ये ज़मीं खून से नहाई है
देख अब आसमाँ की बारी है
लाशों के ढेर से मैं लिपटी रही
उसमें क़िस्मत मेरी बेचारी है
नींद आ जायेगी सुकूँ से मुझे
दिल में उसने छुरी उतारी है
है मकानों का क्या वो बनते रहे
संग तेरे जीयें जिद्द हमारी है
आँखें काजल बिना हसीं हैं 'अदा'
इन में तस्वीर जो तुम्हारी है
