Thursday, April 8, 2010

इन्कलाब आ गया है ...!






यकायक सब कुछ,


थम सा गया है


कोई कह रहा था कि


न्कलाब आ गया..... !


Wednesday, April 7, 2010

ये दीया बुझ जायेगा...


जानते हो !!
मुझे पता था
ये दीया बुझ जायेगा
फिर भी, जाने क्यूँ 
मैंने...
इसे जलाया
अँधेरे में 
तुम्हारे चेहरे
के भाव
रुख की सलवटों
में छुप गए थे 
जो दीये की रौशनी
देख झांकने लगे
तुमने बड़ी मुस्तैदी से
भावों को भगा दिया
और मौका देख 
वो दीया बुझा दिया....

Tuesday, April 6, 2010

समीर लाल...सचमुच .... ठंडी हवा का झोंका....हाँ नहीं तो...!!!

 समीर जी, साधना जी, आशू (छोटा बेटा)

टोरोंटो का सफ़र....४ घंटे का रहा...
पहुंचना था हमें समीर जी के घर १ से २ के बीच लेकिन पहुंचे हम लगभग ४ बजे...और जैसी उम्मीद थी कहाँ रुक पाए हमारे लिए ..खा-पीकर डकार मार कर बैठे थे...साइज़-वाइज़ नहीं देखा है...:)
खैर हमारा क्या हम पहुँच गए...वो तो भला हो "अन्नपूर्णा" साधना जी का, बाकायदा उन्होंने हमें  भोजन कराया ....बात-बात में पता चला कि मुर्गी हलाल तो कहीं और हुई थी लेकिन देगची में जलवा नशीन समीर जी ने ही किया  है उसे...इतनी लज़ीज़
वो जीते जी भला कहाँ होती....!!
रोटी, चावल, आलू गोभी की सब्जी, बंद गोभी की सूखी सब्जी, लोबिया की दाल, चिकेन, रायता, अचार, सलाद  इत्यादि-इत्यादि ...भूख के मारे वैसे भी दम निकला जा रहा था और खुशबू यूँ भी जान लेने को तुली हुई थी...बस जी हमने तो भोजन पर धावा बोल दिया....


लम्बा सफ़र, अच्छा भोजन, दिलकश वातावरण, दिलनशीं मौसम, दिलदार साधना जी और दिलेर समीर जी...फिर क्या था..हम भी सोफे में धंसे हुए जो बातों की पिटारी खोल कर बैठे तो यूँ समझिये कि एक से एक, धमाकों और फुलझड़ियों का ज़िक्र होता गया...कभी ताऊ जी की  ब्लॉगबस्टर शोले, तो कभी खुशदीप जी के मक्खन की बात, कभी महफूज़ मियाँ का ग़ायब होना, फिर जबलपुर में पाया जाना, उनकी टी-शर्ट, और अमेरिका में सम्मान, तो कभी झा जी की टंकी, कभी दाराल साहेब का दराल्नामा, कभी पाबला जी का वो मेरी खिड़की से झांकना, कभी ललित जी की मूंछें, कभी वाणी और मैं एक हैं इसपर शक, कभी गिरिजेश जी की वर्तनी सुधार, कभी संगीता जी का ज्योतिष और कभी फुरसतिया जी के लेखन की तारीफ,  मतलब ये कि बस अविरल ब्लॉग  धारा बहती रही....इतनी कि याद ही नहीं रहा मेहमानों  के आने का समय भी हो गया था, और हमें अपना साज सामान भी लगाना था...महफ़िल जो थी रात की ...खैर सबकुछ समय से हो गया और  शाम-ए-महफ़िल सज गयी, 


मुझे और संतोष जी को तो गाना ही था,  समीर जी ने अपनी कविता स-स्वर सुनाई,  कविता तो बहुत-बहुत अच्छी थी... और  सुर..!!  ठीके-ठाक है.....सुर में थोड़ी बहुत टंकण त्रुटि हैं.....लेकिन झेलनीय है ....सो झेल लिए खुदा भी आसमान में जब सुनता होगा, तो अब ख़ुश होके सुन लेता होगा.....  :)
साधना जी ने भी समीर जी की कविता सुर के साथ सुनाई....जिसे सबने दिल खोल कर पसंद किया...बहुत ही सुन्दर गाया साधना जी ने....ये तो उस कविता कि खुशकिस्मती कहेंगे कि उसे साधना जी का स्वर मिला...वर्ना...आप समझ ही रहे होंगे मैं क्या कहना चाहती हूँ ...:)  

मैंने भी अपनी कवितायेँ सुनाई...जब मैं सुना रही थी और लोग वाह-वाह कर रहे थे...तब कहीं किसी को कुछ हो रहा था, लेकिन मैंने ध्यान नहीं देना ही उचित समझा ...:)  अब ऐसा है कि मेरे साथ ये होता ही रहता है....हाँ नहीं तो...!!
ये महफ़िल रात २ बजे तक चली...
और हम रात ३ बजे के करीब बिस्तर के हवाले हुए...
 
सुबह जब उठ कर नहा-धो कर मैं नीचे पहुंची तो देखती हूँ कि  ब्लॉग टाइकून हरी मिर्च काट रहे है....मैं उनका यह रूप देख फट से वहीँ नत-मस्तक हो गयी...  सर्वश्रेष्ठ ब्लाग्गर आभा मंडल अपने चारों ओर  लिए हुए और करछुल भांजते हुए जो उन्होंने लेमन चवाल बनाया ...उसके लिए सारे उपमा-उपमेय तेल लेने चले गए....अगर ये लेमन चावल पोस्ट हो जाती तो निःसंदेह २०० टिप्पणियों  और २०-३० चटकों  के साथ टॉप पर आ ही जाती...हम उस वक्त चटके नहीं लगा पाए लेकिन चटखारे तो लगा  ही आये....आहा आहा ...

हम तो बस ये रूप देखते जाते और सारे गुर अंटी में बाँधते जाते थे...कि क्या पता कौन सा नुस्खा ब्लॉग्गिंग में कब काम आ जाए....
 
फिर ब्लॉग गोड फादर विराजमान हुए अपने सिंहासन पर ...और उसी मुस्तैदी से जिस मुस्तैदी से ऊ करछुल भाँज  रहे थे अब माउस भांजने लगे....हमने BUZZ की बात की,  हिंदी के विकास के लिए अपने resources मिलाने की बात की, न जाने कितने आइदिआस पर बातें होती रहीं समीरजी और संतोष जी के बीच ....और ये वादा लिया-दिया गया कि आगे भी इन बातों पर अमल किया जाएगा... कुछ करना ही होगा, जो सार्थक होगा...
 
लगे हाथों समीर जी के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेर की बात भी खुल कर सामने आ गयी...हम दांतों तले ऊँगली दबाने ही लगे थे ...कि वो खुशनसीब छम से सामने ही आ गयी....देखा तो श्याम वरण, चपल-चंचल, बड़ी-बड़ी आँखों वाली  गिलहरी थी जिससे समीर जी रोज आँख मटका  किया करते हैं...और मूंगफली बतौर पटाने के लिए दिया करते हैं...साधना जी ने बताया कि आज कल उन दोनों 
में नहीं बन रही है....बने कि न बने हमरे दिल में काहे को साँप लोटेगा भला...!!
थोड़ी देर में हमने brunch किया और वो ही कहावत चरितार्थ करते हुए वहां से ओट्टावा के लिए रवानगी की  राय ले लिए....गंजेड़ी यार किसके खाए पिए खिसके....
 
घर आकर सोच रही हूँ....साधना जी और समीर जी से क्या सचमुच हम पहली बार मिले...ऐसा तो कुछ भी नहीं था जो पहली बार मिलने में होता है, अगर कुछ था तो बस ढेर सारा अपनापन,  छटका भर-भर सम्मान और अंचरा भर-भर प्यार...

समीर लाल...सचमुच....ठंडी हवा का झोंका....हाँ नहीं तो...!!!

Monday, April 5, 2010

वो दीया ...

वो दीया....

स्याह रात में
हर ज़र्रे की
स्याह कहानी है
उम्मीद का इक
दीया तो जलाओ
रंग उभर आएगा
और ये अँधेरा
छंट जायेगा...!!

ख्वाब...
हर दिन एक ख़्वाब
मेरी आँखों में
उठ खड़ा होता है
जिसे मैं बड़ी बेरहमी से
हकीक़त की दीवार में
चुन देती हूँ !

Saturday, April 3, 2010

प्रिय तू प्रथम प्रीत सा........गीत सुनिए......तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे ...


वो..!
शुद्ध भाव, प्रबुद्ध शैली,
बोली बोले मीत सा..
 

मै..!
अधर अक्षम, भाव जर्जर,
गीत मेरा अगीत सा,
वाणी मेरी क्षीण सी,
अश्रु कोटर रीत सा,
देह मेरी सकुचा गई, 

मन मगर विस्तृत सा,
झुक गई गर्दन हमारी,
झुक गए हैं नयन दोउ,
कृतज्ञं हूँ, ज्ञापन करूँ, 

मेरी अर्चना संगीत सी,
सानिध्य तेरा स्वर्ग सा,
हार, जीत प्रतीत सा,
दृग मेरे पथ जोहते हैं,
प्रिय तू प्रथम प्रीत सा..!

तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे ...
ये गीत सुनिए...आवाज़....'अदा' और संतोष जी..

Thursday, April 1, 2010

अल्लाह इस नामुराद को जन्नत बक्शे.....



तुम कितनी  
खूबसूरत हो 
ये कोई उनके 
दिल से पूछे
सबके दिलों में
बसने वाली
सबकी धडकनों
में रहने वाली
हर दिल में
तुम्हारी ही चाहत
करवटें ले
रही है
सभी दीवाने हुए 
जाते हैं
सबके दिल 
हर पल तुम्हारा 
ही नाम ले रहे हैं
आज कोई पूछ ही 
ले उनकी
धड़कनों से
हर कोई क्यूँ है
उसका 
दीवाना !!!
.
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.
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.
.
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न कोई करार
मांगता है
न बहार
मांगता है
जिसे देखो
ज़िन्दगी के बदले
बस उसका
प्यार मांगता है
.
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.
लेकिन
एक हादसे में 
वो जब चली गई,
दीवाने 
कितने दीवाने 
हो गए 
उसे पाने के लिए 
होश तक 
गवाँ बैठे 
लेकिन 
जो चला जाता 
वो क्या 
कभी लौट कर 
आया है ???

वो चली तो 
गई 
लेकिन 
उसके दीवानों
की हालत मुझसे 
देखी नहीं गई 
दिल पर पत्थर 
रख कर 
मैं 
ये मंजर लाई हूँ 
या ख़ुदा मुझे 
माफ़ कर 
मेरे गुनाह 
साफ़ कर
आइये 
बताएं आपको
उसके आशिक
कितने परेशान
हैं !!
उनका दिल 
इस खूबसूरत
नाजनीन की
याद में कितना 
ज़ार-ज़ार
रो रहा  है ...
आपसे 
दरख्वास्त है
बस दो 
मिनट के 
मौन का 
आमीन...!!!
.
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ज़रा नीचे जाइए 
इस खूबसूरत 
बाला (बला)
के दर्शन 
कर आइये 
अल्लाह इस
नामुराद को
जन्नत बक्शे.....
:):)