Thursday, April 22, 2010

कल ब्लॉग वाणी से लगभग एक घंटे मेरी बात-चीत हुई है...

कल ब्लॉग वाणी से लगभग एक घंटे फ़ोन से मेरी  बात-चीत हुई है...ब्लॉग जगत की समस्या को धैर्य पूर्वक सुना गया और सहयोग का पूरा आश्वासन मिला है....अब किसी भी तरह की कोई बेहूदगी बर्दाश्त नहीं की जायेगी...सभी ब्लोग्गेर्स से अनुरोध है कृपया निम्नलिखित बातों पर गौर करें:
  • किसी भी तरह के  व्यक्तिगत आक्षेप से बचें ...बर्दाश्त नहीं किया जाएगा...
  • संवेदनशील विषयों पर जैसे धर्म, नारी, पुरुष इत्यादि पर बात-चीत गरिमा के अन्दर रह कर की जाए...अगर ऐसा नहीं हुआ..तो class action lawsuits के लिए तैयार हो जाइए...
  • कोई धर्म-बड़ा छोटा नहीं है, एक धर्म को दूसरे धर्म से ऊँचा दिखाने की कोशिश में किसी की भी भावनाओं से अगर खेला गया तो class action lawsuits किया जाएगा
  • किसी ने भी फर्जी ID का प्रयोग कर के किसी की भी भावनाओं से खिलवाड़ करने की कोशिश की तो, ब्लॉग वाणी ने मुझसे वादा किया है कि वो उस नाम का पर्दा-फाश करेंगे....अगर किसी को कहीं भी ऐसी बात नज़र आती हैं...तुरंत मुझे सूचित कीजिये kavya.manjusha@gmail.com पर जल्द से जल्द....उस व्यक्ति का नाम, ब्लॉग का पता तस्वीर सहित छापा जाएगा....एक बात और स्पष्ट करना है फर्जी ID से कमेन्ट करना साइबर क्राइम के तहत आता है , और इसकी सज़ा भी है,  पकडे जाने पर सारी जानकारी अधिकारियों को दी जायेगी....इस लिए सोच समझ कर कदम उठाया जाए..
जहाँ तक हो सके आपसी प्रेम बनाये रखिये, एक दूसरे कि संस्कृतियों को हम और अच्छी तरह समझने की कोशिश करें, एक दूसरे के धर्मों का आदर करें, उनकी अच्छाइयों को अपनाने की कोशिश करें और अपनी बुराइयों को सुधारने की....
विश्वास कीजिये हम एक स्वस्थ समाज की रचना कर सकते हैं....यह बिल्कुल संभव है...बस ज़रुरत है थोड़ी सहन-शक्ति, धैर्य और क्षमा की....
आज और अभी से शुरू कीजिये ...सब ठीक हो जाएगा...
सच में....

54 comments:

  1. बिल्कुल सही, कानूनी कार्यवाही होनी ही चाहिये ऐसे तत्वों के खिलाफ़

    ReplyDelete
  2. यह लोग दस फीसद हैं, लेकिन सारा ध्यान इन पर लगाया जा रहा है क्यों? किस लिए? समीर जी ने पिछले दिनों एक शानदार पोस्ट लिखी थी, इस विषय पर। किसी की टिप्पणी से अगर लेखक आहत हो रहा है तो शायद कोई भीतर कमी है, वो परिपक्व नहीं है। किसी भी प्रतिक्रिया को प्रतिक्रिया के रूप में लेना चाहिए, निजी तौर पर नहीं। टेंशन देने की चीज है, लेने की नहीं।

    ReplyDelete
  3. हैप्पी,
    यह टेंशन देने लेने की बात नहीं यह...फर्जी ID से कमेन्ट करना कानूनन जुर्म है ..यह साइबर क्राइम है....और क्राइम को बढ़ावा देना या नज़र अंदाज़ करना भी क्राइम है...

    ReplyDelete
  4. अदाजी, आप ने जो भी किया वह सराहनीय है ! बहुत कम लोग हैं जो आप जितने जुझारू, नेकदिल और इंसाफपसंद हैं ! आपकी इस कोशिश के लिए मेरे दिल में आपके लिए इज्ज़त बढ़ गयी है !

    ReplyDelete
  5. अदा जी,
    आप की सभी बातों और बिन्दुओं से सहमत हूँ। हिन्दी ब्लागीरी को सामुहिक रूप से मेरी सेवाओं की आवश्यकता हो तो मैं सहर्ष उपलब्ध हूँ।

    ReplyDelete
  6. दिनेश जी,
    आप नहीं जानते आपने मुझे कितनी बड़ी मुश्किल से निकाल दिया...मैं कल से आपसे बात करना चाहती थी लेकिन संकोचवश नहीं कर पायी...
    अब कोई नहीं रोक सकता हमलोगों को...आप जब साथ हैं तो फिर क्या बात है...
    आपका बहुत आभार..
    हाँ नहीं तो...!!

    ReplyDelete
  7. सबके हक की रक्षा के लिये उठाये इस कदम की जितनी तारीफ़ की जाये कम है .....
    आप ने जो किया वह एवम ब्लागवाणी का वादा दौनो ही माईल-स्टोन हैं
    दौनो का आभार

    ReplyDelete
  8. अदा बहन
    बिलकुल सही कहा आपने।
    आभार

    ReplyDelete
  9. अदा बहनजी ,
    बहुते बढ़िया कार्य कर रही हैं आप ...बहुते आभार ...

    मगर ..तनी ई हो बता दिया जाए की रऊर शिकयत कहाँ करे के पडी ...एक ठो क्राईम रिपोर्ट लिखवाए के कहाँ जाये के पड़ी...के सुनिहे हमरी ..औरी लोगन की शिकायत ...:):):):)

    ReplyDelete
  10. आपने अच्‍छा किया आपने बातचीत में विमर्श किए गए मुद्दों को सार्वजनिक कर दिया। परसों माननीय मैथिलीजी से मेरी भी इस बाबत चर्चा हुई थी। यह हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के स्‍वस्‍थ विकास की ओर बढ़ता जोरदार कदम है।

    ReplyDelete
  11. कोर्ट कचहरी से बहुत डरता हूँ। टिप्पणी करना बहुत कम करना होगा। क्या पता कौन सी बात किसे बुरी लग जाय !
    :(

    ReplyDelete
  12. जी दी सहमत हूँ ,साथ हूँ .............., आप ही का सिपाही हूँ ................ मुझे आप अपने तरकश में तीर की भांति संभालकर पटक दीजिये फिर जिधर चलाना चाहे चला दीजिये ,,,,,,,,,,.........पर अंततः मैं इन बेवकूफ बदतमीज़ लोगो पर अपेक्षाकृत अधिक समय नष्ट नहीं करने के पक्ष मैं हूँ .............बाकी आप तो बड़ी हैं आदरणीय हैं .........आदेश का पालन होगा ..........आमीन

    ReplyDelete
  13. बिल्कुल सही, कानूनी कार्यवाही होनी ही चाहिये |

    ReplyDelete
  14. Great move !

    Congrats !

    Haan nahi toooooo....

    Smiles !

    ReplyDelete
  15. This post is the good lesson for pests !

    ReplyDelete
  16. बस कुछ लोगों को समझना है इस बात को...सार्थक लिखो ये मज़हब और विवादित लिखने में क्या रखा है...लोग पढ़े तो कुछ मिले ...एक नेक उद्देश्य होना चाहिए ब्लॉगिंग का...अदा जी बहुत सही बात कही आपने आज कल लोग ऐसे लिखने लगे की ब्लॉगवानी पर आने का भी मन नही करता....यह बदलने की ज़रूरत है....अच्छा लिखो और अच्छा पढ़ो...बढ़िया आलेख के लिए धन्यवाद अदा जी

    ReplyDelete
  17. हमारी नेता कैसी हों, अदा जी जैसी हों...

    अदा जी आप संघर्ष करो, हम आप के साथ हैं...

    hats off to you !

    जय हिंद...

    ReplyDelete
  18. कुछ तो नियंत्रण ज़रूरी है।
    आपका प्रयास सराहनीय है अदा जी ।

    ReplyDelete
  19. सही है, प्रयास जारी रखें.

    फर्जी और छदम नामी में अन्तर बना रहे, यह जरुरी है.

    ReplyDelete
  20. bikul sahi .....is trah ki karwhai honi chaiye .....

    ReplyDelete
  21. अदा जी,मैं आपसे बिलकुल सहमत हूँ.मेरा मानना है कि दुसरे धर्मों के बारे में कुछ कहे बगैर भी अपने धर्म की बात कही जा सकती है.मेरे इस नए ब्लॉग पर अवश्य पधारें.
    satya-islam.blogspot.com

    ReplyDelete
  22. इस सराहनीय कार्य के लिये आपको साधुवाद!

    ReplyDelete
  23. अदा जी !
    आपने रचनात्मक कदम उठाया है!
    आपकी इस पहल की मैं सराहना करता हूँ!

    ReplyDelete
  24. अदा जी ,
    सिर्फ़ इतना कहने आया था कि ,
    work in porgress

    बाकी अभी ज्यादा कहना ठीक नहीं है , शुभकामनाएं ।

    ReplyDelete
  25. अच्छा है अब सुर्पणखा और मामा मारीच से पीछा छूटेगा.

    रामराम.

    ReplyDelete
  26. अदा जी, मैं आपके इस कदम से बहुत प्रभावित हूँ. इससे पहले आपने एक और केस में इसी तरह बीचबचाव किया था, नारी मुद्दे पर ही. इस बार भी आपने सबका ध्यान ब्लॉग जगत में मजहब के नाम पर नफ़रत फैलाने वालों और फ़र्ज़ी टिप्पणी करके एक महिला का अपमान करने वालों की ओर आकृष्ट किया है. मैं भी आपको खुशदीप भाई का समर्थन करते हुये "लीडर ऑफ़ हिन्दी ब्लॉगिंग" मानती हूँ.

    ReplyDelete
  27. सादर नमस्कार!
    हम आपके इस प्रयास की सराहना करते है |
    रत्नेश त्रिपाठी

    ReplyDelete
  28. अदा जी जब आप लिखती है आपमे पढ़ने की भी हिम्मत होनी चाहिए आपको लिखते-2 कितने दिन हो गये लेकिन आप मे सुनने की ताक़त नही आई किसी को बुरा कहने के हम भी विरोधी है लेकिन ये सब क्यो हो रहा है आपने सोचा?

    ReplyDelete
  29. साइबर क्राइम के उन नियमों थोडा सा जिक्र हो जाता तो बहुत अच्छा होता...

    ReplyDelete
  30. ;)

    aDaDi,
    बूझो तो मैं कौन? (No marks for guessing)
    ब्लॉग्गिंग- साइबर क्राइम का पहला अपराधी....

    ReplyDelete
  31. hum bhi aapke is pryas se prabhavit hue
    aapka ye pryas sarahniy hai

    ReplyDelete
  32. सराहनीय प्रयास

    ReplyDelete
  33. आपसे सहमत
    राष्ट्रवाद की नायिका फ़िरदौस ख़ान की बदौलत आज बहुत से 'लोग' सही मार्ग पार आ गए हैं.


    सबसे पहले अपनी बहन (फ़िरदौस ख़ान) के ख़िलाफ़ नीचता की हद तक गिरने वाले सलीम खान ने अपना मार्ग बदलते हुए सुधरने की कसम खा ली और लगे हाथ ब्लॉग पर एक लेख- 'स्वच्छ संदेश' अब भारतीय मुस्लिम समाज की आवाज़ भी बनेगा लिखकर इसकी घोषणा भी कर डाली.


    अब एजाज़ अहमद इदरीसी भी सुधरने की बात कर रहे हैं.
    उन्होंने भी पोस्ट लिखकर सुधरने का दावा किया है.
    उनका कहना है-
    मुझे किसी ब्लॉगर ने बहकाया था; ब्लोगिंग की अहमियत मैंने अब पहचानी है; मैं अब स्वस्थ ब्लोगिंग ही करूँगा: EJAZ AHMAD


    इस लेख से साफ़ पता चलता है कि फ़िरदौस जी की राष्ट्रवादिता की आवाज़ को दबाने के लिए यह घृणित षड्यंत्र रचा गया था. क्या ये सब सुधर गए हैं? अगर सुधर गए हैं तो क्या इन्होंने अपनी बहन फ़िरदौस से माफ़ी मांगी है?
    इसके पीछे कौन है? सभी जानते हैं.
    ऐसा तो केवल तिलाबानी मानसिकता के लोग ही कर सकते हैं, कोई भारतीय नहीं.






    कहीं ऐसा तो नहीं- नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली.
    आश्चर्य की बात है कि अपनी बेशर्मी के लिए सलीम भाई और उनकी चंडाल चौकड़ी ने अपनी बहन से क्षमा तक नहीं मांगी.
    इसी चंडाल चौकड़ी के Dr. Ayaz ahmad , EJAZ AHMAD IDREESI, zeashan zaidi, Aslam Qasmi ने जगह-जगह जाकर घृणित कमेन्ट किए, जो इनके ब्लोगों पर देखे जा सकते हैं.


    जिसे बहन कहते हैं, उसी के विरुद्ध घृणित कमेन्ट करते हैं. जिसके ऐसे भाई हों उसे दुश्मनों की क्या ज़रूरत है?


    इन लोगों ने अपनी बहन के ख़िलाफ़ जो शर्मनाक कमेन्ट लिखे हैं, क्या ये उसे डिलीट करेंगे?

    ReplyDelete
  34. बिल्कुल सही, बहुत बहुत शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  35. क्या पता है कब किसी को क्या बुरा लग जाय क्यों
    कौन कब पूछे दुनाली तानकर - अच्छा लगा?

    @गिरिजेश राव
    अब ब्लॉग जगत का वाकई भला होगा लगता है, डण्डे के ज़ोर पर ही सही। लोग टिप्पणी की जगह ब्लॉग पर लिखेंगे।

    ReplyDelete
  36. और चिढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए कोई कानून है या नहीं?
    या चिढ़ भी व्यक्तिगत कमज़ोरी ही मान ली जाए!

    ReplyDelete
  37. @कहत कबीरा ----
    मैंने कोई घृणित टिपण्णी कहाँ की है, क्या आप बताने का कष्ट करेंगे/करेंगी ?

    ReplyDelete
  38. बड़ी फुर्ती दिखाई आपने! :-)

    बहरहाल, हम साथ साथ हैं

    ReplyDelete
  39. किसी ने भी फर्जी ID का प्रयोग कर के किसी की भी भावनाओं से खिलवाड़ करने की कोशिश की तो, ब्लॉग वाणी ने मुझसे वादा किया है कि वो उस नाम का पर्दा-फाश करेंगे.
    यह हुयी ना बात, यह सही है. धन्यवाद

    ReplyDelete
  40. aadrniy blogvaani ki grimaa ke liyen chintaa chod den bs ab qaanoon ki baat kren kendr or raajy srkaaron pr apnaa shiknjaa ksen ke voh pulis kaa ek alg vibhaag is smbndh men bnaaye or khud dhund kr yaa shikaayt milne pr ese logon ko nyaayaalyon men chaalaan pesh kr dndit krvaae. akhtar khan akela kota rajasthan

    ReplyDelete
  41. ऎसा कदम उठाया जाना निहायत ही जरूरी था.....सहमत!

    ReplyDelete
  42. अदा जी ये आपका एक बहुत सराहनीय प्रयास है. आशा है अब कुछ सफाई होगी और कचरा (या कचरे सामान सोच वाले लोग) हतोसाहित होंगे. आभार..

    ReplyDelete
  43. सराहनीय प्रयास

    ReplyDelete
  44. सही प्रेरणा।आभार!

    ReplyDelete

  45. हमलोगों का अपना एक झँडा बैनर इत्यादि तो होना ही चाहिये,
    आप जुगाड़ लगायें, बकिया डँडा की जिम्मेवारी हमारी रहेगी ।

    ReplyDelete
  46. सही कदम पर क्या सिर्फ ब्लॉगवाणी तक सीमित है या दूसरे एग्रीगेटर भी लागू करेंगे ।

    ReplyDelete
  47. आपकी पहल रंग लाए, ऐसी आशा है।

    ReplyDelete
  48. @अख्तर साहब, आप भी वकील हैं और आपने सहायता का हाथ बढ़ाया है...बहुत ख़ुशी हुई है...आपलोगों का साथ रहा तो सब कुछ ठीक हो जाएगा ...आपको देख कर विशेष रूप से हौसला बढ़ा है...आपका आभार..

    ReplyDelete
  49. "नारद" के समय महसूस किया गया था कि प्रतिबन्ध से यह सब नहीं रुकेगा, सिर्फ सामाजिक बहिष्कार ही ऐसे लोगों को हतोत्साहित कर सकता है।

    एक समय जहाँ "नारद" था आज वहाँ "ब्लॉगवाणी" है। उस समय जो लोग नारद की आलोचना में लगे थे और ब्लॉगवाणी को नये मसीहा के रुप में पेश कर रहे थे, उम्मीद है वे आज नारद का दर्द समझ रहे होंगे।

    ReplyDelete