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Wednesday, July 25, 2012

वर्ना तुम अपना रास्ता नापो....!

मैं...! 
एक लड़की हूँ, तो क्या हुआ ??
माना... मैं, किसी की बेटी हूँ, किसी की बहन हूँ । कल मैं किसी की पत्नी बनूँगी, बहु बनूँगी, माँ बनूँगी। मुझे ये सब बनने से कोई इनकार नहीं । लेकिन ये मत भूलो, कुछ भी बनने से पहले, मैं एक इंसान हूँ । मेरे अपने कुछ लक्ष्य हैं, मेरी अपनी कुछ इच्छाएँ हैं, मेरे अपने कुछ सपने हैं, जो सिर्फ और सिर्फ मेरे हैं । और मेरा जीवन सिर्फ मेरा है। हाँ, तुम उसमें शामिल हो सकते हो । तुम्हारे साथ-साथ कुछ और भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन मेरा जीवन, मेरा ही रहेगा ।

मुझे बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बनना है, जिनको पूरा करना ही मेरे जीवन का लक्ष्य हैं । ये मुझसे उम्मीद मत करना, कि इनको तिलांजलि देकर, मैं सिर्फ, तुम्हारे घर की बहु, तुम्हारी पत्नी और तुम्हारे बच्चों की माँ बन जाऊँगी । ये सारी भूमिकाएं मैं निभा जाऊँगी, लेकिन मेरी अपनी भूमिका, मैं नहीं भुलाऊँगी । मुझे मेरा अपना वज़ूद, दुनिया में बनाना है, मुझे मेरे अपने लक्ष्य को पाना है और मेरे अपने सपनों को सजाना है । 

इनको पाने से मुझे, कोई नहीं रोक सकता, तुम भी नहीं। मैं तुम्हारे सपनों को पूरा करने में, तुम्हारा साथ दूंगी, तुम भी मेरे सपनों से खिलवाड़ नहीं करोगे। अगर तुम्हें ये मंजूर है, तो मैं तुम्हारे संग जीवन भर चलने को तैयार हूँ , वर्ना तुम अपना रास्ता नापो, और मैं अपना ।