नतीजा लगावट का जाने क्या निकले
मोहब्बत में वो आजमा कर चले
आँखे लगीं हीं रहीं थीं फिर दर पे
इक झूठी झलक दिखा कर चले
ख्यालों में उनके फना हो गए हम
दिलों पे वो बिजली गिरा कर चले
हमें तो है उनकी ही लागी लगन
वो आये और बस मुस्कुरा कर चले
'अदा' है मेरा तक्ख्ल्लुस सुनें
कोई शक हो तो बता कर चलें