Showing posts with label वफ़ा की देगची. Show all posts
Showing posts with label वफ़ा की देगची. Show all posts

Sunday, August 11, 2013

सोचते रहते हैं हम ...!

ज़िन्दगी कैसे बसर हो, सोचते रहते हैं हम 
परेशानी कुछ कमतर हो, सोचते रहते हैं हम 

मीलों बिछी तन्हाई, जो करवट लिए हुए है 
ख़त्म अब ये सफ़र हो, सोचते रहते हैं हम 

गुम गया है वो कहीं या उसने भुला दिया है 
बस उसको मेरी खबर हो, सोचते रहते हैं हम 


वफ़ा की देगची में, हज़ारों इंतज़ार उबल रहे हैं 
अब यहीं मेरा गुज़र हो, सोचते रहते हैं हम

तेरी ऊँचाइयों तक, मेरे हाथ कहाँ पहुंचेंगे 
बस तुझपर मेरी नज़र हो, सोचते रहते हैं हम 

मत कर शुरू नई कहानी ''अदा', रहने दे वर्क पुराने 
तू लौटा अपने घर हो, सोचते रहते हैं हम