कुछ दिनों पहले किसी से मेरी बात हो रही थी आज के रिमिक्स गानों के विषय में ...मेरी परिचिता को बहुत बुरा लगता है कि आज कल पुराने गानों को नया रूप देकर गाया जा रहा है...उनका कहना था , इस तरह से इन गानों की गंभीरता और गरिमा को ठेस लगती है...यही नहीं यह चोरी भी है...परन्तु मैं उनकी बात से पूरी तरह सहमत नहीं हूँ ...
हमें ख़ुश होना चाहिए कि पुराने गानों को नया रूप देकर आज की पीढ़ी कम से कम गा तो रही है..वर्ना इन गानों को लुप्त होने में कोई समय नहीं लगता ...इन सुरीले गानों को जिंदा रखने का इससे बेहतर और कोई विकल्प नहीं हो सकता है...इन गानों को नयी तकनिकी से सजा कर नए लोगों के लिए आकर्षक बना कर एक तरह से देखा जाए तो, हमारी धरोहर को बचाया जा रहा है...इसलिए इसमें मुझे कोई बुराई नज़र नहीं आती है...हम सिर्फ़ अपनी पीढ़ी तक की बात न सोचें..आनेवाली पीढ़ी भी इन गानों को बचाने में प्रयत्नशील है...जितने भी संगीत की प्रतियोगिता होती है, आज के बच्चे भी इन्हीं गानों को गाते हैं...जिन्हें सुनकर मन आह्लादित होता है...
आप के क्या विचार हैं इस बारे में ज़रा बताइयेगा..
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रही बात चोरी की तो, बड़े कलाकारों की कृतियों की कभी भी चोरी नहीं होती...ये कृतियाँ अजेय हैं ...जिस रूप में भी होंगी रचेता की पहचान बनी रहेगी....
हिंदी साहित्य में भी बहुत दिग्गज कवि हुए हैं, उनकी कवितायें हमने, आपने, सबने पढ़ी हैं..लेकिन समय के साथ हम सभी उनको भूल रहे हैं...एक समय ऐसा भी आएगा जब ये कवितायें आम जनों के जीवन से विलुप्त हो जायेंगी, यदा कदा ही कभी उनका ज़िक्र होगा...और यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होगा...क्यों नहीं हम उन कवियों की कृतियों से प्रेरणा लेकर कुछ नया करने की कोशिश करें, एक नया दृष्टिकोण देने की कोशिश करें...और फिर इसमें बुराई भी क्या है....जब उन्होंने इन कविताओं को लिखा था तो उनका माहौल अलग था, वो समय अलग था, वो मनस्थिति अलग थी, वो परिवेश अलग था, अब समय बदल गया है, लोग बदल गए हैं, सोच बदल गई है....बेशक विषय वही हैं...अगर इन कविताओं को एक नया प्रारूप दिया जाए तो हर्ज क्या है...इन रचनाओं को सरलता प्रदान की जाए उससे लोगों का शब्द ज्ञान बढेगा और तब शायद ये आज की नयी पीढ़ी और जन मानस तक अपनी पहुँच बना सकेंगे...और इस कोशिश में लोग नया सीख भी सकेँगे......आप क्या कहते हैं..?















