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Sunday, January 31, 2010

ऋतु परिवर्तन...


 ....आज....

सुनते हो..!!
मत हो जाना, तुम मौन,
अन्यथा
मन  के भाव,
संचित होकर,
हृदय-भूगर्भ में
उमड़-घुमड़,
न जाने कितने
बंध-अनुबंध,
तोड़ना चाहेंगे ...
देखो ना !!
कितने बादल घिर आये हैं,
मन-आकाश में |

.....कल....
प्रतीक्षारत नयन,
मुखरित हो जायेंगे 
भाव,  झमा-झम बरसेंगे
छटेंगे बादल
संशय के,
पारदर्शी हो जायेंगी दिशायें,
 
हवाएँ सत्य की
हृदय को छूकर गुजरेंगीं   

और
हो जाएगा ऋतु परिवर्तन 
मेरे-तुम्हारे 
मन में.....