हर मनुष्य में स्त्रियोचित गुण और पुरुष के गुण होते हैं। पुरुषों में पुरुषत्व ज्यादा होता है और स्त्रियों में स्त्रीत्व की अधिकता होती है। लेकिन कुछ पुरुष जो शारीरिक रूप से तो पुरुष होते हैं लेकिन उनमें स्त्रीगत गुण ज्यादा हो जाते और ठीक इसके उल्टा कुछ स्त्रियों में पुरुषत्व के गुण ज्यादा देखने को मिलता है। इस तरह के होर्मोनल इम्बैलेंस की वजह से किन्नर, गेय और लेसबियंस जैसे लोग हमें देखने को मिल जाते हैं। सच पूछा जाए तो समलैंगिगता, बायोलोजिकल और साइकोलोजिकल इम्बैलेंस का नतीजा होता है। इसमें ऐसे व्यक्तियों का कोई दोष भी नहीं होता, क्योंकि हारमोंस पर हमारा कोई इख्तियार नहीं। लेकिन समाज समलैंगिक लोगों को हिकारत की नज़र से देखने का आदि है । अपवादों (जिन्हें हम अपवाद कहते हैं) से दुनिया भरी पड़ी है, और ये भी अपवाद हैं, हमारी नज़र में ।
एक समय था, जब ऐसी कमियों वाले (जो हमारी नज़र में कमी है), खुद को बहुत अकेला पाते थे, एक त्रासदी से गुजरते थे, समाज की उलाह्नाओं के बीच खुद को दबा कर जी लेते थे। अब समय बदल रहा है और इनलोगों ने भी जीवन जीने की ठान ली है। सोचने वाली बात यह है, अगर यह उनकी मजबूरी नहीं होती तो भला ये क्यों नहीं एक नोर्मल ज़िन्दगी जीते ???
भारत और भारतीयों के लिए यह विषय बेशक चौंकाने वाला होगा, लेकिन यहाँ इन देशों
में समलैंगिक रिश्ते पूर्ण रूप से हैं स्वीकार्य हैं, मेरी बेटी की दोस्त ऐसी
ही माओं की बेटी है, और उसे कहीं कोई समस्या नहीं हुई है न ही होगी..बहुत
आराम से ऐसे जोड़े रहते हैं, और उनके बच्चे भी बिना किसी कुंठा के जीते हैं..जब
ऐसे सम्बन्ध बन ही रहे हैं तो हमें उन्हें स्वीकारने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए..
ये सही है कि, हमें ऐसी बातों की आदत नहीं है, लेकिन अगर हम उनकी दशा को समझने की कोशिश करें और उनकी भावनाओं को यथोचित सम्मान देते हुए उन्हें स्वीकार करें तो कहीं कोई मुश्किल नहीं है।
इस तरह की समस्या अगर घर में आ जाए, अर्थात आपका बच्चा अगर ऐसा निकल आये तो, माता-पिता झेल नहीं पाते हैं। मुश्किल भी है झेलना, लेकिन बच्चे को उलाहना देना, उसके साथ ज़बरदस्ती करना, अमानवीय होगा। इसे बिलकुल वैसे ही देखना चाहिये जैसे कोई नेत्रहीन हो, कोई गूंगा हो तो आप उसका साथ देते हैं, ऐसे बच्चों को हम ब्रेल सिखाते हैं, साईन लान्गुयेज सिखाते हैं ताकि वह अपना जीवन जहाँ तक हो सके नोर्मल जी सके, जो परिभाषा हमने नोर्मलसी की दी हुई है, फिर समलैंगिकता के साथ यह दुर्व्योहार क्यूँ ?
पहले मुझे भी अटपटा लगता था, लेकिन बात-चीत करने के बाद जो बातें सामने आयीं, उन्हें सुन कर लगा कि यही उनके लिए नोर्मल है। देखते रहने पर स्वीकार्य हो ही जाता है...अब मुझे बिल्कुल भी ऐसा रिश्ता अजीब नहीं लगता ।
दुनिया बदल रही है, और फिर ऐसे सम्बन्ध हमारे समाज में अनादिकाल से रहे हैं, बात सिर्फ इतनी है कि हमने उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया, या यों कहें कि हम उसे स्वीकारना नहीं चाहते हैं..,एक बार अगर
स्वीकार लिया तो कुछ भी बुरा नहीं लगता है...
छी-छी..! कितनी गन्दगी है...! कितनी बदबू..! कितनी बीमारियाँ..? पूछते हो, ये कहाँ ले आई हूँ तुम्हें ?
अरे..! ये है तुम्हारे देश का ही हिस्सा, जहाँ.. काली बस्तियां हैं... यहाँ, हर दिन, ज़िन्दगी, आखें खोलती है, कीड़े-मकोड़ों सी रेंगती है, फिर खड़ी हो जाती है, घुप्प अंधेरों में..
और.. बन जाती है, बुनियाद, तुम्हारे शहर की...
यहाँ की औरतों से ही चलता है, तुम्हारे घर का, चूल्हा-चौका...
इनके बेटे-बेटियों ने ही, खड़ी कर दीं हैं , आलिशान इमारतें, तुम्हारे शहर की...
यही तो चलाते हैं, कल-कारखाने, तुम्हारे शहर के...
यहीं क्यूँ रुकते हो ? इन लोगों ने ही दे दिए हैं, तुम्हारे देश को, अजीब से नेता और करिश्माईअभिनेता, जिन्होंने, तुम सबको दिया है सिर्फ, ख़्वाबों का समंदर और बातों के, ख़ाली आसमान....
क्यों दे दिया तुमने इतना बोझ, इनके कमज़ोर कन्धों पर..? तभी तो, तुम्हारा पूरा शहर, हो गया है... इतना कमज़ोर, गन्दा, बीमार, और बदबू भरा....!
बोलीवुड का इतिहास उठा कर देखें, मुस्लिम औरतों ने उस समय फिल्मों में करना शुरू किया था, जब हिन्दू औरतों के लिए यह सब कल्पना से परे था । अधिकतर मुसलमान सिने तारिकाएँ, अच्छे घरों से नहीं थीं, किसी का सम्बन्ध, नाचने वाले घरों से था या फिर नौटंकी करने वालों से। फिर भी, ऐसा क्यूँ है कि हम भारतीय हिन्दुओं ने, आज तक कभी किसी भारतीय मुस्लिम सिने तारिका का अनादर नहीं किया है, हमने हमेशा, उन्हें ऊंचे से ऊंचा स्थान दिया है, उनको इज्ज़त बक्शी है, चाहे उनका भूत कैसा भी रहा हो। इसलिए कि, हमें बचपन से यही सिखाया गया है। हम चाह कर भी, किसी स्त्री का अनादर नहीं कर सकते।
अब उनकी मजबूरी चाहे जो भी रही हो, लेकिन मैं उनके
हिम्मत को सलाम करती हूँ, कि उन्होंने समाज और अपने धर्म की परवाह न करते हुए कला को अपनाया । और हिन्दुस्तान की अवाम ने जी भर कर उनका साथ निभाया। सोचती हूँ अगर ये सिने-तारिकाएं, किसी मुसलमान देश में जन्म लेतीं तो क्या वो ये वो मुकाम पातीं, जो यहाँ रह कर उन्होंने पाया ???
उन्हें इतने ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने में भारतीय पुरुषों का सबसे बड़ा हाथ रहा है। यह भारतीय पुरुष के संस्कार ही हैं जिन्होंने, इन एक्ट्रेसस के फॅमिली-बैकग्राउंड को कभी तवज्जो नहीं दिया, सिर्फ उनकी कला को देखा और सराहा। जबकि, 40-70 के दशक की ज्यादातर मुसलमान सिने तारिकाओं का पारिवारिक परिवेश बहुत भव्य नहीं था।
लेकिन ब्लॉग जगत के मुस्लिम पुरुषों का, अच्छे घरों की हिन्दू महिलाओं, के प्रति रवैय्या देख कर हैरानी होती है, कि कितनी सफाई और कितनी प्लानिंग से वो, हिन्दू महिलाओं की बेईज्ज़ती करके, साफ़ निकल जाते हैं। उनकी आँखों में धर्मान्धता ऐसी कूट-कूट कर भरी हुई है, कि उनको नज़र ही नहीं आता, कि वो सम्मानित घरों की महिलाओं की प्रतिष्ठा से खेल रहे हैं। प्रतिष्ठा जैसी चीज़ का कोई धर्म नहीं होता। मुसलमान स्त्री की प्रतिष्ठा, हिन्दू स्त्री की प्रतिष्ठा से ऊंची नहीं होती। वो सिर्फ प्रतिष्ठा होती है। उस पर से हज़ारों थोथी दलील देना। ये वो लोग हैं जो औरत की आबरू, इज्ज़त का गाना गाते हुए थकते भी नहीं हैं। लेकिन जब अमल करने की बात आती है, तो धर्म के हिसाब से वो 'प्रतिष्ठा' का बंटवारा करते हैं।
सिनेमा में काम ही करना बहुत बड़ा 'बोल्ड' कदम माना जाता था, इसमें से कितनी ऐसी भी, मुसलमान सिने तारिकाएं हैं, जिनकी बोल्डनेस की सीमा रेखा पार करना, आज की तारिकाओं के लिए भी एक चुनौती है, फिर भी हिन्दुस्तान ने न सिर्फ इनकी इज्ज़त अफजाई की है, यहाँ इनको हर वो मुकाम हासिल हुआ है, जिसकी भी इन्होने तमन्ना की है/थी।
कुछ बहुत ही पुरानी तारिकाओं की हम बात करते हैं। बँटवारे के बाद अधिकतर ने हिन्दुस्तान को ही अपना घर माना था, कुछ ऐसी थीं जिन्होंने हिन्दुस्तान छोड़ कर जाने की, कोशिश की या चलीं गयी, गुमनामी के अँधेरे में डूबते वक्त नहीं लगा उनको । नूरजहाँ ने अपना कैरियर बरकरार रखा तो था, लेकिन वो चमक उनको पाकिस्तान में नहीं ही मिली, जो हिन्दुस्तान में उनको मिली थी।
ताज़ा मिसाल हैं रीना रॉय, उन्होंने पकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर मोहसिन खान से शादी की, कुछ ही सालों बाद, उनका पाकिस्तान में जीना मुहाल हो गया, कहते हैं उनकी ज़िन्दगी नरक से भी बदतर कर दी गयी, आखिर उन्हें भाग कर अपने हिन्दुस्तान आना ही पड़ा, जबकि ,उनके मज़हब के लिहाज़ से पकिस्तान उनको माफ़िक आना चाहिए था ।
बटवारे के बाद मशहूर सिने तारिका, खुर्शीद बानो, जो के.एल. सहगल के ज़माने की थीं, ने पकिस्तान को अपना नया घर बनाने का फैसला किया, लिहाज़ा वो अपने पति के साथ करांची शिफ्ट हो गयीं । भारत में उनकी आखरी फिल्म थी 'पपीहा रे'। पाकिस्तान जाकर उन्होंने दो फिल्मों में काम किया, लेकिन दोनों ही फिल्में लचर निर्देशन और फूहड़ तकनीकी की वजह से डब्बा बंद हो गयीं और खुर्शीद बानो के कैरियर का भी पटाक्षेप हो गया।
अक्सर देखती हूँ, पाकिस्तान के बड़े-बड़े गायक, जब तक पाकिस्तान में रहते हैं छोटे-छोटे ही रहते हैं, भारत में कदम रखते ही, उन्हें प्रसिद्धी, पैसा, पोजीशन, पावर और पहचान मिलती है। और कई तो ऐसे हैं जो आकर, वापिस जाने का नाम ही नहीं लेते, जैसे 'अदनान सामी', 'राह्त फ़तेह अली खाँ '। अदनान सामी या राह्त फ़तेह अली खाँ जब तक, पाकिस्तान में थे, गुमनाम ही थे, यहाँ तक कि फ़तेह अली खाँ को भी नाम तभी मयस्सर हुआ, जब उन्हें हिन्दुस्तान की अवाम का साथ मिला।
आज तक, कोई भी बता दे, एक हिन्दुस्तानी नाम, जो मुसलमान न हो, जिसे कहीं भी, किसी भी मुसलमान देश में सम्मान मिला हो, किसी भी विषय में। आप ढूँढ ही नहीं पायेंगे। जबकि हिन्दुस्तान ने, कई गैर हिन्दुस्तानियों को, उनकी कला की वजह से, या उनके और दुसरे गुणों के लिए, न सिर्फ पहचान दिया है, बल्कि उन्हें , पैसा, पोजीशन, प्रसिद्धि और भी हर तरह की सौगात से नवाज़ा है।
हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों का ही दिल इतना बड़ा है, जो ऐसा कर पाते हैं, उसके बावज़ूद, यहाँ के मुसलमान, जो मुसलमान बाद में हैं, पहले हिन्दुस्तानी हैं, यहाँ रह कर, यहीं से सबकुछ लेकर, पहली फुर्सत में हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों के अगेंस्ट हो जाते हैं। क्रिकेट की ही बात लीजिये। हिन्दुस्तान-पाकिस्तान में मैच हो रहा हो, तो पाकिस्तान के जीतने पर मुसलमान मोहल्ले में जश्न मनना, कोई बहुत नयी बात नहीं है। कोई पाकिस्तान में ऐसा जश्न मना कर दिखा दे, हिन्दुस्तान के जीतने पर तो हम मान जाएँ ।
कहते हैं मुसलमान का अर्थ होता है 'मुसल्लम हो ईमान जिसका', ये कैसा ईमान है जो अपनी सर-ज़मीन, उनके अपनों और उन्हें अपनाने वालों का ही नहीं है। जब आप अपने देश के प्रति ही ईमानदार नहीं हैं, देश के लोगों के प्रति इमानदार नहीं हैं, तो फिर ईमान की बात ही कहाँ रह जाती है। मैं यह नहीं कहती कि सारे मुसलमान ऐसे हैं, हज़ारों ऐसे होंगे जिन्हें, हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों से बे-पनाह मोहब्बत होगी। जो हिन्दुस्तान के लिए जान दे सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिनके दिल में हर वक्त धर्म का ज़हर उबाल खाता रहता है। मेरे ऐसा लिखने पर, बहुत सारे आ जायेंगे कहने आपने गलत लिखा है। लेकिन जो कहेगा वो मुझे यह भी तो दिखाए कि ऐसा नहीं है। तो मैं मान जाऊँगी अपनी गलती, और माफ़ी भी मांग लूँगी । लेकिन पहले मुझे ऐसा कोई नज़ारा दिखाया जाए।
सच कहूँ ये मुझे यह लिखते हुए अपार दुःख हो रहा है। लेकिन जो सच है, उसे कहना तो पड़ेगा ही। हिंदी ब्लॉग जगत में गिने चुने मुसलमान हैं, लेकिन उन गिने-चुने में ही, 80% से अधिक ऐसे हैं, जो सिर्फ दहशतगर्दी, गुंडागर्दी के पर्याय हैं। जो बचे हुए हैं, उनकी शराफत, भलमानसहत की कसमें खायी जा सकतीं हैं। लेकिन जो ग़लत हैं, वो निहायत ही ग़लत हैं। उन्होंने बहुत सोची-समझी साज़िश के तहत, हिन्दू महिलाओं को, ग़लत तरीके से, दुनिया के सामने पेश किया है। ऐसा कैसे होता है कि, सिर्फ हिन्दू महिलाओं की तसवीरें, गलत लेबल के साथ, अभद्र सन्दर्भ से लिथड़ी हुई, उनके ब्लोग्स की शोभा बढ़ातीं हैं ??? कोई हिन्दू महिला अगर अपने दुधमुहे बच्चे को छोड़ कर, बिना तलाक़ लिए हुए किसी मुसलमान पुरुष की अंकशायनी बन जाए तो वो वीरांगना कहाती है ???
हमने बहुत, शराफ़त से आग्रह किया है कि, जो पोस्ट्स हिन्दू महिलाओं के
सम्मान को हर्ट कर रहीं हैं, उन पोस्ट्स को हटाया जाए। उनकी तस्वीर हटाई
जाए। लेकिन, सुन कर बात को अनसुनी किया जा रहा है। उनके मंसूबे यहाँ एक बार क़ामयाब हो गए हैं। बार-बार नहीं होंगे। हमें उनको बताना होगा कि हम अमन-पसंद हिन्दुस्तानी तो हैं, लेकिन उनकी चालबाजी हमारी समझ में अब आ गयी है। उनकी गलत-सलत दलीलें यहाँ काम नहीं आएँगी। वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए, या तो वो अपना रवैय्या बदलें, और वो पोस्ट्स तुरंत हटायें या फिर वो तैयार हो जाएँ, क्योंकि अब हर तरह की कार्यवाही की जायेगी और हम क़ामयाब होंगे।
मैं गुज़ारिश करतीं हूँ, उन सभी बहनों से जिन्होंने, ऐसे ब्लोग्स पर अपनी मौजूदगी दर्ज की है, अपना नाम वापिस लें, क्योंकि जो ब्लॉग, आपकी सखियों को प्रतिष्ठा नहीं दे सकता, वो आज नहीं तो कल आपको भी इस योग्य नहीं समझेगा। मैं सिर्फ रिक्वेस्ट कर सकती हूँ। बाकी आप बहनों को जो उचित लगे वही कीजिये। लेकिन अगर आप अपना नाम उन विध्वंशी ब्लोग्स से वापिस लेंगी, तो यकीन कीजिये, एक दिन आप अपने इस फैसले से बहुत खुश होंगी। ये मेरा आपसे वादा भी है और सलाह भी।
आप सबसे निवेदन है कि भारी संख्या में जाकर, इस लिंक पर जाकर अपना विरोध दर्ज करवाएं..:
I am presenting this complaint letter, with
reference to a situation, where a community blog has been using Hindu women's
pictures, inappropriately, writing about them maliciously and using labels for
search
in undignified manner.
I
hereby submit the links of the posts that have been submitted for universal
audience to view.
I have requested the blog owner many times, to remove
these uploaded posts, but so far have received lame excuses. These writing
have been hurting these women's dignity severely and they are going
through,
mental agony continuously. These writings are also against our
religious belief, and tarnishing our sentiments.
Therefore, I urge you, to please look into this matter
urgently and hope an strict action from your honorable office, to end
this notorious act, that is being played for very long time.
Defamation/Libel/Slander को सेलेक्ट करें
और Continue दबाएँ
दुसरे पेज में Blogger/Blogspot
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scroll डाउन करें और
I have found content that may be defamation/libel
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Brazil, Canada, Czech Republic, Denmark, Finland, France, Germany,
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Mexico, Netherlands, New Zealand, Norway, Portugal, Romania, Singapore,
Slovakia, South Korea, Spain, Sweden, Switzerland, Taiwan or United
Kingdom, please click here.
अगले खाली बक्से जिसके ऊपर लिखा है In order to ensure specificity, please quote the exact text from each
URL above that you believe infringes on your rights. If the allegedly
infringing content is a picture or video, please provide a detailed
description of the picture/video in question so that we may locate it on
the URL in question. *
यहाँ आपको तीनों पोस्ट्स को कॉपी करनी होगी।
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Please note that your signature must exactly match the First and Last
names that you specified earlier in this webform.
(अप्रैल माह में मैंने यह पोस्ट लिखी थी, लेकिन आज फिर इसकी ज़रुरत नज़र आई, इसलिए दोबारा डाल रही हूँ। )
सच पूछा जाए तो, ब्लॉग लिखना आत्मसंतुष्टि का परिचायक है, हम आत्मिक ख़ुशी
के लिए ब्लॉग लिखते हैं, कुछ हद तक, ये हमारे अहम् को भी तुष्ट करता है,
कुछ अलग सा करने की प्रेरणा भी देता है, जैसा हर जगह देखने को मिलता और
अब तो हम सभी जानते हैं, ब्लॉगिंग, 'आत्माभिव्यक्ति' का एक सशक्त साधन है
..लेकिन कभी-कभी हमारी ये 'आत्माभिव्यक्ति' हमें ऐसी स्थिति में लाकर खड़ा
कर देती है, कि आप अपनी 'आत्माभिव्यक्ति' पर पछता कर रह जाते हैं, और आप
खुद को मुश्किल में पाते हैं....
ब्लॉगिंग की दुनिया में आये हुए, मुझे कुछ वर्ष हो ही चुके हैं, और इन
सालों में, जो मैंने देखा, समझा, जो गलतियाँ मुझसे हुई, और जो अनुभव मेरा
रहा, उसके आधार पर आज मैं कह सकती हूँ, कि मैं सचमुच बहुत चिंतित हूँ...इस
अंतरजाल के दुरूपयोग से...हमें यह मान कर चलना चाहिए कि, यहाँ सभी प्रबुद्ध
नहीं हैं, सब आपका भला चाहने वाले नहीं हैं, सभी यहाँ वो नहीं हैं, जो नज़र
आते हैं, इसलिए महिलाओं को ख़ास करके सतर्क रहने की, बहुत आवश्यकता
है...हम यह न भूलें, अंतरजाल में लिखा गया सबकुछ, तारीख़ बन जाता है...
एक उदाहरण देती हूँ....अगर आपने कोई पोस्ट लिखी, उसके जवाब में या, फिर
उसके समर्थन में किसी व्यक्ति ने एक और पोस्ट लिख दी, परन्तु जो पोस्ट लिखी
गयी है, कोई ज़रूरी नहीं वो, सही मायने में आपका समर्थन कर रही है...और
उसका उद्देश्य आपका समर्थन करना ही है, जैसा आप समझ रहे हैं...हो सकता है
उस पोस्ट की भाषा, उसका सन्दर्भ आपके पूरे व्यक्तित्व को, कुछ और ही दिशा
या रूप दे रहा हो..., आपको ऐसा प्रतीत हो रहा हो, कि उस व्यक्ति ने, आपका
साथ दिया है, लेकिन वास्तव में वो पोस्ट आपको ऐसा नाम दे रही है...कि आप
सोच भी नहीं सकते...सही मायने में वो नाम नहीं, बदनामी दे रही है...
हमें नहीं भूलना चाहिए कि, गूगल एक बहुत ही पोपुलर और बहुत पावरफुल सर्च
इंजिन है...पूरे विश्व में करोड़ों लोग इसका उपयोग करते हैं...और सर्च करने
वाले हर तरह की, चीज़ों की तलाश में रहते हैं...आप यह बिलकुल नहीं चाहेंगे
कि, दुनिया के किसी कोने में बैठ कर, एक अनजान व्यक्ति ने, एक अश्लील शब्द
से कुछ ढूंढना शुरू किया, और आपका नाम, आपकी फोटो समेत, एकदम से सामने आ
गया...और लोग आपको उस विषय में स्पेसिलिस्ट समझें...कम से कम मैं तो नहीं
चाहूँगी...लेकिन ऐसा ही हो रहा है...मुझे इसकी बहुत चिंता है...और ऐसा
इसलिए हुआ है, क्योंकि एक पोस्ट के समर्थन में, जो पोस्ट लिखी गयी है..उसका
शीर्षक भी ऐसा ही दिया गया है...
ब्लॉग जगत में हर तरह के लोग हैं, कुछ तो बस, आपकी नासमझियों के इंतज़ार
में बैठे रहते हैं, आपने एक मौका दिया और देखिये वो आपके नाम का, कितना और
कैसे इस्तेमाल करते हैं, इसलिए आपके नाम से लिखी गयी पोस्ट, आपकी मर्ज़ी के
बिना न लिखी जाए, इस बात की आप तसल्ली कर लें...ब्लॉग जगत में यह नियम बनना
चाहिए...कि बिना आपकी मर्ज़ी के, आपके नाम का उपयोग, कोई न करे...फिर चाहे
वो आपकी तारीफ में ही क्यों न हो....
आज मैं यहाँ, एक बात साफ़ कह देना चाहती हूँ, बिना मेरी इजाज़त,
मेरे नाम का इस्तेमाल, या मेरे ब्लॉग के नाम, एड्रेस का इस्तेमाल, कोई भी,
कहीं भी, नहीं कर सकता है...आप मेरे ब्लॉग पर आयें, आपका स्वागत है...इससे
ज्यादा मुझे आपसे कोई अपेक्षा नहीं है...
हम सभी परिवार वाले हैं, इस पोस्ट के जरिए, मैं ब्लॉग जगत को, और उन
ब्लागर्स को बताना चाहती हूँ, कि किसी का चरित्र हनन करना, और वो भी इस
तरीके से, कि अगले को पता भी न चले, घोर अन्याय है, यह किसी भी हिसाब से
इंसानियत नहीं है....ख़ास करके महिलाओं के प्रति ...ये न भूलें, उन महिलाओं
के, पति, बच्चे सभी होते हैं, और इस तरह की अश्लीलता के साथ, अपनी माँ का,
या पत्नी का नाम देखना, फोटो समेत, उनके लिए, बहुत कष्टदायक हो सकता
है...कौन जाने बच्चों के दोस्त, कहीं देख लें और बच्चों का जीना हराम कर
दें....इसतरह बड़ी आसानी से कई ज़िंदगियाँ तबाह हो सकतीं हैं...
ब्लॉग जगत की सभी महिलाएं पढ़ी-लिखी और घर-परिवार वाली हैं , उनके नाम का
बेज़ा इस्तेमाल न किया जाए, यूँ तो,सबकी अपनी-अपनी जिम्मेदारी होती है
यहाँ, हर इंसान अपने कामों के लिए, खुद ही जिम्मेवार होता है...फिर भी, अगर
किसी ने कोई नासमझी की, तो हम सब का फ़र्ज़ है, उसे सम्हालना, उसे आगाह
करना, न कि उसे और मुसीबत में डाल देना , मानवता का तकाज़ा ये नहीं
है...इंसानियत की बड़ी-बड़ी बातें करने वालों से, इतनी इंसानियत की
अपेक्षा, तो करते हैं हम सब....क्या पता आपके द्वारा, आवेश में आकर लिखी
गयी एक अदद पोस्ट...किसका जीवन बर्बाद कर दे...!!!
जब भी आप ऐसा करें, तो एक बार अपनी, माँ, अपनी पत्नी, अपनी बहन और अपनी
बच्ची की तरफ अवश्य देखें...क्या उनके साथ, ऐसी कोई भी हरकत, कोई दूसरा
करे, तो क्या वो उचित होगा और क्या वो आपको मंजूर होगा ??
'सुयोधन' काहे 'दुर्योधन' बनी जावा
आज कछू हम मगज लागावा
थी दुर्योधन की मात गांधारी
हस्तिना नरेश ध्रितराष्ट्र की प्यारी
नेत्रहीन ध्रितराष्ट्र थे भाई
गांधारी को यह बहुत दुःखदाई
पुत्र हस्तिनापुर युवराज बनी जावा
जतन विविध गांधारी लगावा
कोख पर अनेकों प्रहार कर दिन्हाँ
किन्तु प्रसव आपन समय ही लिन्हाँ
पहिले कुंती ही बालक जन पाई
पाछे गांधारी मात कहाई
बालक सुयोधन के प्राण बची जावा
कोख माहि अनेक प्रहार वो खावा
भीषण प्रहार जो झेली जावे
'सुयोधन' ताहि नामहीं पावे
पांडू श्राप से ग्रसित थे भाई
पुत्र प्राप्ति में थी कठिनाई
तब कुंती के वरदान काम आवा
'धर्म', 'वायु, अरु 'इन्द्र' बुलावा
कुन्ती-पुत्र युधिष्ठिर जाना
पांडू पुत्र नहीं ऊ माना
रक्त कुरु नाही युधिष्ठिर पावे
बात याही पर दुर्योधन भीड़ जावे
बात उसकी हमहूँ यही माने
राजा का पुत्र 'राजा' हम जाने
बहुत अनीति हुई हम माने
किये अनीति दौऊ पक्ष जाने
पांच पति द्रौपदी जब किन्हाँ
ताख पर सब नीति रख दिन्हाँ
कर्ण को जब कुंती ने त्याजी
कौन निति की बात किया जी
कर्ण को पांडव नहीं स्वीकारे
दुर्योधन बढ़ी बाँह पसारे
जब पाँचों भाई वरदान से आये
तब काहे कर्ण गए बिसराए
काहे द्रौपदी अपमान किया जी
आँधर का पुत्र आँधर कहा जी
ई कौन सी नीति हमको बताओ
अपनी पत्नी को दाँव पर लगाओ
पत्नी अपनी स्वयं दाँव लगाई
रही कहाँ प्रतिष्ठा जो गंवाई ?
शुरुआत द्रौपदी चीर हरण का
स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर कर दीना
दोष लगाये दुर्योधन पर
उसने तो बस विस्तार दिया था
भीष्म को मारन शिखंडी बुलाया
अर्जुन पाछे से बाण चलाया
नार पर वाण भीष्म नहीं मारे
निहत्थे भीष्म को अर्जुन सँहारे
शर शैया पर भीष्म लिटाया
अर्जुन फिर भी वीर कहाया
गुरु द्रोण से अनीति खेली
गोधूलि में 'अश्वस्थामा' नाम ले ली
अश्वस्थामा मारा गया बताया
भेरी बजा सब वाक्य दबाया
हाथी मरा था अश्वस्थामा
द्रोण तक पूरी बात न पहुँचाया
द्रोण पूरा नहीं सुन पावे
पुत्र शोक में प्राण गंवावे
गुरु थे किन्तु थे वो अभागे
शिष्यों के कर प्राण तियागे
आगे भी हम बताए भईया
कौन-कौन छल किये किशन कन्हईया
गांधारी दुर्योधन को बुलाई निज द्वारे
बिना वस्त्र के आना मेरे प्यारे
तब कृष्ण ने भांजी दै मारी
दर्योधन की मति फेर दी सारी
नग्न कैसे जाओगे भ्राता
कुछ भी कहो है वो माता
कृष्ण का छल काम में आया
दुर्योधन संकोची अधो-वस्त्र लगाया
गांधारी देख उसे पाषाण बनाई
बस जंघा प्रदेश नहीं बन पाई
भीम संग गदा युद्ध जब आया
पराजित होता भीम सकुचाया
कृष्ण ने तब एक और अनीति बताई
हाथ मार जंघा दिखा दी
गदा युद्ध का नियम है भाई
कमर के नीचे न कोई चोट पहुँचाई
किन्तु भीम प्रहार कर दीन्हा
युद्ध की नीति अनीति कर दिन्हाँ
ऐसे कितने ही अनीति हुए भईया
दोष दुर्योधन को काहे देवें मईया
पाण्डव कौन दूध के धुले थेकहें अधर्म पर धर्म विजय पावे
हमका अधर्म पर अधर्म नज़र आवे ....