Friday, July 6, 2012

हिन्दुत्व ! तेरी यही कहानी....


बहुत पुरानी बात है
पृथ्वी के पूर्वी कोने में
एक अति तेजस्वी बालक ने
जन्म लिया
ओजपूर्ण था मुखमंडल उसका
सभ्यता की पहली धोती
उसने ही थी पहनी
ज्ञान-विज्ञान से बना
तन उसका
कीर्ति पताका लहराई
ऊंचे गगन में
यशगान की धुन फ़ैल गयी
संपूर्ण भुवन में

धीरे धीरे वो श्रेष्ठ बालक
अति सुन्दर युवक बन गया
उसकी ज्ञान भरी बातें
लोग गाने लगे
इस कोने से उस कोने तक
पहुँचाने लगे और
धीरे-धीरे अपनी बातें भी
मिलाने लगे

हजारों वर्ष
हो गयी उम्र उसकी
बोल नहीं सकता वह
खो दी उसने अपनी वाणी
आज भी लोग
उसके नाम के गीत गा रहे हैं
अब उसकी नहीं
सिर्फ
अपनी सुना रहे हैं
नाम लेले कर उसका
थोथा ज्ञान फैला रहे हैं
जो बात कभी नहीं कही
उसके नाम उद्धरित करते जा रहे हैं
वह मूक चुप-चाप सब कुछ
देख रहा है
सोचता है-
क्या मैंने कहा था ?
और ये क्या कह रहा है ?

इस आस से कि शायद
उसकी वाणी लौट आये
फिर वो इन मूर्खों
को समझाए
जीए जा रहा है
लांछन उन व्याख्याओं का
जो उसने कभी नहीं दिया
अपने सर लिए जा रहा है

सच्चाई के पत्थरों से
जो सीधी सरल सी राह
उसने बनायीं थी
जिसमें संस्कारों के फूल और
सहिष्णुता कि छाया, छाई थी
उस मार्ग से कई वक्र रास्ते
लोगों ने लिए हैं निकाल
अंधविश्वास, छुआ-छूत
आदि राहों का
बिछा दिया अकाट्य जाल
जिसकी परिधि
ऐसी फैली कि
फैलती ही गयी
सत्य मार्ग धूल-धूसरित होकर
इस चक्रव्यूह में लुप्त हुआ
संस्कारों के फूल मुरझाये
वेद-पुराण सब गुप्त हुआ

सच ही तो है
एक झूठ सौ बार कहो तो
सबने सच मानी है है
हिन्दुत्व !
तेरी भी यही कहानी है....

तुम्हीं मेरे मंदिर.. आवाज़ 'अदा' की...

Wednesday, July 4, 2012

हिंदी ब्लॉग्गिंग अब सही दिशा की ओर जा रही है...

काफी वक्त गुज़ार दिया है मैंने इस ब्लॉग्गिंग की दुनिया में और अब तक जो बात समझ में आई है मुझे, वो मैं बताना चाहूँगी :

यहाँ की ज्यादातर आवाम अमन पसंद है, असहमतियों, आपत्तियों, विरोध ये सारे हंगामे होते हैं, लेकिन अब वो उतने बुरे नहीं होते जैसे पहले होते थे। काफी स्वस्थ विमर्श अब देखने को मिलता है।

अधिकतर पुरुष महिलाओं का आदर करते हैं, और अब अपनी सीमा जानते हैं। देख कर ख़ुशी होती है। लेकिन कुछ ऐसे भी पुरुष हैं,जो महिलाओं को पसंद तो करते हैं, लेकिन बिना दिमाग वाली औरतें उनको ज्यादा पसंद थीं। यह उनका दुर्भाग्य हुआ कि ब्लॉग जगत की सभी महिलायें दिमाग वाली हैं। इसलिए वो झेल नहीं पाते थे। फिर भी समयानुसार उन पुरुषों में भी बदलाव अब देखने को मिल रहा है। जो बहुत अच्छी बात है।

अच्छा लग रहा है देख कर कि ब्लॉग जगत में अश्लीलता में काफी कमी आई है। लोग सहिष्णु हो रहे हैं, जो पहले अश्लीलता पर उतर आते थे, अब खुद में सुधार ला रहे हैं। अब वैसा हंगामा नहीं होता है, जैसे पहले होता था । अश्लीलता किसी भी कीमत पर झेली नहीं जायेगी चाहे वो किसी के भी प्रति हो, यह मोटो होना ही चाहिए ब्लॉग जगत का। अश्लीलता को अब वो अटेंशन नहीं मिलती जो पहले मिलती थी, इसलिए ऐसा लेखन करनेवाले भी अब नम्र हो रहे हैं, यह भी बहुत अच्छी बात है।

बेनामी टिप्पणियों में तो भारी मात्रा में कमी आई है। जो बहुत ही पोजिटिव बात है। अब तो एक्का-दुक्का ही ऐसी टिप्पणियाँ देखने को मिलतीं हैं, और जो मिलतीं हैं, सभी जानते हैं वो किनकी हैं। बेनामी भी अब सभ्य  टिप्पणियाँ करने लगे हैं। 

बेनामी प्रोफाइल्स भी अब नहीं के बराबर सक्रीय हैं।

टिप्पणियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। अब हर ब्लॉग में टिप्पणियाँ प्रचूर मात्रा में देखने को मिलती हैं । इसलिए ये स्पर्धा भी अब लगभग समाप्तप्राय हो रही है।

टिप्पणियों की गुणवत्ता में भी बहुत सुधार हुआ है। अब अधिकतर लोग अपनी बात खुल कर कहते हैं, जिससे, पोस्ट की महत्ता बढ़ जाती है, कई बार पोस्ट से अधिक जानकारी टिप्पणियों में ही मिल जाती है। फिर भी इसमें और अधिक सुधार की गुंजाईश अब भी है।

पहले की तरह अब ब्लोग्गर्स, असहमतियों, आपत्तियों, विरोध से नहीं घबराते।  जिनको जवाब नहीं देना होता है वो नहीं ही देते हैं। ब्लोग्गर्स अपने मोडेरेशन का सही इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर लोगों को किसी ब्लोग्गर की लिखी, पोस्ट पसंद नहीं आयी तो, ब्लोग्गर अपने अधिकार का सही इस्तेमाल करते हुए सारी  टिप्पणियाँ हटा देता है, जो बिलकुल सही है। टिप्पणी  रखना न रखना यह ब्लोग्गर का अधिकार है और इस अधिकार का बहुत सही इस्तेमाल कर रहे हैं ब्लोग्गर्स । अच्छी बात यह भी है कि पाठक, ब्लोगर के इस फैसले का सम्मान भी कर रहे हैं। 

और जो ब्लोग्गर्स पहले भी चुपचाप अपना काम करते थे वो अब भी कर रहे हैं। आज भी बहुत सारे अच्छे ब्लोग हैं. अच्छा लिखने वाले हैं जो पाठकों की आस लगाए बैठे हैं, वो अब भी बैठे ही हैं। लेकिन उनको भी अपनी तरफ से परिश्रम करना ही होगा और एक बात बिलकुल सही है, अगर आप सचमुच अच्छा लिखते हैं, और खुद को सामने लेकर आते हैं, तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

कुलमिला कर हिंदी ब्लोग्गर्स अब काफी परिपक्व नज़र आ रहे हैं और हिंदी ब्लॉग्गिंग अब सही दिशा की ओर  जा रही है।

आप सभी को हृदय से बधाई। 


लेकिन ये पत्थर हमेशा ही ग़लत होते हैं...!

मुझे लोग पसंद करते हैं,
और मैं भी उन्हें पसंद करती हूँ,
लेकिन तभी तक,
जब तक हम एक दूसरे को,
ठीक से जान नहीं जाते ।
इस जानने और जान जाने के बीच ,
खिले रहते हैं फूल, नम्रता के,
लेकिन कुछ दुविधाएं दो से चार
होने लगतीं हैं ।
इकट्ठी हुई दुविधाओं की गाँठें,
जब खुल जातीं हैं,
सिले हुए होंठों की तुरपाई भी उधड़ जाती है ।
और कसूरों की बन्दर-बाँट,
शुरू हो जाती है,
आधा तेरा है, आधा मेरा है।
मुझे भी अब होंठों को सिल के बैठना,
मंजूर नहीं,
कब तक उन पत्थरों से हम,
साठ-गाँठ बनायेंगे ?
कितने हाथों से हम अपना चेहरा छुपायेंगे ?
लाख कोशिश करो
ये पत्थर कानों से अन्दर तक,
उतर ही जाते हैं, 
बवाल करते हैं और बिखर जाते हैं,
फिर दे जाते ला-ईलाज चोट कई जगह,
हम सही हो सकते हैं,
तुम भी सही हो सकते हो,
दूसरे भी सही हो सकते हैं,
लेकिन ये पत्थर हमेशा ही ग़लत होते हैं...!





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Tuesday, July 3, 2012

कैसे मान लूँ बोलो तो, कोई पासबाँ नहीं मेरा...

ये तस्वीर कनाडा में Banff नेशनल पार्क की है...

ये ज़मीं नहीं मेरी, वो आसमाँ नहीं मेरा
ठहरी हूँ जहाँ मैं आज, वो जहाँ नहीं मेरा

होगा क्या जुड़ कर भी, उस अनजाने हुज़ूम से 
वो लोग नहीं अपने, वो कारवाँ नहीं मेरा 

बच कर लौट आती हूँ, गज़ब सागर की लहरों से
कल का क्या भरोसा है, वो तूफाँ नहीं मेरा 

कोई है जो मुझको भी, बचा लेता है हर ग़म से
कैसे मान लूँ बोलो तो, कोई पासबाँ नहीं मेरा

शमा हूँ 'अदा', मेरी अपनी वही जलती हुई लौ है 
बुझकर काम क्या आऊँगी, वो धुवाँ नहीं मेरा

पासबाँ=रक्षक 

और अब एक गीत ...इसे गाया है किशोर कुमार ने...लेकिन फिलहाल मैं गा रही हूँ...हाँ नहीं तो...!!
अजनबी तुम जाने पहचाने से लगते हो (थोड़ा सा अलग करने की कोशिश की है...लगता है मिस फायर हो गया है )

Monday, July 2, 2012

मैं कौन हूँ ??????

ट्रिंग...ट्रिंग..

माँ का फ़ोन आया.....
हेल्लो, हाँ माँ .....आज कैसे फ़ोन कर रही हो?? आज तो बुधवार है....सब ठीक तो है न ...?

हाँ, ठीके है....अब क्या ठीक होना है...बुढ़ापा है...कभी ठीक हैं तो कभी ना ठीक....

माँ क्या हुआ तुम ठीक तो हो न ??? और बाबा कैसे हैं ?? बहुत ज्यादा चिंता रहती है तुमलोगों की ...अब ठंडा आ गया है, अपना ध्यान रखना ...

हाँ ऊ भी ठीके हैं बस खाँसी अब बढ़ गया है....बहुते ठंडा पड़ रहा है, रखते तो हैं अपना ध्यान..

अच्छा ऊ वाला दवा मंगवा ली जो हम लाये थे, और बाबा एकदम ठीक हो गए थे ....

नहीं,  कहाँ मंगवा पाए हैं....

माँ हमको इसी बात से गुस्सा आता है ....हर बार तुमसे कहते हैं और तुम सुनती नहीं हो.....हम जानते थे तुम  दवा नहीं मंगवाई होगी ......एक साल से रट रहे हैं हम, और तुम हो कि अभी तक नहीं मंगवाई हो ....सच में माँ तुम भी न ...खाली जगदीश (ड्राईवर) से बोलना ही तो होता है.... ऊ भी नहीं करती हो...

अरे बाबा कल जगदीश आएगा तो मंगवा लेंगे.....

खैर ये तो हम पिछले एक साल से सुन रहे हैं..और हर बार मेरा मूड ऑफ़ हो जाता है.....इ जगदीश के पास भी एक फोन नहीं है.....सगरो जहां फोन रखता है , जगदीश फोन काहे नहीं रखता है....खैर अब बताओ फ़ोन कुछ बोलने के लिए की ....की ऐसे ही की हो ???

बेटा तुम चिंता मत करो, कल हम ज़रूर मंगवा लेंगे दवा......हाँ इ बताना था कि तुम्हारे सचिन चाचा अब नहीं रहे ....

कौन सचिन चाचा ??

वही तुम्हारे बाबा के चचेरे भाई.....जो वकील थे....

अच्छा वो जो बहुतेअंग्रेजी बोलते थे...

हाँ हाँ वही.....

अच्छा इ तो बहुत बुरा हुआ....क्या हुआ था...?

शायद हार्ट फेल हुआ है ...हमलोग ठीक से नहीं जानते हैं....पता नहीं शायद ५-६ साल से तो मुलाक़ात भी नहीं है....

अच्छा...फिर कैसे पता चला कि ऐसा हुआ है.....?

गाँव से जया (मेरी चचेरी बहन) का फोन आया कि ऐसा दुःख का खबर है....सो घर में छुतका हो गया है...

घर में छुतका का माने ?

अरे अब दस दिन तक हल्दी-तेल नहीं बनेगा न....

अरे उ काहे....? काहे नहीं बनेगा ??? माँ तुम भी न इतनी पढ़ी लिखी होकर ऐसी बात करती हो.....उनलोगों से न कभी मिलना न जुलना...न बात ना चीत फिर तुम रांची में काहे छुतका मानोगी....?

अरे तुमको नहीं करना है इ सब....सलिल (भाई) करेगा..उसको भी बोल दिए हैं.....तुमसे पहिले उसी से बात किये कनाडा में...

अरे माँ......सलिल काहे करेगा दस दिन इसका पारण बताओ तो....उ तो सचिन चाचा से २ बार से ज्यादा मिला भी नहीं होगा... और कनाडा में इसका पारण करने का माने...इ तो बेवकूफी हैं ?? हम रांची में इसका पारण बेवकूफी सोचते हैं और तुम कनाडा में करवा रही हो.....??

उ लोग गोतिया हैं, अपना खून हैं.....तो मानना तो पड़ेगा न....और तुम काहे परेशान हो तुमको नहीं न करना है....

हाँ ..जानते हैं....अगर करना भी होता तो नहीं करते हम...
हम फिर से कहते हैं...जीते जी तो कभी भर मुंह बात नहीं की हो और अब छुतका मान रही हो......इ बात हम नहीं समझे......चलो तुमलोगों की जैसी मर्जी...कर लो बाबा कोई दिक्कत नहीं है..
अच्छा माँ इ बताओ...अगर हमको कुछो हो गया और हम नहीं रहे तो तुम इ दस दिन का हल्दी-तेल बर्जोगी कि नहीं ..??

....................

माँ !!!

माँ !!!
अरे सुन रही हो कि नहीं ??? हम का पूछ रहे हैं ...अगर हमको कुछ हो गया तो, तुम दस दिन का इ तेल-हल्दी बर्जोगी कि नहीं.....कि खैईते रहोगी......बोलो न ???

इ का बेहूदा सवाल है...ऐसे कोई बात करता है.....

माँ जवाब दो.....

हम फालतू बात का जवाब नहीं देते हैं...तुम हमेशा उल्टा-पुल्टा बात करती हो....लो अपने बाबा से बात करो....

माँ बोलो न माँ ...बताओ ना... हम जानना चाहते हैं...हम तुम्हरी अपनी बेटी हैं, फिर भी नहीं बर्जोगी का ???

हाँ हल्लो.....मुन्ना (मेरा घर में पुकारू नाम)....
हल्लो..!!
मुन्ना....???
मुन्ना....???

हाँ बाबा प्रणाम....कैसे हैं.?.......
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ठीक है बाबा अब रखते हैं.....अच्छा बाबा प्रणाम....
टिन...


मैं कौन हूँ ??????

WAHABI Saudi Prostitution Exposed.....Saudi Prince in Night Club spend one million dollar

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वेश्यावृति का नमूना, और पैसे का खेल...क्या ये सब जायज़ है...इस्लाम में ?????



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