
आदरणीय अलबेला जी कि पोस्ट यहाँ पढ़ें ,http://albelakhari.blogspot.com/2009/12/blog-post_8281.html#comments
आदरणीय अलबेला जी,
आप कलम के धनी व्यक्ति हैं...आपकी कई रचनाएँ तारीफ के काबिल रही हैं...
हम सबके ह्रदय में आपके प्रति अपार सम्मान है...
आपको कलम की ताकत का भी भरपूर भान है और शायद यही वजह है की आपने यह रचना रच डाली...
कलम की मार तलवार की मार से भी गहरी होती है....
आपकी इस रचना ने कई लोगों को मारा है.....एक उसे जिसे आपने निशाना बनाया....दूसरा आपको और तीसरी हम जैसी कई महिला ब्लोग्गर को....
शायद आपने भी देखा होगा...की हम महिलाएं अब बहुत कम आती हैं आपके ब्लॉग पर....आना चाहकर भी नहीं आ पातीं हैं.....शायद आपको कोई फर्क नहीं पड़ता होगा ...लेकिन मुझे पड़ता है...मैंने शुरू से आपको अपना बड़ा भाई माना है...कई बार आपसे कह भी चुकी हूँ...लेकिन एक छोटी बहन कैसे आ सकती आपके ब्लॉग पर...मुझे आप बता दीजिये...??
अब स्तिथि ऐसी हो गयी है कि ब्लॉग्गिंग से विरक्ति सी हो रही है....सोचा था कि देश-विदेश के विद्वानों से कुछ सीखने को मिलेगा...कुछ हम अपनी कहेंगे कुछ उनकी सुनेगे...लेकिन सब गुड गोबर लग रहा है...
मेरे बेटे कि उम्र का मिथिलेश यौन संबंधों कि बात करता है....और आप लोग उसे रोकने कि बजाय ..उसको प्रोत्साहित करते हैं.....
अब हालत ये हो रही है की अपने बच्चों तक को ब्लॉग दिखाते हुए डर लगता है....पता नहीं कब कहाँ क्या नज़र आ जाए..और कोई कह ही दे की तुम तो बहुत तारीफ करती हो सबकी देखो क्या लिखते हैं तुम्हारे बड़े भाई...छोटे भाई...
हो सकता है आप सब लोग सच कह रहे होंगे...लेकिन इतना वीभत्स और इतनी अमर्यादित भाषा कौन झेल पायेगा...??
विरोध करने में भी शालीनता तो होनी ही चाहिए.....किसी एक की मूर्खता के कारण सब को शर्मिंदा करना कहाँ का न्याय है....!!
मैं स्वयं 'उनकी' कोपभाजन बन चुकी हूँ....और विरोध भी कर चुकी हूँ लेकिन शालीनता के दायरे में रह कर.....
आज पहली जनवरी है ..मुझे खुश होना चाहिए लेकिन चाह कर भी नहीं हो पा रही हूँ.....
बता दीजिये आप सब लोग क्या मैं गलत हूँ ??