सोचा न था के तू इस क़दर बदल जाएगा
अब के जो गया है तो लौट कर न आएगा
परवाज़ लौट आये पर इनका क्या भरोसा
कब तक ये रुकेंगे अब मौसम ही बताएगा
मेरे घर में रह रही है बेघरी कई दिनों से
जाए के अब रहे ये पर तमाशा तो हो जाएगा
सुलझे हुए दिखे हैं उलझे हुए से बन्दे
कब तक ये रुकेंगे अब मौसम ही बताएगा
मेरे घर में रह रही है बेघरी कई दिनों से
जाए के अब रहे ये पर तमाशा तो हो जाएगा
सुलझे हुए दिखे हैं उलझे हुए से बन्दे
उलझे हुओं की सुलझन में तू उलझ जाएगा
सागर की प्यास का तुम्हें इल्म ही कहाँ है
कभी अश्क पी के देखो सब पता चल जाएगा
कभी अश्क पी के देखो सब पता चल जाएगा
बस तंज कस दिया न सोचा फिर पलट के
हर्फों की तल्ख़ तासीर से इंसा बदल जाएगा

