लोग सताए हुए हैं
मत उलझो इनसे
कुछ भी कर जायेंगे
प्यार की आदत नहीं इनको
इतना दोगे तो मर जायेंगे
खोल चढ़े हुए चेहरों में अमावस की रात है जिसको देखते ही
सच्चाई की नदी उतर जाती है
फिर चाहो कि न चाहो
नकाबों के हाथों एक बार फिर इंसानियत मर जाती है ....
मत उलझो इनसे
कुछ भी कर जायेंगे
प्यार की आदत नहीं इनको
इतना दोगे तो मर जायेंगे
खोल चढ़े हुए चेहरों में अमावस की रात है जिसको देखते ही
सच्चाई की नदी उतर जाती है
फिर चाहो कि न चाहो
नकाबों के हाथों एक बार फिर इंसानियत मर जाती है ....
