जब भी मेरी गोद में
मेरा शिशु होता है
तुम नगण्य हो जाते हो
कहाँ नज़र आते हो तुम मुझे ??
मेरी गोद धरा बन जाती है
और पूरी सृष्टि उसमें समाती है
मत बुलाया करो मुझे
अर्थपूर्ण आँखों से
यह विनय नहीं
आदेश है
मैं अपनी सृष्टि के
यथार्थ में
तुम्हारा प्रतिबिम्ब देख सकती हूँ
लेकिन तुम्हें नहीं
तुम्हें भी मेरी आँखों में
वही दिखेगा
मेरा शिशु
मैं माँ हूँ ना ...!!