Saturday, April 21, 2012

मुझे पूरा शक़ है, कि हिंदी ब्लॉग जगत में भी, इस्लामिक संस्थाएं, इस्लाम के प्रचार के लिए हिंदी ब्लॉग्गिंग के कुछ ब्लोग्स को प्रायोजित कर रहीं हैं...

इस्लाम को हमेशा, शान्ति का धर्म बताने की चेष्टा की गयी है, लेकिन नज़र उठा कर और दिमाग पर जोर डाल कर, सोचें और देखें, तो इस्लाम के कुछ बड़े-बड़े अनुयायियों को, पूरा विश्व क्रूरता और आतंक का पर्याय ही मानता है, सोचती हूँ, उनके बारे में हिन्दुस्तान के आम मुसलमान क्या सोचते हैं ? मसलन सद्दाम हुसैन, ईदी अमीन, गद्दाफी, लुइस फराखान, यासर अराफात, दाऊद इब्राहिम, अबू निदाल, आदि, उनके अपराधों, आतंक और क्रूरता के बारे में, कुछ भी कहना लगभग असंभव है, आज विश्व इन्हें मानवता पर कलंक के नाम से ही याद करता है, दूसरी और कोई विशेषता तो इनमें थी नहीं... हैरानी की बात यह भी है कि इनके ज़ुल्म, इनके अपने लोगों पर भी कम नहीं रहा है...इन्होने पूरी दुनिया को हिंसा और हत्या से आतंकित कर दिया है/था, वैसे जहाँ भी मुसलमान शासक होता है, वहाँ एक आतंक का माहौल होता ही है, इस्लामिक देशों में भी अगर आप जाएँ, तो अजीब दहशत का माहौल मिलेगा आपको, चुप्पी तो मिलेगी लेकिन शान्ति नहीं...

भारत में भी, जहाँ मुस्लिम मोहल्ला होता है, आप वहाँ से सिर्फ गुज़र कर देखें, आपको पता चल जाएगा, ये इलाका मुस्लिमों का है, वहाँ की
गतिविधियाँ ही अलग होतीं हैं, एक तरह की बर्बरता वहाँ की हवा में ही होती है, एक अजीब सी सनसनी होती है वहाँ, और गन्दगी की तो बस पूछिए मत...इन बातों को अगर हम छोड़ भी दें तब भी, दुनिया के किसी भी कोने में, आप कोई भी एक अखबार उठा लीजिये और ध्यान दीजिये तो, आतंकवादी गतिविधियों में 98% मुसलमान शामिल हैं... आज कहीं भी बम फूटे तो, बस एक ही नाम ज़हन में आता है 'मुस्लिम आतंकवादी' । कनाडा में सिखों को उनकी पगड़ी की वजह से 'ओसामा बिन लादिन' बुलाया जाता है, क्योंकि यहाँ के लोगों के लिए पगड़ी तो सिर्फ पगड़ी है। सिखों  की पगड़ी और बिन लादिन की पगड़ी में वो फर्क नहीं कर पाते हैं।

आज हिन्दुस्तानी बच्चे, फ्लाईंग स्कूल ज्वाइन नहीं कर पाते, क्योंकि इनके नामाकूल आतंकवादियों ने रास्ता मुश्किल कर दिया। छोटे-छोटे हवाई जहाजों पर ट्रेनिंग लेकर इन्होंने, कितनी ही जगहों पर विषाक्त रसायन का छिडकाव किया। यहाँ की अमन-पसंद आवाम को मिटाने की कोशिश की। ऐसी ही ट्रेनिंग का सबब है 911 का हादसा। 18-25 साल के नवयुवकों को, ख़ास करके जो साउथ एशियन मूल के हैं, और जिनका रंग लगभग इन आतंकवादियों जैसा है, इनकी करनी का खामियाज़ा भुगतना पड़ता है । आज हर हवाई-अड्डा, हर ट्रेन स्टेशन पर हमारे घरों के यंग लड़कों को, शक की नज़र से देखा जाता है, उनको  रोका जाता है, उनकी हर तरह से तलाशी ली जाती है, क्योंकि इन कमज़र्फों ने अपनी औलादों को आतंकवादी बनाया हुआ है। और क्योंकि हमारे बच्चों का रंग इनके रंग से मेल खाता है, हमारे बच्चे भी गेंहूँ के साथ घुन के तरह, पिस जाते हैं।

धर्म के नाम पर कत्लेआम ये चंगेजखाँ के वंशज, आज से नहीं कर रहे हैं। भारत को मुसलमानों ने 7 वीं शताब्दी से ही आतंकित करना शुरू कर दिया था, इतिहास गवाह है, भारत भर में मुस्लिम शासनों ने अद्वितीय आतंक और अत्याचार का एक रिकार्ड कायम किया है और समकालीन मुस्लिम उसी रक्तपात को अब विस्तार दे रहे हैं, इनके घोर अत्याचार का, एक-एक सबब, इतिहास के पन्नों में दर्ज है, कैसे इन्होंने गैर मुसलमानों को निशाना बनाया, उनका धन लूटा, उनकी महिलाओं का अपहरण किया, उनके पूजा घरों को मस्जिदों और मकबरों में तब्दील किया, और तुर्रा ये कि ऐसा करना, मुसलामानों ने अपना पवित्र कर्तव्य माना है, ऐसे कृत्यों को करने वालों को 'ग़ाज़ी' का प्रतिष्ठित ख़िताब दिया गया है, जो उत्पीड़कों के लिए अर्जित, महान इस्लामी महिमा और महानता का एक प्रशस्ति पत्र माना जाता रहा ।

औरंगजेब, पिछले मुस्लिम सम्राटों में से एक ऐसा क्रूर शासक था, जो पूरे साल, हर रोज, 10,000 हिंदुओं की हत्या करता था, उसने अकेले ही कम से कम 3,650,000 हिंदुओं की हत्या की है और 11,000 से अधिक हिंदू मंदिरों के विनाश के लिए जिम्मेदार है...

मुसलामानों ने ही भारत के तीन टुकड़े कर दिए, और कश्मीर जैसे सुन्दर प्रदेश को नेस्तनाबूत करके रख दिया, आज भी पाकिस्तान जैसे इस्लामिक देश की अर्थव्यवस्था, प्रायोजित आतंवाद से ही चलती है...यह एक तरह का कुटीर उद्योग है पाकिस्तान का, आतंकवादियों की फसल उगाओ, उनसे हमला करवाओ, और फिर बड़े-बड़े देशों से पैसे ऐंठों, यह देश बस ऐसे ही पैसों से चल रहा है...शायद कुरआन ने उन्हें यही सिखाया हो...

मुसलमान कहते हैं नशा हराम है, लेकिन अफगानिस्तान का चप्पा-चप्पा अफीम की ही खेती करता है, और तालेबान जो, इस्लाम का महान रक्षक है, सारे आतंकी हमले इन्हीं अफीमों की खेती के पैसों से ही करवाता है, मतलब यह कि इस्लाम के नाम पर आप, नशा भी कर सकते हैं, और नशे का व्यापार भी, और दूसरे के बच्चों को बर्बाद भी, यह पाप या गलत नहीं है...

इस्लाम में सूद लेना हराम है, लेकिन सारे इस्लामिक बैंक, जैसे हबीब बैंक, ये बैंक वो बैंक, यह काम कर रहे हैं, और यह जायज़ भी मान रहे हैं, तो अपने फायदे के लिए कुरआन को तोड़ने-मरोड़ने में कोई दिक्कत नहीं है, 

इस्लाम बिना रीढ़ की हड्डी का धर्म है, और कुरआन सारे गलत काम को सही बताने का कवच...सारे नहीं, लेकिन कुछ मुसलमान सारे गलत काम करते हैं, और उन गलत कामों को क़ुरान से जोड़ कर पवित्र कर देते हैं, जितने भी तस्कर पकडे जाते हैं, उनमें से ९८% मुसलमान होते हैं, मैं मारीशस में रहती थी, वहाँ के एयर पोर्ट में, ड्रग लाते हुए पकडे गए लोगों के नामों की एक लिस्ट लगी हुई है, ऊपर से नीचे तक के सारे-के-सारे नाम, मुस्लिम नाम हैं, ये वो हैं जो ५ वक्त का नमाज़ पढ़ते हैं और फिर निकल जाते हैं, ड्रग, सोने, हीरों की तस्करी करने, क्योंकि इनका क़ुरान, इस्लाम के नाम पर कुछ भी करने की आज्ञा देता है, फिर चाहे वो चोरी हो, तस्करी हो, ड्रग डीलिंग हो या फिर हत्या हो...सच पूछा जाय तो इस्लाम से कम्फर्टेबल, कोई धर्म नहीं, इसके अनुयायी कोई भी पाप, कभी भी, और कैसे भी कर सकते हैं, बस उसे धर्म से जोड़ कर आप आराम से बच सकते हैं...इतना ही नहीं आपको उस दुष्कर्म के लिए पुरस्कार भी दिया जाएगा..

मुझे तो इस बात पर भी हैरानी होती है कि, आखिर मुग़ल शासकों को इतिहास में इतना तवज्जों क्यों दिया गया है ?? जब कि, इनमें से कोई भी हिन्दुस्तानी नहीं था, न अकबर, न बाबर, न हुमायूँ । ये सारे के सारे लुटेरे थे, जिन्होंने हमारे देश में आकर, हमारी आवाम को जी भर के लूटा है। फिर भी अकबर महान है ??? वो कैसे ???? भारतीय सरकार ने महाराणा प्रताप, शिवाजी को इतिहास में वो स्थान क्यों नहीं दिया, जबकि वो अपना देश इन लुटेरों के बचाने के लिए लड़ रहे थे, और ये लुटेरे विदेशी थे। ऐसा उल्टा इतिहास भारत में ही संभव है। मेरे ख़याल से इस बात के लिए एक मुहीम चलनी ही चाहिए। इन सारे तुर्कों को भारत के इतिहास के पन्नों से निकाल फेंकना चाहिए और भारत का सही इतिहास लिखा जाना चाहिए।

पढ़ती रहती हूँ, इस्लाम का विस्तार हो रहा है...क्यों नहीं होगा भला, ये सबसे आराम का धर्म है, इस धर्म में पाप, या बुराई से दूर रहने, जैसा कोई बंधन नहीं है, हर वो काम जिसकी मनाही दूसरे धर्मों में है, इस धर्म में उसकी पूरी छूट है, किसी को भी आप मार सकते हैं, क्योंकि और कोई कमी सामने वाले में हो कि न हो, मुसलमान नहीं होने की सबसे बड़ी कमी तो है ही, उस नीरीह में, फिर कुरान कहता ही है, जो मुसलमान नहीं है, वो काफ़िर है और इस्लाम की भलाई के लिए आप उसे मार सकते हैं...अब अगर जवान लड़कों को, धर्म के नाम पर लड़कियों को पटाने का काम दिया जाए, लड़की अगर न पटे तो अपहरण करने का, उससे ज़बरदस्ती शादी करने का, उसका धर्म परिवर्तन करवाने का, और फिर उनके साथ बलात्कार करने के लिए पुरस्कार, वेतन दिया जाए, तो क्यों नहीं वो लड़के कट्टर मुसलमान बनेंगे...इससे बेहतर काम और क्या होगा भला...ये सारे काम प्रायोजित काम हैं...

कभी कभी तो मुझे ये भी लगता है, और मुझे पूरा शक़ है, इस्लामिक संस्थाएं, इस्लाम के प्रचार के लिए, हिंदी ब्लॉग जगत के कुछ ब्लोग्स को, प्रायोजित कर रहीं हैं, वर्ना एक आम व्यक्ति के लिए, इतने सुचारू रूप से, सब कुछ लिखना आसान नहीं है...जिनके घर-परिवार, नौकरी, बच्चे हों वो लोग भला इतना वक्त कैसे दे सकते हैं और इतने ब्लॉग कैसे बना सकते हैं ? पल भर में मसौदा कैसे तैयार कर लेते हैं ? ये वही कर सकते हैं, जो लोग फुल टाइम ब्लॉग्गिंग कर रहे हैं, इस्लाम के नाम पर,  इस्लाम के प्रचार के लिए, ज़रूर यह उनकी रोज़ी-रोटी है और इस काम के लिए उनको पैसा दिया जा रहा है.. वर्ना एक आम गृहस्थ के लिए, इतना वक्त निकालना नामुमकिन है. ये तभी संभव है जब, उनका काम ही यही है...

हाँ नहीं तो..!!

तू बोल मेरी ज़िन्दगी, क्यों इतनी तू बेज़ार है

थोडा सा जायका बदलने की कोशिश है आज..

बोल मेरी ज़िन्दगी, तू इतनी क्यूँ बेज़ार है 
साँस तो है चल रही, पर लग रही तलवार है

बिक रहे हैं लोग सब, सुबहो-शाम हर तरफ
ये जन्नते-आदम नहीं, कोई चोर-बाज़ार है 

है कोई खड़ा हुआ, बुलंदियों की शाख़ पर
और कोई दिखा मुझे, ज्यूँ गिरी हुई दीवार है 
 
ज़मात में नीलाम मैं,  होने लगी हूँ देख लो
उसे कोई ख़बर करो, वो मेरा ख़रीददार है

उतर गए ख़याल सब, रूह के सफ़े पे अब
खौफ कोई न कहे, अरे तस्वीर उसकी यार है   
 वादियाँ मेरा दामन ...आवाज़ 'अदा' की..
 






Friday, April 20, 2012

वो हिन्दू कितने बदकिस्मत होंगे, जिनका घर पाकिस्तान में है...

विश्व का सबसे बड़ा प्रजातंत्र भारत...
हम भारत के लोग, भारत को, एक सम्पूर्ण, प्रभुत्व संपन्न, गणराज्य बनाने के लिए, तथा इसके समस्त नागरिकों, को सामाजिक आर्थिक राजनैतिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देने के लिए कटिबद्ध हैं, और यह स्वतंत्रता सभी नागरिकों को प्राप्त भी है...बेशक उस स्वतंत्रता का अनुचित उपयोग करने से लोग बाज़ नहीं आते, लेकिन क्या लोग सोचते हैं कि दुनिया में ऐसे भी देश हैं, जहाँ कुछ समुदाय के लोगों के लिए, किसी भी तरह की स्वतंत्रता नाम की कोई चीज़ मौजूद ही नहीं है...दूर क्यों जाना हमारे पड़ोस में नज़र डालिए..पाकिस्तान...!! जो देश के नाम पर ही कलंक है...जिसका इतिहास शुरू से लेकर आज तक खून से ही सना हुआ है..जहाँ हर शासक, अपने पहले वाले शासक को मार कर ही गद्दी पर बैठा है...जब वहाँ वो अपनों को ज़िबह करने से नहीं क़तराते, फिर वहां बसने वाले निरीह हिन्दुओं की क्या बिसात भला ?? इस्लामिक राष्ट्र में ये कल्पनातीत ही हो जाता है, कैसे हमारे हिन्दू भाई-बहन वहाँ जीते होंगे भला ?  कितना मुश्किल होता होगा तथाकथित काफिरों का साँस लेना,  जिंदा रहना...जहाँ कोई भी उनका गला दबाने को किसी भी पल आ सकता है...जहाँ का शरिया कानून ही कहता है, काफिरों को मारो और ज़न्नत पाओ...और वहां तो हर किसी को जन्नत ही चाहिए....कितना कठिन होगा हिन्दुओं का जीवन, बिलकुल ऐसे   जैसे भेड़ियों के बीच मेमना.....

वो हिन्दू कितने बदकिस्मत होंगे, जिनका घर पाकिस्तान में है...और वो मुसलमान कितने खुशकिस्मत जो भारत में रहते हैं और अपनी मनमानी करते हैं...जिन्हें रोकने वाला तो कोई नहीं ही है,  लेकिन बढ़ावा देने वाली कांग्रेसी सरकार है और उनके पिठ्लग्गु...फिर भी इनकी माँग पूरी नहीं होती...और इनका पेट नहीं भरता...

क्या पकिस्तान भी ऐसे हिन्दू धर्मावलम्बियों के प्रणेता होंगे जैसे यहाँ इमाम बुखारी हैं? क्या वहां भी गली-गली में मंदिर होंगे, क्या वहाँ भी हिन्दू धूम-धाम से तीज-त्यौहार मनाते होंगे...? क्या वहाँ भी, पाकिस्तान की हार और भारत की क्रिकेट में जीत पर  हिन्दू भाई-बहन अपने मोहल्लो में पटाखे चलाते होंगे ??  क्या वहाँ की पार्लियामेंट में हिन्दुओं के प्रतिनिधि होंगे ?  क्या वहाँ के हिन्दुओं को नौकरी में रिजर्वेशन मिलता होगा ???  क्या वहाँ के हिन्दुओं को तीर्थ यात्रा के लिए एड मिलता होगा ??? क्या पाकिस्तानी अल्संख्यक हिन्दुओं के लिए भी पर्सनल ला होंगे ? क्या पकिस्तान के हिन्दू, पाकिस्तान के सही मायने में नागरिक है ???? हज़ारों सवाल हैं मेरे ज़हन में...लेकिन कोई सिर्फ एक सवाल का ही जवाब दे दे.....क्या वहाँ के हिन्दू, एक रात भी चैन की नींद सोते होंगे ????

भारत चाहे जैसा भी देश है, कट्टर देश नहीं है...हिन्दू अहमक हो सकते हैं, अलसी हो सकते हैं लेकिन कट्टर नहीं हैं...भारत के मुसलमान भारत के नागरिक हैं, और इसके लिए उन्हें उनके अधिकार से कहीं भी वंचित नहीं रखा जाता है...हालाँकि उनकी शिकायत कभी ख़त्म नहीं होती कि, उनके साथ दोहरा व्यवहार होता है...लेकिन वो अपने ही दिल से कभी पूछ लें, क्या पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ वही बर्ताव होता होगा जो उनके साथ यहाँ होता है...? क्या पाकिस्तान से ये उम्मीद की जा सकती है कि वो अपने ही देश के हिन्दू नागरिकों को वो दर्ज़ा दे पाता है जो यहाँके मुसलमान पाते हैं...

पाकिस्तान में बस रहे हिन्दुओं पर IBN khabar की रिपोर्ट:

पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू समुदाय के लोग बेहद नाराज हैं और खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता और हिन्दू नेता का कहना है कि हिन्दुओं को उनकी लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्मातरण जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष जोहरा यूसुफ ने इस्लामाबाद से टेलीफोन पर बताया, "हिन्दू समुदाय डरा हुआ नहीं हैं...बल्कि नाराज है और असहाय महसूस कर रहा है।"
उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान और सिंध प्रांतों में हिन्दू लकड़ियों का जबरन धर्मातरण और फिरौती के लिए अपहरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में जबरन धर्म परिवर्तन का एक मामला उच्चतम अदालत में आया, जिसमें एक युवा महिला ने कहा कि वह अपने परिवार के पास वापस लौटना चाहती हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि हिन्दू समुदाय के लोग जबरन धर्म परिवर्तन को खत्म करने के लिए एक कानून की मांग कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार पाकिस्तान की कुल 17 करोड़ की आबादी में 5.5 प्रतिशत हिन्दू लोग हैं। इनमें 90 प्रतिशत सिंध में रहते हैं, जबकि शेष पंजाब और बलूचिस्तान प्रांत में बसे हुए हैं।
पाकिस्तान में कुछ राजनीतिक पार्टियां और हिन्दू संगठन सिंध प्रांत में हिन्दु समुदाय की लड़कियों के अपहरण और उनके जबरन धर्मातरण से खासे दुखी हैं। वह इसके विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। मानवाधिकार क्लब, युवा हिन्दू फोरम, पाकिस्तान अल्पसंख्यक आयोग, आवामी जमहूरी पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ और पाकिस्तान हिन्दू परिषद ने रविवार को इन घटनाओं के विरोध में कराची प्रेस क्लब के सामने प्रदर्शन भी किया था।
इन सभी ने आरोप लगाया है कि मीरपुर मठेलो शहर में एक हिन्दू लड़की रिंकल कुमारी का अपहरण कर उसका जबरन धर्म पर्वितन (हिन्दू से इस्लाम) कर दिया गया। एक अन्य लड़की आशा कुमारी को भी महीने भर पहले जेकोबाबाद से अगवा कर लिया गया था।
पाकिस्तान हिन्दू परिषद के संरक्षक रमेश कुमार वंकवानी ने कराची से टेलीफोन पर बताया कि देश में हिन्दुओं के लिए वातावरण सुरक्षित नही है। उन्होंने कहा, "हिन्दुओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई है।"
वंकवानी ने यह भी बताया कि हिंगलाज श्वेता मंडी के अध्यक्ष गंगाराम मोटीआनी का गत छह अप्रैल को बलूचिस्तान के बेला क्षेत्र से अपहरण कर लिया गया। यह घटना हिंगलाज माता मंदिर में होने वाले हिन्दू वार्षिक सम्मेलन से कुछ दिन पहले हुई। उन्होंने कहा कि 2007 के बाद इस तरह की घटनाओं में तेजी आई है।
"प्रत्येक वर्ष हमारे पास लगभग 50 हिन्दू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायतें आती हैं। उन्होंने धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए एक कानून बनाने की मांग की हैं।"उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष नवम्बर में पाकिस्तान के सिंध प्रांतों में तीन हिन्दू डॉक्टर भाईयों- अजित कुमार, अशोक कुमार, और नरेश कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

ई कौन सी बड़ी बात है ? न मारते तो बड़ी बात होती...

हाँ नहीं तो..!!

Thursday, April 19, 2012

भारत पहले अपना घर ठीक करे फिर दूसरों को सीख दे....

सुना है शाहरुख़ खान को फिर अमेरिका के एयर पोर्ट में कुछ देर के लिए रोका गया था...जिससे उन्हें बहुत गुस्सा आया, क्योंकि वो भारत के 'बहुत ख़ास' व्यक्ति हैं...वो भारत के' ख़ास व्यक्ति' हो सकते हैं लेकिन अमेरिका के लिए वो सिर्फ एक व्यक्ति है, इन देशों में कानून सबके लिए बराबर होता है...अमेरिका को पूरा हक है, अच्छी तरह छान-बीन करने का फिर चाहे वो कोई भी हो...अमेरिका ने ९११ के बाद एक भी हमला होने नहीं दिया है...कारण साफ़ है वो अपना काम बहुत अच्छी तरह जानते हैं और ईमानदारी से अपना काम करते हैं...जबकि भारत में आतंकवादी हमले इतनी सेक्युरिटी का नाटक करने के बाद भी होते रहे हैं...ज़ाहिर सी बात है, उनका दोहरा सलूक रहता ही है, विशिष्ट और अतिविशिष्ट लोगों के प्रति....तभी तो ये हाल है..आये दिन कभी, मुम्बई, कभी जयपुर, कभी दिल्ली में होते हमलों के बारे में, क्या जवाब है इन महान सेक्युरिटी स्पेसिलिस्टस का..??

भारत को भी शाहरुख़ के इस तरह एयर पोर्ट पर रोके जाने से तकलीफ हुई है...कहा गया है कि, इतने 'विशिष्ट व्यक्ति' को इतने समय तक बिठा कर रखना गलत था... लेकिन हिन्दुस्तानी ऑथोरिटी भूल जाते हैं, कि भारत में पहुँचने वाले लोगों को सेक्युरिटी क्लियरेंस के लिए कितना वक्त लगाना पड़ता है...जिसमें ज्यादातर वक्त सिर्फ अपनी धौंस जमाने में ऑथोरिटी वाले लगाते हैं...सुरक्षा कर्मचारी, सुरक्षा की जांच कम, अपने पावर की नुमाइश ज्यादा करते हैं...तभी तो आतंकवादी उनकी नाक के नीचे से निकल जाते हैं और उनको पता तक नहीं चलता है...

हर देश की अपनी अस्मिता होती है और उसे बचाने का हक हर देश को है...इसमें किसी को कुछ भी बोलने का कोई इख्तियार नहीं है...शाहरुख़ से ज्यादा इम्पोर्टेंट लोग हैं दुनिया में...वो सिर्फ एक कलाकार है जो दूसरे के लिखे हुए डाय्लोग्स बोलता है और दूसरे के लिखे हुए गीत गाता है...जब कि कितने इंजिनियरस, डॉक्टर्स, वैज्ञानिक हैं दुनिया में जो उससे से बेहतर और बड़ा काम कर रहे हैं...और इस तरह की बातों में अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं...

भारत पहले अपना घर ठीक करे फिर दूसरों को सीख दे...पहले वो अमेरिका की तरह अपने  देश की अस्मिता पर नज़र रखे, उसे बचाए...अपना पार्लियामेंट तो बचा नहीं सका भारत,  आज तक अपने लोगों को सही सुरक्षा दे नहीं सका भारत, क्योंकि वो ज्यादा व्यस्त है, ऐसे ही नाचने-गाने वालों की सुरक्षा में....

बात करते हैं..!!

हाँ नहीं तो..!!

कांग्रेस एक साम्प्रदायिक पार्टी ... कोई आश्चर्य नहीं होगा..कल को अगर 'जज़िया टैक्स' फिर से हम हिन्दुओं पर जारी हो जाए...तैयार रहिये...

(निम्नलिखित लिंक पर कुछ इम्प्रेसिव पढने को मिला, कुछ अंशों को हिंदी में अनुवाद करके लिख दिया यहाँ, धन्यवाद सहित... http://ablazingindia.blogspot.ca/2012/01/communal-face-of-congress.html)
पिछले दो दशकों के बाद से, भाजपा पर एक साम्प्रदायिक राजनीतिक दल होने का आरोप लगाया जाता रहा है, इस साज़िश में तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मीडिया और कांगेस की मिलीभगत रही है, इस साज़िश में सो काल्ड, सूडो सेकुलर जन प्रतिनिधियों और सेलेब्रिटिस का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है, भारत  में एक फैशन है, अगर आप दूसरे धर्म के पक्ष में नहीं हैं तो, आप सांप्रदायिक हैं लेकिन अगर आप हिन्दू विरोधी हैं, तब आप सेकुलर अर्थात लौकिक माने जाते हैं..और ऐसी अवसत दर्जे की सोच आम तौर पर सूडो इन्तेलेक्चुल , या सामान्य अक्षर ज्ञान वालों में ही देखने को मिलती है, जिन लोगों में विश्लेष्ण करने की क्षमता नहीं होती या फिर जो बस एक ही दिशा में सोच सकते हैं...अधजल गगरी छलकत जाए...

कांग्रेस कितनी साम्प्रदायिक पार्टी है इसे साबित करने के लिए, किसी भी तरह के साक्ष्य की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए.. क्योंकि तथ्य खुद बोलते हैं, तो पाठकों को समझाने की कोशिश करने के बजाय सिर्फ तथ्यों को अगर सामने रखा जाए, और पाठकों को ही तय करने दिया जाय तो बेहतर होगा, और यकीन है कि तथ्यों को देखने के बाद किसी शर्लक होम्स की भी जरूरत नहीं पड़ेगी और स्वयं ही पता लग जाएगा कि वास्तव में सांप्रदायिक कौन है, अतीत की घटनाओं और कांग्रेस की वर्तमान रणनीति की विवेचना से, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, कि सच्चाई क्या है..

• 1947 एंटी गोडसे दंगों : १९४७ में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने, खुद को जनता का सेवक कम उनका मालिक ज्यादा समझा, पूरे राष्ट्र में गोडसे विरोधी दंगे शुरू करवा दिए, जिसमें कांग्रेसी गुंडों द्वारा, बड़ी निर्ममता से श्री सावरकर और नाथू राम गोडसे के निर्दोष समर्थकों की, हत्या, पीटाई, लूट-मार, शामिल है, उनकी संपत्ति या तो छीन ली गयी या जला दी गयी और अनगिनत समर्थकों को कांग्रेसी सरकार ने आजीवन कारावास की सज़ा देकर जेल में ठूंस दिया...

१९८४ में मारा गया एक सिख
• 1984 सिख विरोधी दंगों: १९८४ में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, कांग्रेसी गुंडों ने खून का बदला खून लेने का फैसला किया और जी भर के निर्दोष सिखों का नरसंहार किया.. बाद में राजीव गांधी ने इन नृशंस हत्याओं को उचित ठहराते हुए, अपने वक्तव्य में भी कहा, जिसे कहने में उन्हें कोई संकोच भी नहीं हुआ, और जो रिकॉर्ड में भी है, कि जब एक शक्तिशाली पेड़ गिरता है, यह स्वाभाविक है कि चारों तरफ की धरती हिलती ही है"...बहुत पहले ही कांग्रेस को आतंकवादी पार्टी घोषित कर देना चाहिए था...लेकिन जो सत्ता की चौपड़ खेलते रहते हैं, उनके लिए जीतना ही मुख्य मक़सद होता है, जीत के लिए सांप्रदायिक, अलोकतांत्रिक और अनुचित जैसे शब्द अपना मतलब खो देते हैं...

• शाहबानो प्रकरण: हम में से कुछ को अभी भी शाहबानो केस याद होगा, ये भी याद होगा कि किस तरह राजीव गांधी ने, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अवमानना करते हुए, पार्लियामेंट, में पूर्ण बहुमत से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का गठन करवाया...आज भारत दुनिया में एकमात्र देश है जहाँ अलग-अलग धर्म के लोगों के लिए अलग कानून है...वर्ना, अन्य देशों में कानून सबके लिए बराबर होता है, देश के सभी नागरिक बराबर होते हैं चाहे वो किसी भी धर्मं का क्यों न हो...ऐसी विभाजन की नीति सिर्फ हिन्दुस्तान में है, और इसे ऐसा बनाने का पूरा श्रेय जाता है कांग्रेस पार्टी को...कांग्रेस पार्टी की मंशा हमेशा से सिर्फ, सिर्फ वोट बैंक बचाने और बढाने की रही है, फिर चाहे, नियम-कानून कितने भी सांप्रदायिक, अलोकतांत्रिक और अनुचित क्यों न हों.. 

• हज सब्सिडी: दुनिया में सिर्फ भारत ही एक ऐसा देश है, जहाँ हज की सब्सिडी दी जाती है...ये अलगाव पूर्ण व्यवहार क्यों ? क्या दूसरे धर्मों के लोगों को ऐसे प्रावधान नहीं मिलने चाहिए ? और ये भी कांग्रेस का शुरू किया हुआ, तुरुप का पत्ता है ताकि उनका वोट बैंक बना रहे...क्या यह अनुचित और सांप्रदायिक अभ्यास नहीं है?
कश्मीरी पंडितों की लाशें

• 1947-2001 से 300.000 कश्मीरी पंडितों का विस्थापन: 1947 में कश्मीर की कुल आबादी में 55% कश्मीरी पंडित थे लेकिन वो आबादी घट कर 2001 में रह गयी 0.1%, वहाँ कश्मीरी पंडितों पर आये दिन हमला किया गया, जिसमें कितनी हत्याएं की गयीं कोई हिसाब नहीं है, उनको पीटा गया, उनकी संपत्ति छीन ली गयी, लड़कियों का ज़बरदस्ती धर्मपरिवर्तन, निकाह करवाया गया और बहुतों को कश्मीर से बाहर भगा दिया गया...सारी कोशिश की जाती रही कश्मीर को इस्लामिक राज्य बनाने के लिए , काग्रेस ने सत्ता पर होते हुए भी, कभी कुछ भी करने का प्रयास नहीं किया, कांग्रेस का शासन काल भारत में १९४७-१९९६ तक रहा और उसके बाद २००४ से आज तक कांग्रेस ही सत्ता में है...जितना भी समय आज़ादी के बार, हिन्दुस्तान को मिला है, लगभग सारा ही कांग्रेस को मिला है, इससे ज्यादा समय हम भारतीय दे भी नहीं सकते थे, किसी भी पार्टी के लिए इतना समय बहुत होता है...लेकिन कांग्रेस ने न कश्मीर के लिए कुछ किया न कश्मीरी पंडितों के लिए कभी कुछ नहीं किया...वैसे भी ये आग उनकी ही पार्टी की लगाई हुई, थी, है, और रहेगी...हाँ दिल्ली में एक कालोनी शायद बनी है और कश्मीरी पंडितों को 'शरणार्थी' का दर्ज़ा ज़रूर दिया है...इसे आप क्या कहेंगे..सांप्रदायिक या दरियादिली ?
 
• सांप्रदायिक हिंसा विधेयक: एक बड़ा ही बेतुका सा सांप्रदायिक हिंसा विधेयक, पास किया गया है, और वो भी हुआ है सोनिया गांधी के निर्देशन में...इस विधेयक के अनुसार, अगर कहीं सांप्रदायिक हिंसा होती है तो, इस कानून के तहत, बहुसंख्यक समुदाय का अपराध दंडनीय माना जाएगा, लेकिन अल्पसंख्यकों का अपराध दंडनीय नहीं माना जाएगा ...अल्पसंख्यक समुदाय के शिकायतकर्ता, अपने घर में बैठ कर भी बहुसंख्यक समुदाय के विरुद्ध शिकायत दायर कर सकते हैं....और तो और उनको सिर्फ एक बार अदालत में जाना होगा, जिनके खिलाफ साम्प्रदायिक दंगे की शिकायत की हैं उन्होंने,  उनकी पहचान के लिए, उन्हें अपने विरोधी के सामने जाने की कोई आवश्यकता ही नहीं है...इस तरह गुप्त रूप से अल्पसंख्यक, बहुसंख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक होने की शिकायत कर सकेंगे और तथाकथित अभियुक्त को कभी मालूम ही नहीं चलेगा कि शिकायत किसने की है... इस बिल के तहत मान लिया जाता है कि बहुसंख्यक समुदाय के सदस्य, हमेशा, हर मामले में दोषी हैं, ये जो कहा जाता है न कि जब तक अभियोग साबित न हो कोई भी अभियुक्त नहीं होता..हिन्दुस्तान में ऐसा नहीं है...इस तरह के बिल पास करने वाली कांग्रेस और कुछ नहीं सिर्फ और सिर्फ हिन्दू विरोधी है ...

अंध श्रद्धा निर्मूलन कानून: एक और  मसौदा तैयार किया गया है, महाराष्ट्र राज्य में कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार द्वारा, इसे "अंध श्रद्धा निर्मूलन कानून" कहते हैं, इस कानून के तहत, बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों को करने से रोकना है, जैसे हवन, रामायण पाठ, कथा इत्यादि...भगवान् की तस्वीर सार्वजनिक रूप से लगाने की मनाही हो जायेगी...कहने का तात्पर्य यह है कि हिन्दू धर्म' का समूल नाश करने का हर प्रयास कांगेस कर रही है...लेकिन यह साम्प्रदायिक विचार नहीं है, हमारे तथाकथित, अभिजात वर्ग, और सूडो सेकुलर लोगों के लिए...कोई आश्चर्य नहीं होगा..कल को अगर 'जज़िया टैक्स' फिर से हम हिन्दुओं पर जारी हो जाए...तैयार रहिये...

हाँ नहीं तो...!!

Tuesday, April 17, 2012

नाम में क्या रखा है...!!!!

इस आलेख के अंश यहाँ से लिए गए हैं..http://www.indiaagainstcorruption.info/2011/05/some-hidden-facts-about-the-nehru-gandhi-dynasty/

नेहरु, इंदिरा, आखिर में मोहम्मद युनुस

इंदिरा गाँधी, धीरेन्द्र ब्रह्मचारी

प्रियदर्शिनी इंदिरा नेहरु (गाँधी) को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहाँ से उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, क्योंकि पढाई में उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं था, फिर उसे गुरुदेव रविन्द्र नाथ ठाकुर के शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन, गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने ही उसे, उसके बुरे आचरण की वजह से निकाल बाहर किया....यहाँ हम बात कर रहे हैं, हमारे राष्ट्र के प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरु की एकमात्र संतान की दशा की...पढाई के मामले में प्रियदर्शिनी इंदिरा नेहरु, एक सामान्य छात्रा थी...
कालांतर में, प्रियदर्शिनी नेहरु ने फ़िरोज़ खान नामक नौजवान से विवाह किया,  फ़िरोज़ खान, गुजरात के जूनागढ़ क्षेत्र का रहनेवाला था, फ़िरोज़ खान शराब का किराने का व्यापारी था, अपने इसी काम के सिलसिले में उसे, आनंद भवन. प्रियदर्शिनी इंदिरा नेहरु, के निवास स्थान, जाना पड़ता था..फ़िरोज़ खान, आनंद भवन में भी शराब की सप्प्लाई किया करता था, शायद वहीँ उसकी मुलाक़ात, प्रियदर्शिनी इंदिरा नेहरु से हुई हो....

आनंद भवन पहले इशरत मंजिल के नाम से जाना जाता था,  इशरत मंज़िल नेहरु परिवार से पहले, मुबारक अली नामक वकील के पास थी, और मोतीलाल नेहरु, मुबारक अली के मुलाजिम थे...

फ़िरोज़ खान के पिता का नाम, नवाब खान था, फ़िरोज़ खान की माँ पारसी थी, उसका उपनाम गैनडी था, जो एक पारसी उपनाम माना जाता है...फ़िरोज़ की माँ ने शादी के वक्त इस्लाम कबूल कर लिया था...यही वजह है बाद में फ़िरोज़ खान को, उपनाम 'गैनडी', जो उसकी माँ का उपनाम था, दे दिया गया, जिसे धीरे से 'गाँधी' कर दिया गया...मिलते जुलते नामों को अपना कर, देश की भोली जनता को अच्छा-ख़ासा बेवकूफ़ बनाया गया था...फ़िरोज़ ने, शादी का प्रस्ताव इंदिरा के समक्ष उसके १६वें  जन्मदिन से पहले ही रखा था, जिसे इंदिरा के घर वालों ने सीधे से ख़ारिज़ कर दिया था, इंदिरा के घर वालों की नज़र में, इंदिरा उस समय बहुत छोटी थी और फ़िरोज़ किसी भी हाल में उसके काबिल नहीं था.....एक कारण यह भी था कि, उनदिनों फ़िरोज़ और कमला नेहरु के प्रेम सम्बन्ध की बातों का बाज़ार भी बहुत गर्म था, कमला नेहरु और फ़िरोज़ खान के पोस्टर भी इलाहबाद की सड़कों की शोभा बढ़ा रहे थे, और जनता को इस अनुचित सम्बन्ध पर सख्त एतराज़ भी था....नेहरु तब जेल में थे और उनके लिए मुंह दिखाना मुहाल हो गया था....कमला नेहरु ने इस शादी का पुरजोर विरोध किया था, उन्होंने इंदिरा से कहा था, ये शादी करके वो अपने जीवन कि सबसे बड़ी गलती करेगी,  जवाहलाल भी इस शादी के विरोध में थे, शायद उन्हें , कमला और फ़िरोज़ के समबन्ध पर उतना यक़ीन न भी रहा हो, लेकिन इतना ज़रूर यक़ीन था कि फ़िरोज़ ने कोई न कोई बदसलूकी की है कमला के साथ...इसलिए ऐसे इंसान को वो अपना दामाद क़बूलने को हरगिज़ भी तैयार नहीं थे...

इतने विरोध के बावज़ूद, इंदिरा ने फ़िरोज़ से विवाह कर ही लिया, कहते हैं फिरोज खान ने इंग्लैंड में, लंदन के एक मस्जिद में प्रियदर्शिनी नेहरु से निक़ाह कर लिया था, शादी होते ही फ़िरोज़ खान, फ़िरोज़ गाँधी बन गया, और प्रियदर्शिनी इंदिरा नेहरु, बन गईं मैमुना बेग़म, ये शादी शुरू से ही चरमराई हुई थी और राजीव के जन्म के साथ ही, शादी नाम की कोई चीज़ बाक़ी नहीं रही, इंदिरा और फ़िरोज़ अलग रहते थे, लेकिन राजनीतिक कारणों से उन्होंने तलाक़ नहीं लिया था...

"कैथरीन फ्रैंक' की पुस्तक में प्रियदर्शिनी इंदिरा नेहरु के अन्य प्रेम संबंधों का भी ज़िक्र है, लिखा हुआ है कि प्रियदर्शीनी इंदिरा नेहरु का पहला प्यार,  शान्तिनिकेतन में पढ़ते हुए अपने जर्मन शिक्षक फ्रांक  ओबेर्दोफ़ से हो गया था, यही वो आचरण था, जिसके कारण, प्रियदर्शिनी इंदिरा नेहरु को, शान्तिनिकेतन, के परिसर से गुरुदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर ने सीधा यूरोप पहुंचा दिया था, बाद में एम ओ मथाई, जो पिता जवाहरलाल के सचिव थे, से भी प्रियदर्शिनी इंदिरा नेहरु के अन्तरंग सम्बन्ध रहे, धीरेंद्र ब्रह्मचारी जो उनका योग शिक्षक था उससे भी, मधुर सम्बन्ध थे इंदिरा गाँधी के और विदेश मंत्री दिनेश सिंह के बारे में भी ऐसी बात कही जाती हैं...

हालांकि, इंदिरा के विवाहेतर रिश्तों के लिए कुछ हद तक, फ़िरोज़ गांधी की लगातार बेवफ़ाई, और उनके एकाकी जीवन, को कारण माना जा सकता है, कहा जा सकता है कि फ़िरोज़ के इस व्यवहार ने इंदिरा को ऐसा करने के लिए उकसाया था, फ़िरोज़ के अन्तरंग सम्बन्ध कई महिलाओं से थे, जैसे, भारतीय संसद की ग्लैमर गर्ल तरकेश्वरी सिन्हा, मह्मुना सुल्ताना और सुभद्रा जोशी..फ़िरोज़  गाँधी की महिला मित्रों में और भी नाम आते हैं जैसे एक खूबसूरत नेपाली लड़की जो ओल इंडिया रेडियो में कार्यरत थी, और एक तलाक़शुदा ब्रह्मण परिवार की महिला जो केरल की थी...

इंदिरा गाँधी, ने अपने शासन काल में बहुत सारी गलतियाँ भी की थीं...जिसमें, धीरू भाई अम्बानी की आउट ऑफ़ वे जाकर मदद करना, पूर्वी पाकिस्तान में 'मुक्तिवाहिनी सेना' का समर्थन करना, जो राजनितिक दृष्टि से तो ठीक था लेकिन उन ४० लाख अवैध अप्रवासियों को नज़रंदाज़ कर देना, जिन्होंने पश्चिमी बंगाल में अवैध रूप से प्रवेश किया और जिनकी संख्या आज २ करोड़ हो गई है, बहुत भारी गलती थी...इंदिरा गाँधी ने, १९७१ के युद्ध में क़ैद किए गए ९०,००० पाकिस्तानी सैनिकों को तो बिना शर्त छोड़ दिया, लेकिन भारतीय सैनिकों को, जो पाकिस्तान में वार ऑफ़ प्रिजनर्स थे, उन्हें पाकिस्तान से लाना भूल गईं..इंदिरा गाँधी ने
हिन्दुस्तानी फौजियों के बलिदान और शौर्य का भी अपमान कर दिया जब बिना शर्त, पाकिस्तान को हज़ारों एकड़ ज़मीन वापिस कर दी, जिसे हमारे जवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर जीता था...

इंदिरा गाँधी की सबसे बड़ी भूल और हिन्दुस्तान का काला अध्याय है, 'इमरजेंसी', जिसे १९७७ में इंदिरा गाँधी ने अपने सरकार में बढ़ते भ्रष्टाचार को नहीं रोक पाने और जयप्रकाश नारायण की क्रांति से मुंहकी खाने, के एवज में लगाई थी...आपातकाल की घोषणा ने इंदिरा गाँधी को एक 'तानाशाह' की पदवी भी दे दी...माननेवाले 'इमरजेंसी' का खलनायक, इंदिरा पुत्र, संजय गाँधी को भी मानते हैं, 

'इमरजेंसी' संजय के लिए, सत्ता, शक्ति और पैसा का खुल जा सिम सिम था, उसका अपनी माँ, इंदिरा पर, ज़बरदस्त भावनात्मक पकड़ थी...और इस बात का उसने भरपूर फायदा भी उठाया था, तब तक, जब तक इंदिरा झेल पायी थी...बाद में, सत्ता की लोलुपता की लड़ाई में, माँ का प्यार हार गया था...
"कैथरीन फ्रैंक' की पुस्तक में यह भी कहा गया है कि , प्रियदर्शिनी इंदिरा नेहरु (गाँधी) के द्वीतीय पुत्र , संजीव गाँधी, फ़िरोज़ गाँधी के पुत्र नहीं थे, संजीव , मोहम्मद युनुस नामक शख्स की औलाद थे, ये भी बताया जाता है, जब संजीव (संजय) गाँधी का निधन हुआ था, तो एक ही व्यक्ति ऐसा था, जो सबसे ज्यादा रोया था, और उस व्यक्ति का नाम है मोहम्मद युनुस, पुत्र शोक उसे ही हुआ था, इंदिरा गाँधी को हुआ होगा, लेकिन उन्होंने दिखाया नहीं था...

संजीव गाँधी का नाम, संजय गाँधी में तब्दील होने के पीछे भी एक घटना का हाथ है, इस घटना से ये भी साबित होता है कि, इन बड़े लोगों ने किस तरह, साम-दाम-दंड-भेद अपना कर, देश के हर कानून को, अपना वर्चस्व बचाने के लिए, तोडा-मरोड़ा है..और देश को गुमराह किया है...हुआ यूँ, कि बर्तानी पुलिस ने संजीव को एक कार की चोरी के जुर्म में इंग्लैड में गिरफ्तार कर लिया था, ओफ़िशिअल रिकॉर्ड में, संजीव का नाम, उसका पासपोर्ट नंबर सभी कुछ एक मुजरिम की हैसियत से दर्ज़ हो गया था, इस बात से गाँधी या नेहरु जो भी कहें, उनकी छवि बिगड़ रही थी, इसका ईलाज निकाला गया, और 'संजीव' से 'संजय' नाम बदल कर, दूसरा पासपोर्ट इशू कर दिया गया.. प्रीटी कूल हाँ....!!!! इस तरह बन गए संजीव गाँधी, संजय गाँधी...

सच पूछा जाए तो, इस परिवार का अपना कुछ है ही नहीं...न ज़ात है और न धर्म है, यहाँ तक कि उनका अपना नाम भी तो अपना नाम नहीं है...बस है तो, खाली फुटानी...!!

हाँ नहीं तो..!!