फ़िज़ूल के न कोई भी सवाल कीजिये
कीजिये अजी कुछ तो कमाल कीजिये
देखिये बह गया सड़क पे लाल-लाल
कुछ सफ़े अब खून से भी लाल कीजिये कीजिये अजी कुछ तो कमाल कीजिये
देखिये बह गया सड़क पे लाल-लाल
क्यूँ छुपी हुई उम्मीद क्यूँ डरे हुए बदन
चीखती सी रूह है बवाल कीजिये
जग गई है हर गली जग गया वतन
बंद आखें खोलिए मशाल कीजिये
थामिए अब हाथ में बागडोर हुजूर
प्रान्तवाद को यहीं हलाल कीजिये
कोई 'राज' छू न पाए आस्तीन को
वो जहाँ खड़ा रहे भूचाल कीजिये
चुप न अब बैठिये कह रही 'अदा'
लेखनी को आज ही कुदाल कीजिये

