
है मुझको भी तेरे इश्क की खबर
हम लिखने लगे ये फ़साना दिल से
छपते ही रहे तेरे बयाँ हर सू
अब पढने लगा है ज़माना दिल से
आँखों में पड़े तो थे कोहरे कई
तेरी उँगली से उनको हटाना दिल से
तुम कहते रहे कुछ कही अनकही
और मेरा वो सबकुछ सुन जाना दिल से
मैं ख्वाबों के रेत में धँसती गई
मुझे बाहों में भर कर उठाना दिल से
मुझे मुजस्सिम हकीक़त का तुमने कहा
फिर हमको छुपाकर बसाना दिल से
अब तुझको पहन कर हम इतराते हैं
फिर सामने बिठा कर बतियाना दिल से
कभी तक़रीर में तेरी मेरा हो जिक्र
फिर मेरा वो डरना शर्माना दिल से
अब नए तो नज़र आते हैं हम सबको
पर हैं शख्स वही हम पुराना दिल से