Friday, July 20, 2012

बस गंगा जल हो...

तेरा आना
पागल दिल हो ,
झलक दिखाना
ख़ुशी का पल हो ,
छुप-छुप रहना
दर्द-ए-दिल हो ,
हाथ ना आना
बीता कल हो ,  
नैन मिलाना
एक ग़ज़ल हो ,
नज़र में मेरी
ताजमहल हो ,
उम्र का हासिल
साथ का पल हो,
पाक़ हो जैसे
तुलसी दल हो ,
अंत समय तुम
बस गंगा जल हो ,

ये समा, समा है ये प्यार का....आवाज़ 'अदा' की 

13 comments:

  1. पाक़ हो जैसे
    तुलसी दल हो ,
    अंत समय तुम
    बस गंगा जल हो ,

    मन पवित्र ,निर्मल ,सरल , सहज बच्चों जैसा हो ,लेकिन वह इस संसार में बहुत कम दिखलाई पड़ता है .शायद मौसम बदलता जा रहा है ऐसे समय में आपका गाना ये शमा मन को भा गया .
    आपने बहुत ही अच्छे तरीके से निभाया है .
    प्रणाम सहित शुभ प्रभात

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  2. तन सावनरत, मन अमृत हो..
    बहुत सुन्दर..

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  3. पाक़ हो जैसे
    तुलसी दल हो ,
    अंत समय तुम
    बस गंगा जल हो...
    बहुत बढ़िया !

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  4. बहुत ही बढ़िया दीदी!
    आपकी आवाज़ का तो कोई जवाब ही नहीं।


    सादर

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  5. अभी हरिद्वार की यात्रा से ही लौट रहे है, गंगा जल पर कोई टिपण्णी न करे तो ही अच्छा, रचा बेशक हमेशा की तरह स्वच्छ है !

    लिखते रहिये :)

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  6. तुमसे बतियाना
    प्रॉब्लम हल हो!!!

    :-)

    बहुत सुन्दर...
    हम आपकी हर अदा पर फ़िदा...

    अनु

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  7. और हाँ समां भी अच्छा बाँधा.....
    <3

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  8. lovely singing ada ji.

    by the way, the last time i wanted to say this, your comment box was missing, so i had commented at my post where u had commented (panchatatva - akaash) hoping that some day you would read it. thanks ada ji.

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  9. क्या कहने, उम्दा!

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  10. जैसा रमाकांत सिंह साहब कह रहे हैं, 'मन पवित्र ,निर्मल ,सरल , सहज बच्चों जैसा हो ,लेकिन वह इस संसार में बहुत कम दिखलाई पड़ता है' हम भी सहमत हैं|
    गाने और आवाज के बारे में वही ख्याल, 'बेमिसाल' सुनते रहो तो लगता है कि न जागे हुए हैं न सोये हुए हैं:)

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  11. ये वाला और इसके बाद वाली पोस्ट में आपकी आवाज में गाने सुनकर बहुत अच्छा लगा।

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  12. Aaj badee fursatse aapke blogpe aayee aur padhtee rahee....suntee rahee...

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