रचना जी के ब्लॉग 'नारी' पर 'वुमन एनाटोमी से वुमन ऑटोनोमी तक का सफ़र' में नारी के अबार्शन के अधिकार की बात पढ़ी। वहाँ नैतिकता पर भी चर्चा हुई। यह प्रश्न इतना सरल भी नहीं है, जिसका जवाब सीधे-सीधे हाँ या ना में दिया जाए। जीवन बहुत जटिल है और इसमें ऐसी बातें भी हो जातीं हैं, जो नैतिकता पर भारी पड़ जातीं हैं। मेरी इस पोस्ट का आशय ये समझना है कि आखिर इस मामले में हमारी नैतिक जिम्मेदारी क्या है ??? हम उसे कैसे निर्धारित करेंगे ???
मेरी ही नौकरानी ने अभी हाल में अबोर्शन करवाया है। उसके लिए कारण साफ़ था, आर्थिक विवशता। वह एक और बच्चे का भार, चाह कर भी वहन नहीं कर सकती थी। लिहाज़ा उसने अबोर्शन करवा लिया। यहाँ उसकी नैतिक जिम्मेदारी कुछ और निकल आई। उसे मालूम था, वह अपने उस बच्चे को, न कोई भविष्य, न वो सब नहीं दे सकती, जो एक माँ होने के नाते, उसे देना चाहिए। इसलिए उसने बच्चे को संसार में नहीं लाना, अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझी। ये अलग बात है कि उसे इस परिस्थिति में ही नहीं आना चाहिए था, लेकिन भूल हो ही जाती है। इसका अर्थ यह नहीं कि अपनी उस भूल के लिए, सारी उम्र, खुद भी भुगते और अपने बच्चे/बच्चों को भी भुगतने दे।
एक अलग तरह स्थिति एक और माँ के साथ हुई। जहाँ इस माँ ने भी, अपने अधिकार का प्रयोग किया और अपने तरह से अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझी, फलत: अबोर्शन करवा लिया।
केस कुछ ऐसा था ...
माँ बिलकुल स्वस्थ थी, और बच्चा भी जिंदा था, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा एब्नार्मल है। अब आप बताईये, ऐसी हालत में नैतिक जिम्मेदारी क्या होती है ?? क्या बच्चे को जन्म देना चाहिए था ?? यह अबोर्शन नैतिकता की कसौटी पर कैसे आँका जाएगा ???
एक और केस लेते हैं, अगर कोई अविवाहिता, अपनी मूर्खता से या किसी के झांसे में आकर या जान बूझ कर ही, किसी ऐसे इंसान से सम्बन्ध बना ले, जो उसके लिए सही नहीं है। उसकी इस हरक़त से परिवार वालों को भी तकलीफ हो रही है। कोई उसके साथ नहीं है। तो क्या फिर भी उसे उस तथाकथित 'नाजायज़ ' बच्चे को जन्म देना चाहिए ?? क्या यह उस बच्चे के साथ भी अन्याय नहीं है ?? क्या अपनी इस भूल के लिए उस लड़की को और उस बच्चे को उम्र भर, भोगना ज़रूरी है ??
इस हालत में नैतिकता कैसे काम करेगी ???
एक और केस लेते हैं, अगर कोई अविवाहिता, अपनी मूर्खता से या किसी के झांसे में आकर या जान बूझ कर ही, किसी ऐसे इंसान से सम्बन्ध बना ले, जो उसके लिए सही नहीं है। उसकी इस हरक़त से परिवार वालों को भी तकलीफ हो रही है। कोई उसके साथ नहीं है। तो क्या फिर भी उसे उस तथाकथित 'नाजायज़ ' बच्चे को जन्म देना चाहिए ?? क्या यह उस बच्चे के साथ भी अन्याय नहीं है ?? क्या अपनी इस भूल के लिए उस लड़की को और उस बच्चे को उम्र भर, भोगना ज़रूरी है ??
इस हालत में नैतिकता कैसे काम करेगी ???