupta.html
http://blogkikhabren.blogspot.ca/2012/07/blog-post.html
http://blogkikhabren.blogspot.ca/2011/12/dirty-sex.html

I have requested the blog owner many times, to remove these uploaded posts, but so far have received lame excuses. These writing have been hurting these women's dignity severely and they are going through,
mental agony continuously. These writings are also against our religious belief, and tarnishing our sentiments.

Therefore, I urge you, to please look into this matter urgently and  hope an strict action from your honorable office, to end this notorious act, that is being played for very long time.

Thanks,

कैसे करें कम्प्लेन ..
लिंक पर क्लीक करें 
http://support.google.com/blogger/bin/request.py?hl=en&contact_type=main_tos

Defamation/Libel/Slander को सेलेक्ट करें
और Continue दबाएँ
दुसरे पेज में  Blogger/Blogspot सेलेक्ट करें
scroll डाउन करें और  I have found content that may be defamation/libel सेलेक्ट करें
नीचे आपको निम्नलिखित नज़र आएगा
*If you are a resident of Argentina, Australia, Austria, Belgium, Brazil, Canada, Czech Republic, Denmark, Finland, France, Germany, Greece, Hong Kong, Hungary, India, Ireland, Israel, Italy, Japan, Mexico, Netherlands, New Zealand, Norway, Portugal, Romania, Singapore, Slovakia, South Korea, Spain, Sweden, Switzerland, Taiwan or United Kingdom, please click here.

आप here.पर क्लिक करें
अगले पन्ने पर Country of residence * दिखेगा आप India चुने
दूसरा पन्ना खुल जाएगा , अब भरें
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Company name खाली रहने दीजिये 
Contact email address * भर दीजिये
Allegedly Infringing URLs * पहला URL  जो मैंने लेटर में दिया है, कॉपी पेस्ट करें
Add an additional field एक और बॉक्स आ जाएगा, उसमें दूसरा URL कॉपी पेस्ट करें , और तीसरे के लिए एकबार और Add an additional field क्लीक करे और तीसरा URL भर दें 
Please explain in detail why you believe the content on the above URLs is unlawful, citing specific provisions of law wherever possible. * इस बक्से में पूरा कंप्लेंट लेटर कॉपी-पेस्ट कर दें

अगले खाली बक्से जिसके ऊपर लिखा है In order to ensure specificity, please quote the exact text from each URL above that you believe infringes on your rights. If the allegedly infringing content is a picture or video, please provide a detailed description of the picture/video in question so that we may locate it on the URL in question. *
यहाँ आपको तीनों पोस्ट्स को कॉपी करनी होगी।

Your digital signature is as legally binding as a physical signature. Please note that your signature must exactly match the First and Last names that you specified earlier in this webform.
खाली बक्से में अपना पूरा नाम डालें 
 
Submit पर क्लिक करें।..
हो गया जी काम 

    35 comments:

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      1. अच्छा लगा शैलेन्द्र तुम्हारा आना..
        ख़ुश रहो !

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      1. बहुत ज़रूरी था ये..
        आशीर्वाद !

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    3. एक बहुत जरूरी पोस्ट!
      आपका कहना बिल्कुल सही है.ब्लॉगिंग में भी ये चीज देखी हैं कि हिंदू ब्लॉगर्स धर्म को लेकर चाहे जितने झगडे करें लेकिन कम से कम मुस्लिम महिलाओं को बीच में नहीं लाते और जितनी भी मुस्लिम महिला ब्लॉगर्स हैं उनके साथ तमीज से ही पेश आते हैं.और यदि वो कुछ गलत कहेंगे भी तो उसका विरोध भी सबसे पहले हम ही करेंगे.जबकि मुस्लिम पुरुष ब्लॉगर्स द्वारा हिंदू महिला ब्लॉगरों को सीधे सीधे धमकी तक देने वाली दो तीन घटनाएँ तो मेरे सामने हो चुकी हैं.मगर फिर भी कोई असर नहीं.

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      1. आपका ऑब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है राजन और एकदम सटीक|

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      2. हाँ मुझे भी याद है...
        मैंने शायद एक पोस्ट भी लिखी थी, उन महिला के सपोर्ट में..

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    4. http://drayazahmad.blogspot.in/2012/07/blog-post_09.html
      this person also needs the same treatment lets all start it

      REMOVE THEM FROM FOLLOWING YOUR BLOG
      BLOCK THEM ON GOOGLE PLUS , FACEBOOK
      REPORT THEIR PROFILE

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      1. Jitne bhi the sabko BLOCK kar diya..

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      2. Jitne bhi the sabki REPORT bhi kar di..

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    5. अदा जी ,
      आपने अपनी पोस्ट में आज वो बातें कह दी जिसकी आशंका मैं बहुत पहले एक मित्र महिला ब्लॉगर द्वारा ये कहने पर कि क्या उन्हें उन तमाम एसोसिएशननुमा ब्लॉग्स पर फ़लाना ढिमकाना पद ग्रहण करना चाहिए , मेरा जवाब था कि यदि मैं उनकी जगह होता तो कहता नहीं । कारण स्पष्ट था । यहां हमारे लिखे पढे और टीपे से ही हमारी मानसिकता का पता चलता है हमारी नीयत और हमारी कोशिश उजागर होती है । और सबसे अहम बात है नीयत । एक बहुत ही जरूरी और सार्थक पहल करती पोस्ट । ऐसी समस्याओं का हल बताती भी । मुझे लगता है कि अब बहुत जल्दी कुछ हिंदी ब्लॉगर्स भी कानूनी दखल और दंड प्रावधानों को आमंत्रित करने जा रहे हैं । बहुत बहुत शुक्रिया और आभार बहुतों की सोच को शब्द देने और उन्हें सही रास्ता दिखाने के लिए ।

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      1. अजय जी,
        ईश्वर हमें कई बार होनी से आगाह करता है, बस हम उसपर ध्यान नहीं देते हैं...
        ऐसे कई ईमेल और कई प्रस्तावना मुझे भी प्राप्त हुए थे, लेकिन कहीं कुछ था जो ठीक नहीं लगा था..
        आपका समर्थन प्राप्त हुआ...धन्यवाद.

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    6. बेहद ज़रूरी, उचित और सटीक पोस्ट॥

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      1. पद्म सिंह जी,
        मुझे भी लगा, अब कुछ कहना ज़रूरी है..इसलिए लिख दिया..
        आपका आभार...

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    7. Replies
      1. ललित जी,
        धन्यवाद.

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    8. तिलक लगायेंगे और रोज नियम से पूजा करेंगे, सामने वाला अपने धर्म के आधार पर इन्हें गरियाता रहेगा और इससे भी बढ़कर करेंगे, लेकिन लोग हैं कि इन की आन्तरिक भावनाओं को नहीं समझते। अपने लिये सर्वधर्म सम्भाव का समर्थक, मानवता प्रेमी और धर्मनिरपेक्ष बताने के अन्ध फैशन में कुछ देख ही नहीं पाते। अपवादों को छोड़ दें तो अधिकांश मुस्लिम ब्लागर जमाल को ही समर्थन देंते दिखाई पड़ते हैं। हिन्दू अपनी खोखली मान्यताओं को गले से लगाये घूमते रहते हैं और सामने वाला खुश होता है कि कैसे खुद ही के पैरों पर आरा मशीन चला रहे हैं। राम-रहीम हिन्दू ही चिल्लाते हैं, जब मुस्लिम वेद-कुरान जपता है तो उसका मन्तव्य होता है कि वेदों को नीचा दिखाये और अन्तत: लोगों को इस्लाम ग्रहण करने के लिये तमाम तरह के कुतर्क दे। दुनिया में कितने धर्म-निरपेक्ष देश हैं? ईसाई मुल्कों में पूरी छूट है, वे कहीं अच्छे धर्म-निरपेक्ष हैं बनिस्बत हमारे। अब जितने इस्लामी मुल्क हैं, उनमें कितनी धर्मनिरपेक्षता है, कितनी सहिष्णुता है? लेकिन हिन्दू की आंखें बन्द हैं, न खुलती हैं, न खुलेंगी।

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      1. सही कहा है आपने सिर्फ अपवाद वाली बात को छोडकर| कहाँ अपवाद दिखे आपको? कोई अपवाद नहीं, जो दिखते हैं वो भी अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें डिफेंड ही करते दिखेंगे|ऐसा नहीं कि अच्छे लोग हैं नहीं, लेकिन उन बेचारों के पास इतनी लिबर्टी नहीं है कि गलत को गलत कह सकें इसलिए चुप्पी साध लेते हैं|

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      2. घोष जी,
        आपका प्रत्येक वाक्य मेरे मन की बात कह रहा है...
        हम हिन्दू इतने काहिल क्यूँ हैं ?
        अगर समय मिले तो आप मेरा एक आलेख पढ़िए, लिंक मैं नीचे दे दूँगी...लोगों को बुरा लगा है इसे पढ़ कर, लेकिन सच्चाई यही है...हम बस शुतुरमुर्ग की तरह ज़मीन में सिर घुसा कर ख़ुद को तसल्ली देते हैं कि, सबकुछ ठीक ठाक है...अपनी दुर्बलता को ढँक लेते हैं, हम पंथ-निरपेक्षता के नाम पर..(धर्म-निरपेक्षता तो धर्म से विमुख होने को कहेंगे..जो धर्म-निरपेक्ष होगा वो मनुष्य ही कहाँ होगा भला...ऐसा कहीं पढ़ा था )
        आपका आना सुखद लगा..
        आभार
        लिंक ये रहा :
        http://swapnamanjusha.blogspot.ca/2012/04/blog-post_1851.html

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    9. ada ji - wonderful post, and thanks for the comment option.

      i wish people would awaken. i am surprised that there are still ladies on the said group's GROUP blogs in various high capacities. they are bound to be aware of what is going on, how can they still remain part of the group surprises me.

      sorry - don't have hindi typing facility.

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      1. Thanks to you Shilpa ji,
        Well, holding HIGHEST CAPACITIES in the LOWEST blogs will never give anybody deserving HEIGHT.

        We are waiting for our lost sheeps to come home.

        No PROBLEMO, angreji hamein bas itni aati hai ki, I can leave angrej behind :)

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    10. एक ऐसा सच जो वीरप्रसूता भारतभूमि की सन्नारी के श्रीमुख से प्रकट होता है।
      साधुवाद!!

      धीर गम्भीर प्रेक्षण और न्यायसंगत विवेचन!!

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      1. सुज्ञ जी,
        हृदय कि बात, बहुत सरल भाषा में कह दी है..
        आपकी टिप्पणी ने इसका मोल बढ़ा दिया..
        आभारी हूँ

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    11. Replies
      1. विजय जी,
        धन्यवाद.

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    12. Replies
      1. करना ही था..
        और उपाय का था ?
        ख़ुश रहो..!

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    13. दिल के बहलाने को आप इसे हम हिंदुस्तानियों का बड़ा दिल कह सकती हैं, हमारी नजर में ये शुतुरमुर्ग वाला व्यवहार है, नादानी है| किसी मजार में जाकर देख लीजिए, ज्यादा भीड़ हिंदुओं की मिलेगी|सद्भावना, धर्मनिरपेक्षता के सारे ठेके जैसे हमें ही मिले हैं|

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      1. आप सही कह रहे हैं,
        भारत में इस तरह के शुतुरमुर्गों कि बहुतायत है, और निकट भविष्य में इनके एक्सटीक्त होने के भी चान्स नहीं दिखते...

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    14. मैं पहले यह कर आया था...

      आपकी पोस्‍ट से पहले यह चर्चा शुरू हो चुकी थी, उसी दौरान फ्लैग कर दिया था। फिर रिपोर्ट भी कर दिया।
      एक साथ बड़ी संख्‍या में रिपोर्ट होगा तो ब्‍लॉग उड़ा दिया जाएगा।

      तुलनात्‍मक पोस्‍ट कुछ खल रही है। प्रतिरोध का रंग बदल सकता है।

      खैर, अब तक तो सही चल रहा है... :)

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    15. सिद्धार्थ जी,

      हम तो वैसे भी हिंदी फिल्म की पुलिस की तरह लास्ट में एंट्री मारते हैं :)

      आपकी बात सही है, कहीं कीये-कराये पर पानी न फिर जाए इसलिए, हाथ पाँव समेट कर बैठ गए हम..
      आप आए बहुत ख़ुशी हुई..

      आभार

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    16. भारतीय समाज का दिल बड़ा है ,सबके लिए जगह है.....मगर इतिहास गवाह है की इस वजह से हमेशा धोखा ही खाया है.

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