
हिम्मत के
दरवाज़े पर
टंगी
उम्मीद की
पोटली
इंतज़ार की साँकल से
बार-बार टकराती है !
यकीन को
थपथपाती है !
खवाब..
ख्यालों की
कुण्डी खोल कर
अन्दर आ गए हैं
आंखों की सूखी नदी
जाग गयी
अब तय है कि
तूफ़ान बा-दस्तूर
आएगा
मेरे सपने
या डूबेंगे
या फिर किनारे
लग जायेंगे
देखते हैं क्या
होता है
नज़र न लग जाए
इसलिए खामोशी का
एक ढीठौना
तो लगा दिया है मैंने....