
पिछले ६ महीने से ब्लॉग्गिंग कि दुनिया में रह रहे हैं हम.....और इस ब्लागगिंग दुनिया में जीवन के हर रस का आनंद ले चुके...... इन ६ महीनों में....मान, सम्मान, प्रेम, अपमान, उठान, पटकान सभी कुछ वन स्टॉप शौपिंग की तरह है.....कभी किसी कहानीकार के शब्द तिलस्म से बाहर निकलना ही मुश्किल हो जाता तो कभी किसी आलेख की दुर्गम सच्चाई तक पहुंचना कठिन....कहीं दिल को छूती हुई ग़ज़ल की रूमानियत में मन डूब जाता है.....तो कहीं कटाक्ष के इतने वाण देखने तो मिलतें हैं कि बस मन डूब ही जाता है.....मतलब की हर तरह के पाठक के लिए हर तरह की सामग्री .....
इक कहावत हमेशा सुनते रहे हैं.....शादी वो लड्डू है जिसे , जो खाए वो पछतावे और जो न खावे वो भी पछतावे.....अब हम कहते हैं....ब्लॉग्गिंग वो लड्डू है जो करे वो पछतावे और जो न करे वो तो जीने के लायक ही नहीं है....
और बात जब हिंदी ब्लॉग्गिंग की हो फिर तो इसमें....बॉलीवुड का हर मसाला है......सस्पेंस, थ्रिलर, रोमांस, मार-कुटाई, सब कुछ तो है यहाँ.......और सबसे बड़ी बात है पोलिटिक्स भी है......आज तक हम समझ नहीं पाए थे कि .....बिग बी खेमा ....शाहरूख खेमा की तरह यहाँ भी कई खेमे बने हैं.....हम तो जी ठहरे निपट देहाती.....इ सब समझने के लिए भी तो दीमाग चाहिए.....और हमारे पास है नहीं.....जो दिल में आता है लिखते हैं....लोग आते हैं पढ़ते हैं ......तो देख देख कर खुश हो लेते हैं......और हम का जाने कि यहाँ भी कोई खेमा है......और खेमों का पता चलता है चिट्ठों कि चर्चा से........और हम भी अब इक खेमा में ज़बरदस्ती ठूंसे जा चुके हैं.....आपको खेमा में डालिए दिया जाएगा आप खेमे में विश्वास कीजिये कि मत कीजिये.......अरे भाई कुछ लोग हमको प्रेम से पढ़ते हैं....तो हम भी उनको प्रेम से पढने लगे .....
अरे हमको कहाँ पता चला कि कब हम उस खेमा में चले गए या फिर पहुंचा दिए गए.....न तो खेमा में रखने वाले हमसे कुछ पूछे .......न ही उहाँ पहुंचाने वाले .....उ तो अचानक ,जब देखने लगे कि ...अरे तोरी हमरे बारे में ऐसा काहे लिखा गया भाई...हम तो कभी इनसे इक चम्मच नून भी नहीं लिए हैं....न बात न चीत....न सलाम न दुआ ...बस खामे-ख्वाह ......हमरे मुखारविंद से काहे की ऐसी ज़बरदस्त नाराजगी ???? तब पता चला ...ओह्ह हम तो विरोधी पार्टी में हैं ...और हमको पता भी नहीं है.....तभे तो उ नाराजगी से पढतें हैं......हद्द है........... न उधो का लेना न माधो का देना ...तू कौन मैं ख्वाम ख्वाह ....अरे भाई.....रचना कि बात कीजिये...उ कैसी लगी ...आदमी मेहनत से लिखा है.....टाइम लगाया है...दीमाग लगाया है......तो काहे कि उ तथाकथित दूसरा पार्टी का है .......इसलिए उ अच्छा लिख ही नहीं सकता है......इसलिए या तो उ चर्चा में शामिल होने का हक़दार ही नहीं है...और अगर बहुत दिलदारी देखाते हुए ...गाहे-बगाहे सम्मिलित कर भी लिया है तो व्यंग-वाणों से सुसज्जित होकर ही शामिल हो सकता है.......अरे महराज बिना लॉबिंग का कोई चर्चा हो नहीं सकता है का...?????
अगर आपको यह पता लगाना है कि कौन व्यक्ति किस खेमे का है तो चिट्ठों की चर्चा वाली पोस्ट पढ़िए ....आपको साफ़-साफ़ पता चल जाएगा ...फलां ग्रुप में कौन-कौन है....साफ़-साफ़ लॉबिंग ही झलकती है....स्वस्थ चर्चा देखने को कहाँ मिलती है....सब अपनी डफली अपना राग सुना रहे हैं.....हम जानते हैं आज के बाद कोई हमरी चिटठा नहीं डालेगा अपने चर्चा में..... तो मत डाले.....हमको कोई फर्क नहीं पड़ता है.....लेकिन जो चिट्टा सचमुच चर्चा में आने चाहिए क्या वो सचमुच में आते हैं....नहीं न ????? तो हम भी उनके साथ ...उनके जैसे ही रह लेंगे.....लेकिन कम से कम फालतू कि पोलिटिक्स से तो बचेंगे....