Wednesday, July 14, 2010

डरते हो क्या मुझसे ??


पता नहीं ये मेरा दिल है
या कोई सच
जो
मुझे कुछ बता रहा है
एक पुल नाज़ुक से दिल का
बेरहमी से जला कर आई हूँ
तुम्हारे पास...
मगर यहाँ कुछ पराये
से साए क्यूँ नज़र आते हैं
जिन्हें तुम
अपना नहीं कहते हो....
किससे डरते हो तुम,
इनसे या मुझसे ???




Tuesday, July 13, 2010

हाल क्या है दिलों का न पूछो सनम...

हम तो कुछ लिख ही नहीं पा रहे हैं..
समय ही नहीं है...
लेकिन अपनी पसंद का गीत तो सुनवा ही सकते हैं ...
बात ये है कि... ये दोनों गीत किशोर साहब और रफ़ी साहब की आवाज़ में हमें बहुत-बहुत पसंद ...
तो सोचा क्यूँ न आप लोगों को भी याद दिलवा दें इन सदाबहार गानों की..





Monday, July 12, 2010

ये शहर है क़ामयाब यहाँ क़ामयाब हैं लोग............ये ज़नाब तो बस कमाल ही कर रहे हैं



ये शहर है क़ामयाब यहाँ क़ामयाब हैं लोग
उठ गई ग़र उंगलियाँ तो बस अज़ाब हैं लोग

हुए हम नाक़ाम तो नाक़ाम ही सही
सुनो नाकामियाँ मेरी बेहिसाब हैं लोग

मुझे टटोलती रही क्यूँ हरेक वो नज़र
तहरीर अधूरी सी हूँ मैं किताब हैं लोग

ये तो थीं मेरी चंद पंक्तियाँ...
और अब ज़रा इधर निग़ाह डालिए...ये ज़नाब तो बस कमाल ही कर रहे हैं...सच में...!!
हा हा हा हा .....

Sunday, July 11, 2010

अपने राष्ट्रीय गान को सम्मान दें...



बात तब की है जब यहाँ ओट्टावा में फिल्म 'कभी ख़ुशी कभी ग़म' आई थी....मैंने कहा है न हम हमेशा पूरे परिवार के साथ फिल्म देखने जाते हैं....इस फिल्म को भी हम सभी देखने गए, यहाँ के फिल्म हॉल में...ऐसी फिल्मों को हॉल में देखने का अपना ही आनंद होता है...मैं, मेरे तीनो बच्चे (मृगांक, मयंक और प्रज्ञा ) और संतोष जी गए थे देखने...
इस फिल्म में एक दृश्य है जहाँ शाहरुख़ और काजोल का बेटा stage पर भारत का राष्ट्रीय गीत प्रस्तुत करता  है...मुझे याद है..जैसे ही यह गीत शुरू हुआ..मेरे बगल में बैठा हुआ मृगांक उठ कर खड़ा हो गया ....पीछे से आवाज़ आई अरे बैठो भाई...उसे खड़ा देख मैं भी खड़ी हो गई, फिर मेरे साथ मेरा पूरा परिवार...हमें देख कर हमारे आस-पास के अधिकतर लोग खड़े हो गए और फिर शायद पूरा हाल खड़ा रहा जब तक कि राष्ट्रीय गान समाप्त नहीं हो गया.. मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे...मन में कैसा भाव आया की शायद कह नहीं पाऊँगी....गर्व, अभिमान और न जाने क्या-क्या...गीत के समाप्त होने के बाद पूरा हाल तालियों की गड़गडाहट से गूँज उठा था...विदेश की धरती पर अपने राष्ट्रीय गीत के लिए सिनेमा हॉल में खड़े होने की पहल मेरे बेटे ने की थी...आज भी लोग इस बात को याद करते हैं...

बचपन से मेरी माँ ने यह आदत डाली हुई है, हम सबको ...हम कहीं भी हों, किसी भी हाल में हों अगर राष्ट्रीय गान बज रहा है तो वो ख़ुद सावधान की मुद्रा में खड़ी हो जातीं हैं और हमें भी ऐसा ही करने को कहती रहीं हैं...मृगांक नानी की बात अब तक नहीं भूला है... ऐसा है मेरा मृगांक...

मुझे इतना मालूम है अगर हम अपने राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रीय गान को सम्मान देंगे तो दूसरों को देना ही पड़ेगा...इसलिए कटिवद्ध हो जाइए ऐसा करने के लिए...प्रण कर लीजिये, अपने तिरंगे और राष्ट्रगान को सम्मान देंगे चाहे कुछ भी हो जाए...

हो सके तो आप हमारे राष्ट्रीय गान के समापन तक सावधान की अवस्था में खड़े रहें... . 
जय हिंद..!!

Saturday, July 10, 2010

तुम्हारा बलिदान निरर्थक नहीं जाएगा....

इस धरा पर
जो अँधेरा है,
वो
रात्रि है, अज्ञानता की
इस
तिमिर की चुनौती
स्वीकार करनी होगी,
और
पार करना ही होगा,
यह बीहड़, 
लेकर हाथों में ज्ञानदीप,
अगर  
स्वयं बुझ भी गए तो क्या !
दे दो न
ज्योति
आगत के हाथों में,
एक न एक दिन
सवेरा हो ही जाएगा
और 
तुम्हारा बलिदान
निरर्थक नहीं जाएगा....


Friday, July 9, 2010

क्या मौसम है....

Current Weather Updated: Thursday, July 8, 2010, 16:00 EDT - Ottawa Airport

A
 few clouds
35 °C
    A few clouds
      किसी से अगर हम कहें कि कनाडा में भी गर्मी पड़ती है तो लोग कहेंगे ...मेरा दीमाग ठिकाने पर नहीं है....जी हाँ ये तापमान है हमारे शहर, ओट्टावा का ...आज तो वास्तव में ४४-४५ डिग्री सा ही महसूस हो रहा है....सोचा आप लोगों को भी बता देना ही चाहिए...ऐसा नहीं है सिर्फ़ आप ही गर्मी झेल रहे हैं...कम दिनों के लिए ही सही, लेकिन गर्मी यहाँ भी पड़ती है ....
      अब आप सोचिये कि तापमान का रेंज क्या है   !!!   रेंज है गर्मी में +४५ से जाड़े में लगभग -४५....यह बहुत बड़ा रेंज है....लेकिन ऐसा ही है....

      हमारे शहर ओट्टावा में दुनिया की सबसे लम्बी कैनाल या नहर बहती है  जिसे 'रीदो कैनाल' कहते हैं...आपको चंद तसवीरें दिखाती हूँ...

      ऊपरवाली तसवीरें लीं गईं हैं,  गर्मी के मौसम में ....इस समय इस कैनाल और इसके आस-पास की खूबसूरती बस देखते ही बनती है ...यह कैनाल रंग बिरंगी नवकाओं से भरी रहती है,  रात में भी रौशनी से चमकती नावें  थिरकती हुई चलती रहती हैं और अक्सर आगे जाकर 'डाउस झील ' में खड़ी मिलती हैं ...उस समय उनकी ख़ूबसूरती को बयाँ करना असंभव सा ही लगता है... झील की गोद में ये रौशनी से नहाये बोट यूँ लगते हैं जैसे...रात के अँधेरे में कोई सजी संवरी दुल्हन ...अपने मन में लाखों सपने और अनगिनत खुशियाँ समेटे मुस्कुरा रही हो...रात की चांदनी में झील की लहरों पर  ये बोट बहुत ही आकर्षक लगतीं हैं......बहुत ही खूबसूरत नज़ारा होता है ...


      नीचे की तसवीरें उसी कैनाल  की हैं ....जाड़े के दिनों में ली गईं हैं ..उस समय यही कैनाल पूरी तरह जम जाती है और लोग इसपर स्केटिंग करते हैं...बर्फ की मोटाई २ मीटर होती है...और इसके टूटने का कोई खतरा नहीं होता...२ मीटर बर्फ के नीचे बहुत गहरी नहर बहती रहती है...लोगों को इसपर स्केटिंग करने की इजाज़त देने से पहले पूरी तरह से इसे जांचा-परखा जाता है...इस कैनाल के ऊपर से बड़े बड़े ट्रकों को गुज़ार कर पूरी तरह तसल्ली कर ली जाती है कि कोई ख़तरा नहीं है ...फिर लाखों कि तादाद में लोग इस पर स्केटिंग करते हैं है...बिल्कुल सुरक्षित...

      ये देखिये ऊपर वाली नहर जिसकी छाती पर बोट दनादन चल रहे हैं... जाड़े में कैसी हो जाती है....और कितने लोगों को सम्हाल रही है...जबकि इस बर्फ के नीचे बहुत गहरा पानी है..


      तो ये है कनाडा के मौसम का विवरण...आशा है आपको पसंद आया होगा होगा ...