काव्य मंजूषा
Showing posts with label
जाने क्या है ये
.
Show all posts
Showing posts with label
जाने क्या है ये
.
Show all posts
Saturday, March 27, 2010
जाने क्या है ये.....
जाने क्या है ये !
मुझे सताने का मंसूबा
या तुम्हारी जीतने की जिद्द,
जो सारे दरवाज़े
बंद कर देते हो
छोड़ देते हो मुझे
अकेला...!
छोटी सी नाव में
बिन पतवार ;
बीच समुन्दर
में
,
और तब
कोई रास्ता नहीं रह जाता !
सिवाय नाव पलट कर, डूब जाने के....
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)