Tuesday, January 12, 2010

चुपके से सो जाते हैं





देखा है तुम्हें आज !!

कई सदियों बाद
उम्र की  परछाईयां
नज़र आती थीं तुम पर
सवालों के कारवां
उफन पड़े थे
निगाहों से
लेकिन !
फेर ली नज़रें
तुमने सबसे बचा कर
पूछा तो नहीं
मैं फिर भी बताती हूँ
किस्सा-ए-दिल
अपना हाल सुनाती हूँ
जिस दिन तुमने
निगाहें मोड़ी थीं
उसी दिन,
वफ़ा की मौत हो गई
सब्र चुपके से खिसक गई
और
उम्मीद भी फ़ौत हो गई
हम तेरी जफ़ा से
कफ़न उतार अपनी वफ़ा
को पहना आये थे
बाद में,
तेरी यादों के साथ
उसे दफ़ना आये थे
तब से 
हर रोज़ हम
उस मज़ार पे जाते हैं
जी भर के तुम्हें
खरी-खोटी सुनाते हैं
उसपर भी अगर
जी नहीं भरता
तो 
अश्कों के दीप जलाते हैं
और एक बार फिर
तेरी जफ़ा ओढ़ कर
क़ब्र-ए-मोहब्बत में
चुपके से सो जाते हैं...

31 comments:

  1. तो
    अश्कों के दीप जलाते हैं
    और एक बार फिर
    तेरी जफ़ा ओढ़ कर
    क़ब्र-ए-मोहब्बत में
    चुपके से सो जाते हैं...


    -क्या अंदाज है जी!! ये भी सही!! बहुत उम्दा!!

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  2. लकीरें जो नजर आती है चेहरे पर ...
    उम्र का निशाँ नहीं ..
    वो बहते आंसूं हैं
    जो सुख गए बिना पोंछे ही ...
    एक क्षणिका लिखी थी ...सोच रही थी ब्लॉग पर लिखने के लिए मगर तेरी ये ग़ज़ल पढने के बाद यहाँ के अलावा और कहीं लिखने का मन ही नहीं ..

    मजार ...वह बेकस दिल ...जहाँ वफ़ा अक्सर मजबूर होती है जफ़ाओं की चादर ओढ़ कर सोने को ....!!

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  3. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति!

    हमने जफ़ा न सीखी उनको वफ़ा न आई ...

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  4. This is indeed a good poem from you, as good as your velvety voice.Great.

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  5. जिस दिन तुमने

    निगाहें मोड़ी थीं

    उसी दिन,

    वफ़ा की मौत हो गई

    सब्र चुपके से खिसक गई

    और

    उम्मीद भी फ़ौत हो गई

    बहुत ही सुन्दर !

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  6. बहुत ही बढिया !!

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  7. हम तेरी जफ़ा से
    कफ़न उतार अपनी वफ़ा
    को पहना आये थे
    बाद में,
    तेरी यादों के साथ
    उसे दफ़ना आये थे

    दिल के एहसासों को खोबसूरत अलफ़ाज़ दिए हैं.....बहुत खूब

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  8. सुंदर ... अति सुंदर भाव-अभिव्यक्ति ।

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  9. you made my day.
    shayd purani post ki tippni mil gayi hogi.ab ham bhi
    चुपके से सो जाते हैं...

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  10. अश्कों के दीप जलाते हैं
    और एक बार फिर
    तेरी जफ़ा ओढ़ कर
    क़ब्र-ए-मोहब्बत में
    चुपके से सो जाते हैं...

    वाह सुन्दर भावाभिव्यक्ति !!

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  11. अश्कों के दीप जलाते हैं
    और एक बार फिर
    तेरी जफ़ा ओढ़ कर
    क़ब्र-ए-मोहब्बत में
    चुपके से सो जाते हैं...

    वाह सुन्दर भावाभिव्यक्ति !!

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  12. uff ! mohabbat ke dard ko kya khoob bayan kiya hai..........shabdheen kar diya.

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  13. अश्कों के दीप जलाते हैं

    और एक बार फिर

    तेरी जफ़ा ओढ़ कर

    क़ब्र-ए-मोहब्बत में

    चुपके से सो जाते हैं...

    ये मारा पापड़ वाले को .....गज़ब की नज़्म कही है अदा जी ! माशाल्लाह बहुत खुबसूरत.

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  14. हम तेरी जफ़ा से

    कफ़न उतार अपनी वफ़ा

    को पहना आये थे

    बाद में,

    तेरी यादों के साथ

    उसे दफ़ना आये थे

    यह कविता आपके विशिष्ट कवि-व्यक्तित्व का गहरा अहसास कराती है।

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  15. जिस दिन तुमने
    निगाहें मोड़ी थीं
    उसी दिन,
    वफ़ा की मौत हो गई


    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  16. "अश्कों के दीप जलाते हैं
    और एक बार फिर
    तेरी जफ़ा ओढ़ कर
    क़ब्र-ए-मोहब्बत में
    चुपके से सो जाते हैं..."

    क्या कहने ! बेहतरीन पंक्तियाँ । आभार ।

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  17. पसंद आई आपकी यह रचना ..शुक्रिया

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  18. रचना ....

    झकजोरती है
    लफ़्ज़ों के तेवर
    इंतक़ाम की हद्द तक ले जाते हैं
    "कभी तन्हाईयों में यूं ...."

    ........... !?!

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  19. चुपके से सोते सोते इत्ता कुछ जफ़ा भी, वफ़ा भी ,सब कुछ तो कह दिया ,और क्या खूब कह डाला ,
    अजय कुमार झा

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  20. Oh my my!!
    What a good work done! :)
    Really it is amazingly written.
    Pain and love seem to be synonyms for true lover...
    Regards,
    Dimple

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  21. जिस दिन तुमने
    निगाहें मोड़ी थीं
    उसी दिन,
    वफ़ा की मौत हो गई
    वाह वाह क्या बात है अदा मैडम मूड में हैं आप तो......पर अश्कों के पहले वो खरी खोटी वाली बात मुझे बहुत पसंद आई....(सॉरी इस बार जरा देर हो गयी आने में...पर आती जरूर..इतना विश्वास तो तुम्हे होना चाहिए)

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  22. और एक बार फिर
    तेरी जफ़ा ओढ़ कर
    क़ब्र-ए-मोहब्बत में
    चुपके से सो जाते हैं..

    वाह! वाह! .... बहुत खूब.... ऐसे ही नहीं मैं कहता हूँ कि मुझे आपसे तो प्यार है ही.... अब तो आपकी लेखनी से भी प्यार हो गया है..... अब तो Valentine's Day का इंतज़ार कर रहा हूँ....

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  23. hnm

    बहुत खूब अदा जी..

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  24. दिल के एहसासों को खोबसूरत अलफ़ाज़ दिए हैं.....बहुत खूब

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  25. ada di bahut se vichar uthal puthal kar rahe hai aapki is lajawaab rachna ko padh kar. nahi janti kisi ki aap-biti he ya kalam ka ek aur rang.lekin dil me kahin bheetar tak ye dard mehsoos ho gaya...bahut se ehsaaso ka naya sa prayog laga..jaise..
    उम्मीद भी फ़ौत हो गई
    हम तेरी जफ़ा से
    कफ़न उतार अपनी वफ़ा
    को पहना आये थे ...ye lines bahut acchhi lagi.
    अश्कों के दीप जलाते हैं
    और एक बार फिर
    तेरी जफ़ा ओढ़ कर
    क़ब्र-ए-मोहब्बत में
    चुपके से सो जाते हैं...
    lekin di kya so paate hai???

    bt at last bahut bahut khoobsurat rachna...dil se daad kabool kijiye..ise padh kar mera b dil kar raha hai kuchh aisa kamaal to nahi keh sakti bt aisa kuchh me b likh dalu...(ha.ha.ha.)duao k sath ijajet.

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  26. ज़िंदा रहने के लिए तेरी कसम...
    इक मुलाकात जरूरी है सनम..

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  27. @ Anonymous....

    बेटा ...तुझे बहुत मुलाक़ात करने का शौक़ है... आजा मेरे पास तेरी मुलाक़ात मैं करवाता हूँ.... आज मुन्ना.... लल्ला मेरे.... आ जा.. तेरी मुलाक़ात तो मैं करवाता हूँ...

    @ अदा जी...

    आपको भी यही नमूना मिला था पब्लिश करने के लिए...

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  28. हम तेरी जफ़ा से
    कफ़न उतार अपनी वफ़ा
    को पहना आये थे
    बाद में,
    तेरी यादों के साथ
    उसे दफ़ना आये थे

    एक बार फिर
    तेरी जफ़ा ओढ़ कर
    क़ब्र-ए-मोहब्बत में
    चुपके से सो जाते हैं...

    शानदार...

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  29. मेड्मजी, मेने बिना अनुमुति माँगे आप का लेख अपने blogg पर पोस्ट किया , मेड्मजी हमें माफ करदेना।
    आप की Comment से हमे सीख मिली औऱ मेने खुद ने भाई का पत्र बहन को…,सुन लो मेरी दर्द कहानी…को चाप डाला।
    हम से कोइ गलती लेख मे हुई हो तो बता देना क्यो की मेने पहली बार लेख लिखा है।

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  30. तेरी यादों के साथ

    उसे दफ़ना आये थे

    यह कविता आपके विशिष्ट कवि-व्यक्तित्व का गहरा अहसास कराती है।

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