Wednesday, September 29, 2010

वो तो राम के भरोसे है न ...!!


संभावनाएं...
दिखाई नहीं देतीं
कभी-कभी 
निराशावादी अवधारणाओं में,
और 
कुछ असाधारण परिस्थितियाँ 
आ जाती हैं,
जिनका कोई विकल्प 
नज़र नहीं आता, 
पर जाने क्यों
ऐसा लगता है,
परिस्थितियाँ कैसी भी क्यों न हों 
कुछ न कुछ
व्यवहारिक लाभ प्रदान करती ही हैं 
हाँ..
भविष्य के विषय में 
कोई भी, कुछ नहीं कह सकता
वो तो राम के भरोसे है न ...!!


16 comments:

  1. जावेद साहब ने कहा भी है :
    क्यों फिक्र की क्या होगा ?
    कुछ न हुआ तो तजुर्बा होगा !

    पिछली बार भूल गया था, आपके बेटे ने अच्छी तस्वीर बनाई है, मुझे लगता है की वो WWE का फेन है ?

    लिखते रहिये ..

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  2. भविष्य का तो राम ही जाने ।

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  3. यहां कौन है असली, कौन है नकली,
    ये तो राम जाने, ये तो राम जाने...

    जय हिंद...

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  4. @ खुशदीप जी,
    इसमें सोचना क्या है..
    मैं हूँ असली आप हैं नकली...और क्या
    हाँ नहीं तो..!!

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  5. सारा बोझ हम ही क्यों उठायें....ठेका ले रखा है क्या ?

    थोड़ा राम जी को भी उठाने दो...........आखिर ये दुनिया बनाई भी तो उसी ने है

    अब अपने कर्म-फल आप ही भोगो.............

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  6. bahut khoobsurt
    mahnat safal hui
    yu hi likhate raho tumhe padhana acha lagata hai.

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  7. यूँ तो सभी कुछ राम के भरोसे ही है ....
    अच्छी रचना है आपकी बहुत ही ....

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  8. परिस्थितियाँ कैसी भी क्यों न हों
    कुछ न कुछ
    व्यवहारिक लाभ प्रदान करती ही हैं

    ये दृष्टिकोण भी अच्‍छा लगा !!

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  9. भविष्य अपने भरोसे है, यदि हम केवल वर्तमान पर ही ध्यान दें।

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  10. राम राम ही कहना पडेगा आज

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  11. क्यों देखा जाये संभावना की तरफ़, जब करने को जरूरी काम है सामने?
    अच्छी पंक्तियाँ लगीं।
    आभार।

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  12. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  13. बढिया रचना ।
    परिस्थितियाँ कैसी भी क्यों न हों
    कुछ न कुछ
    व्यवहारिक लाभ प्रदान करती ही हैं
    हाँ.. अनुभव तो दे ही जाती हैं ।

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