Thursday, July 19, 2012

क्यों झाँकना नज़र में ये, नक़ाब जैसा है...


मिला जब वो प्यार से, तो गुलाब जैसा है
आँखों में जब उतर गया, शराब जैसा है

खामोशियाँ उसकी मगर, हसीन लग गईं 
कहने पे जब वो आया तो, अज़ाब जैसा है

करके नज़ारा चाँद का, वो ख़ुश बहुत हुआ 
ख़बर उसे कहाँ वो, आफ़ताब जैसा है

करते रहो तुम बस्तियाँ, आबाद हर जगह  
इन्सां यहाँ इक छोटा सा, हबाब जैसा है

कुछ दोस्ती, कुछ प्यार, कुछ वफ़ा छुपा लिया
क्यों झाँकना नज़र में ये, नक़ाब जैसा है

अज़ाब=ख़ुदा का क़हर या नाराज़गी
आफ़ताब = सूरज
हबाब=बुलबुला 


जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम ....आवाज़ 'अदा' की ...


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23 comments:

  1. बड़ी गजब की शायरी है भाई!

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    1. आप आए, बहार आई :)

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  2. हुए बेवफा तुम,यूँ दूर हमसे हो गए
    तुमको पाना अब सनम,ख्वाब जैसा है
    :-)

    शायरा को एक शेर भेंट करती हूँ....

    अनु

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    1. ई तो हमरे शेरों पर
      बबरशेर का बाप जैसा है :)
      थान्कू !

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  3. मंजिल पास होती है तो हौसला डगमगाता है ,
    तेरे जैसे बन्दे को खुदा खुद आजमाता है ..

    आप जितना सुन्दर गाती हैं ,उतना ही सुन्दर भावों को संप्रेषित करती हैं वह भी बड़ी बेबबकी से .कोई बड़ाई नहीं .हरियाली की शुभकामनाओं सहित

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    1. ख़ुदा की आजमाईश से, हमें क्यूँ कर शिकायत हो
      आज़माता भी वही हमको, वो रास्ता भी बताता है

      आपकी बातों ने हौसला और बढ़ाया है..
      तहे दिल से शुक्रिया !

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  4. अहा, क्या बात है, बस पढ़ते गये....

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  5. अहा, क्या बात है, बस पढ़ते गये....

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    1. सिर्फ़ पढ़े नहीं...कोई कमी है, तो वो भी बताएँ...
      वरना हम सुधरेंगे कैसे ?

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  6. करते रहो तुम बस्तियाँ, आबाद हर जगह
    इन्सां यहाँ इक छोटा सा, हबाब जैसा है

    बेहतरीन


    सादर

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    1. अनुज,
      पसंद आया तुम्हें, जानकार अच्छा लगा |

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  7. कुछ दोस्ती, कुछ प्यार, कुछ वफ़ा छुपा लिया
    क्यों झाँकना नज़र में ये, नक़ाब जैसा है

    क्या बात..बड़ी जानदार शायरी है..

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    1. तुझे जानदार लगी तो डेफिनेटली जानदार है..:)

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  8. अच्छा लगा पढ़ना आपको |

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    1. शुक्रिया अमित जी ..!

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  9. Bahot hi betreen gazal! padh kar lutf aa gaya! :)

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  10. गीत गजब है..
    sunta हूँ तू जाने कहाँ खो जाता हूँ..

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    1. मनु जी,
      ये गीत ही इतना मधुर है..हर कोई खो ही जाता है..
      आपका आभार

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  11. ये गीत मेरे पंपसंद गीतों में से एक है, आपकी आवाज में इसे सुनना एक अलग ही अहसास देता है| एक अलग ही दुनिया में पहुँच जाते हैं| एक आपकी ही गज़ल आपने गई थी, कुछ 'सावन की केहुनी' टाईप के बिम्ब इस्तेमाल किये थे जिसमें, बिना संगीत की वो गज़ल भी सुनने में बहुत अच्छी लगती थी और इस पोस्ट पर वो भी खूब जमती| मेरे पुराने सिस्टम में तो डाऊनलोड कर रखी थी मैंने, लेकिन अब उड़ गई :(

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    1. न जाने कहाँ-कहाँ से आ जाते हैं :)(film sholey-soorma bhopali :))
      इतनी मेहनत से हम गाते हैं और लोग उड़ा देते हैं, भला कहिये तो !
      कोई बात नहीं हम हीं कौन से कम हैं...फिर से डाल देंगे, उसमें का है, अपने घर की खेती है, कौन हमको नौशाद जी से परमिशन लेना है !!
      हाँ नहीं तो !

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