....आज....
सुनते हो..!!
मत हो जाना, तुम मौन,
अन्यथा
मन के भाव,
संचित होकर,
हृदय-भूगर्भ में
उमड़-घुमड़,
न जाने कितने
बंध-अनुबंध,
तोड़ना चाहेंगे ...
देखो ना !!
कितने बादल घिर आये हैं,
मन-आकाश में |
मन के भाव,
संचित होकर,
हृदय-भूगर्भ में
उमड़-घुमड़,
न जाने कितने
बंध-अनुबंध,
तोड़ना चाहेंगे ...
देखो ना !!
कितने बादल घिर आये हैं,
मन-आकाश में |
.....कल....
प्रतीक्षारत नयन,
मुखरित हो जायेंगे
भाव, झमा-झम बरसेंगे
छटेंगे बादल
संशय के,
पारदर्शी हो जायेंगी दिशायें,
हवाएँ सत्य की
हृदय को छूकर गुजरेंगीं
और
हो जाएगा ऋतु परिवर्तन
मेरे-तुम्हारे
भाव, झमा-झम बरसेंगे
छटेंगे बादल
संशय के,
पारदर्शी हो जायेंगी दिशायें,
हवाएँ सत्य की
हृदय को छूकर गुजरेंगीं
और
हो जाएगा ऋतु परिवर्तन
मेरे-तुम्हारे
मन में.....

