Wednesday, January 22, 2014

मोरनी बागाँ मा बोले आधी रात मा .... !!

आज अचानक ये नज़र आ गया.… प्रज्ञा (मेरी बिटिया ) और उसकी एक सहेली ने दिवाली में नृत्य  किया था :), इस नृत्य की ख़ास बात ये है कि मात्र दो घंटे की प्रैक्टिस के बाद इन दोनों को मैदान-ए-जंग में उतार दिया गया था :)

16 comments:

  1. नृत्य में इतनी शास्त्रीयता दो घंटे में तो नहीं आ सकती। प्रशिक्षण गहन रहा होगा।

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    1. प्रवीण जी,
      आपको जान कर आश्चर्य होगा मेरी बेटी ने शास्त्रीय नृत्य कभी सीखा ही नहीं है :) हाँ उसके साथ जो नृत्य कर रही है वो अवश्य शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा विगत १४ सालों से ले रही है :) शायद यही ख़ास वज़ह है कि मेरी बिटिया को अब अक्सर विगत सालों से यहाँ के अनेक कार्यक्रमों में नृत्य करने के लिए बुलाया जाता है :):)

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  2. क्षमा मैं देख नहीं पा रहा हूँ कि आपने क्‍या डाला है।

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    1. कोई बात नहीं विकेश, बस मैंने अपनी बिटिया का नृत्य डाला है यहाँ।

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  3. सुन्दर प्रस्तुति। साधुवाद।

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    1. धन्यवाद सिद्धार्थ जी !

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  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति गुरुवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  5. प्रतिभा वास्तव में ईश्वर की देन होती है जिसे हम अभ्यास से नई दिशा और ऊँचाई पर ले जाते हैं... बिटिया प्रज्ञा को मेरा आशीष और शुभकामनायें!!

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  6. बहुत ही सुन्दर नृत्य किया है आपकी बिटिया ने।

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    1. Shobhna didi,
      Pragaya meri bitiya hai isliye mujhe to wo koodegi tab bhi naachti hui lagegi, badi baat ye hai ki aaplogon ko pasand aaya.

      aapka dhanywaad di.

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति दोनों कलाकार बच्चियों की, ये गाना मुझे भी बहुत पसंद है।

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