
तुम्हारी नज़र में नज़र हम न आयें
के खुद को नज़र से बचा कर चले
चले जायेंगे जहाँ से तो इक दिन
दिलों में इक घर बसा कर चले
मिटा दे हमारी वो यादें तेरे दिल से
खुदा से बस इतनी दुआ कर चले
सजाना न तुम मेरी तस्वीर कोई
हम अक्स अपने सारे जला कर चले
भला सा इक वक्त संग तेरे गुज़ारा
इन बातों से दिल बहला कर चले
ऐसे थे वैसे थे जैसे भी थे 'अदा'
मानोगे हम दुनिया हिला कर चले