दिखाया जाहिरा से खूब मंज़र आशनाई का
अजब फिर खेल खेला है,खुदी जम के खुदाई का
दिखाए तूने क्या-क्या कारनामे,क्या जवाब उनका
खुला हैरत से बस मुंह रह गया है तमाशाई का
कहा आँखों ने क्या और दिल न जाने क्या समझ बैठा
कमाल ऐसा भी हमने देखा है तेरी खुदाई का
न नजरें जब रहीं रोशन, न जिस्मों में गठीलापन
लिया बस नाम इन्सां है तब तेरी खुदाई का