Wednesday, January 1, 2014

कौन बनेगा प्रधानमंत्री ?


मेरे विचार से, हमारे देश के अगले प्रधानमन्त्री पद के लिए 'अरविन्द केजरीवाल' से बेहतर विकल्प दूसरा कोई नहीं है । 


He is born leader. He is proactive, young, bright, brilliant, bold, smart, intelligent, dedicated, strong headed, down to earth and above all he knows what he is doing. He is a man of courage who does not run away, but stands in-front of his opponents and fights for the cause. I am sure, he is  the right man for the job. 

In-fact, he is THE BEST MAN for this post.


वैसे अरविन्द को देख कर हमको एक फ़िल्म की याद आ जाती है, अनिल कपूर की फ़िल्म थी 'नायक' :):) बस एक बार ऐसे ही टाईप राईटर लेकर वो चलें और चुन-चुन कर भ्रष्ट लोगों को सस्पेंड करते जाएँ, फिर तो क्या बात होगी और हमको पूरा यक़ीन है, वो अपनी झाड़ू से पूरी सफ़ाई करके ही मानेंगे । हम तो जी अरविन्द केजरीवाल की फैन हो गई हूँ।  ये हमरे अपने विचार हैं । हमरे हसबैंड तो पूरे भा.ज.पा. हैं, ग़लती से अगर ऊ पढ़ लिए तो चिढ़ कर भूसा हो जायेंगे :) :) वैसे हम डरते-उरते नहीं हैं काहे से कि ऊ पढ़ते-उढते नहीं हैं, बहुते बीजी आदमी हैं :):) 

अब ज़रा ई बताईये आपलोग  क्या सोचते हैं ? 

अरविन्द केजरीवाल को अगर प्रधानमन्त्री बनना चाहिए तो क्यों बनना चाहिए , और अगर नहीं बनना चाहिए तो क्यों नहीं बनना चाहिए ??

नया साल है, नया माहौल है, नए लोग हैं इसलिए चलिए कुछ नए विचार ही साझा करते हैं । आप अपने विचार बेधड़क यहाँ रखिये, बस भाषा का ख़याल रखियेगा, बाकि तो देखी जायेगी :) 

नव वर्ष की असीम शुभकामनायें !!

38 comments:

  1. भारत में प्रधानमंत्री बनाना कौन बड़ी बात है। वह तो अभी हाल बनवा दें, बस इस बार वादा 700 लीटर पेट्रोल का करना पड़ेगा।
    नव वर्ष की शुभकामनायें! :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. chachu.....shart' thora "kara" nai ho gaya kya????????


      pranam.

      Delete
    2. अनुराग जी - आपने सही और सत्य कहा है.

      Delete
    3. आज तक हम वादे टूटने की राजनीति देखते आये हैं , अब देखेंगे वादे पूरे होने की राजनीति... 'आप 'लोग :)

      Delete
    4. अनुराग जी, दीपक जी,
      आप दोनों के लिए नव वर्ष मंगलमय हो !

      Delete
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (01-01-2014) को हों हर्षित तन-प्राण, वर्ष हो अच्छा-खासा : चर्चा मंच 1479 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    ईस्वी नववर्ष-2014 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
    Replies
    1. आभारी हूँ शास्त्री जी !
      नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनायें !

      Delete
  3. हो जग का कल्याण, पूर्ण हो जन-गण आसा |
    हों हर्षित तन-प्राण, वर्ष हो अच्छा-खासा ||

    शुभकामनायें आदरणीया

    ReplyDelete
    Replies
    1. हों हर्षित तन-प्राण, वर्ष हो अच्छा-खासा |
      न फटके पास कभी, कोई किसिम निराशा ॥
      नववर्ष शुभ हो !

      Delete
  4. narayan............narayan.......narayan.................."di" party ko ek baar alag kar den to 'NAMO' ke mukable abhi door-door tak koi nai hai................bakiya, stuntbazi chor ke bhai sab agar wakai kuch karte hain to hum aam aadmi ko unse kya pareshani hai.........

    "ab-tak ke unke kriya-kalap se unka khud ka bhala bole to 'kad' gunatmak roop se badha hai.....ab o' "with-authority" hain..........sahyog bhi bina apeksh/shart ke mil raha hai.........to aise me dekhna hai ke janta ka bhala kitna kar pate hain"

    pranam.

    ReplyDelete
    Replies
    1. सही कह रहे हो शैलेन्द्र, कद तो बढ़ा है अरविन्द केजरीवाल का और इतना तो बढ़ा ही है कि अब दूसरी पार्टी वाले उस कद से घबड़ा कर वही सब करने कोशिश कर रहे हैं जो अरविन्द कर रहे हैं, इतना बदलाव क्या कम है ?
      मुझे मोदी से कोई परहेज नहीं, लेकिन मुझे पार्टी से है, आखिर इतने सालों तक विपक्ष में रह कर क्या कर लिया बीजेपी ने ? अगर वो एक मजबूत विपक्ष का रोल अदा करती तो क्या देश की ऐसी हालत होती ? फिर चुनाव के नाम पर उनकी इतनी फिजूलखर्ची ? 'आप' ने इतना तो साबित कर ही दिया है कि चुनाव पैसों से नहीं डिटर्मिनेशन के बल पर लड़ा जा सकता है.। कितने अच्छे कैंडीडेट सिर्फ इसलिए सामने नहीं आ पाते थे क्योंकि उनके पास पैसा नहीं था, अब आम लोग भी चुनाव में बतौर योगदानकर्ता आ रहे हैं.। अब नेता की कुर्सी आम लोगों की पहुँच के बाहर नहीं रही.। ये स्टंटबाज़ी नहीं प्रजातंत्र का सच्चा स्वरुप है.। पहली बार महसूस हुआ है कि भारत एक प्रजातंत्र देश है.।
      तुम्हें ढेर सारा शुभाशीष, और नव वर्ष की ढेरों बधाईयाँ !

      Delete
  5. Ye to MP ka Bahumat hi tay karega ki "Kaun Banega Pradhaanmantri"

    Baaki sambandhit post yahan hai https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10152056507535549&set=a.301834800548.189526.727080548&type=1

    ReplyDelete
    Replies
    1. ये भी सही कहा आपने।
      नव वर्ष मंगलमय हो !

      Delete
  6. बहरहाल नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !!

    नई आस हो नई ताजगी, नई हो पहल नया ढंग हो
    नए साल में नए गुल खिले, नई ख़ुशबुएँ नया रंग हो
    कोई जिंदगी न सुरंग हो, न ये कारवाँ ही अपंग हो
    ब-र-से वहां धूप प्रेम की, जो ठिठुरता कहीं अंग हो

    - सुलभ

    ReplyDelete
    Replies
    1. नव वर्ष की असीम शुभकामनायें !

      Delete
  7. जिस देश ने देवगौड़ा, गुजराल, चंद्रशेखर और मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्रियों जो झेला है वो इनको भी ख़ुशी से झेल लेगा. बाकी उपद्रवी कहीं एक जगह नहीं बैठ सकते. दिल्ली में तो ४८ घंटे की आवाज़ सुनाई देने लगी है...हम तो वादे पुरे कर के चल दिए पर.....भुगतेगी आने वाली सरकार. अब निगाह कांग्रेस के साथ मिल कर केंद्र में राज करने की है.

    जय हो २०१४ क्या क्या दिखायेगा इस देश को.

    ReplyDelete
    Replies
    1. दिल्ली में 'आप' की जीत ने इतना साबित कर दिया कि लोगों के पास एक बहुत ही मजबूत विकल्प है ये अलग बात है कि 'आप' को अपने पाँव जमाने के लिए थोडा वक्त ज़रूर लगेगा लेकिन काम बहुत सही होगा :)

      एक बात और जब इतने घटिया लोगों को झेल ही चुके हैं तो कुछ अच्छे लोगों को भी झेल लीजिये :)

      २०१४ आपको 'आप' ही दिखायेगा :)

      Delete
  8. इस देश को मुगलों ने लूटा ,अंग्रेज़ो ने लूटा रहा बचा राजनीतिज्ञों ने लूटा , कुछ बच है क्या ? अगर नगीन तो कोई कुछ नहीं कर सकता अरविंद केजरीवाल भी ढाल जाएंगे । हा ताजी हवा तो आ रही है उसे महसूस कीजिये ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. हो सकता है ऐसा हो, ये भी हो सकता है ऐसा ना हो.।
      सही कहा आपने, फ़िलहाल तो एक ताज़ी हवा का झोंका है ही।

      Delete
  9. क्या सूझा ,ये सब लिखने का...:):)
    पोस्ट पर टिप्पणियों की कमी खल रही थी क्या :)...हम तो चुपचाप कमेन्ट पढ़ रहे हैं ...आगे भी पढ़ते रहेंगे .
    और हाँ, नया वर्ष बहुत बहुत मुबारक हो !!

    ReplyDelete
    Replies
    1. अब का कहें, सुझाई-बुझाई के लिए कोई उमर थोड़े न होता है, हमरे बिलाग में टिप्पणी का बैलेंस थोडा कम हो गया था सोचे चलो रीचार्ज करवा लेते हैं :)

      नव वर्ष की ढेरों बधाईयाँ !

      Delete
  10. दीदी
    वन्दन
    अभिनन्दन
    नव वर्ष मंगलमय हो
    सादर
    यशोदा

    ReplyDelete
    Replies
    1. अरे यशोदा रानी,
      तुमको भी मिले प्रेम स्पंदन
      ज्यादा मत करना तुम चिंतन
      और कभी ना करना क्रंदन
      झुमरीतलैया रहो या लन्दन :)

      नया वर्ष तुम्हारे लिए जोरदार, मजेदार और खुशगवार होवे !

      Delete
  11. नववर्ष की मंगलकामनाएं।

    ReplyDelete
    Replies
    1. नव वर्ष की असीम शुभकामनायें !

      Delete
  12. फ़ालतू की बहस करने की हमें आदत नहीं, आपके सवाल का सीधा सा जवाब दिये देते हैं - हम तो नहीं बनेंगे प्रधानमंत्री :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. यूंकि ये क्या हुआ ?
      न तलवार चली न बहस हुई और जवाब भी मिल गया
      'आप' प्रधानमन्त्री नहीं बनेंगे !
      आइडिया पसंद आया त्वाडा
      :)

      Delete
    2. 'आप' को हैपी न्यू इयर ! :)

      Delete
  13. अभी उन्हें दिल्ली सम्भाल लेने दीजिये। । २०१९ के लोक सभा चुनाव में उनकी दावेदारी पर विचार करेंगे।

    लिखते रहिये।

    ReplyDelete
    Replies
    1. चलिए ये भी एक विकल्प तो है ही.।
      आपको नए साल की बधाईयाँ !

      Delete
  14. प्रधानमंत्री कि तो कोई बात नहीं अभी किन्तु अभी तक के" आप" के विचारों और उनकी कार्य प्रणाली , जमीन जुड़ाव प्रधानमंत्री से ज्यादा महत्व रखता है आज। बाकि तो देखिये हर चीज समय मांगती है और समय बड़ा बलवान।
    हा आपके ,मेरे ,रश्मिजी के विचार थोड़े तो मिलते है। इस विषय पर।
    राम राम। भाजपा वाली नहीं

    ReplyDelete
    Replies
    1. बिलकुल सही कहा दी आपने, लेकिन हम भारतीय समय ही तो नहीं देना चाहते 'आप' को, सब पड़ गए हैं इनके पीछे :)
      राम राम। भाजपा वाली नहीं :)

      Delete
  15. हई देखिये.. जब तक दिल्ली में एगो आम आदमी के मुख्य मंतरी बनने का उदाहरन देखाई दे रहा है तब तक एगो आम आदमी के परधान मंतरी बनने में कोनो डाउट होइये नहीं सकता है.. मगर एगो बात कहें शैल दीदी, राज्य में चुनाव लड़ना अऊर जीतना एक बात है बाकी देस में चुनाव लड़कर परधान मनतरी बना एगो अलगे बात है.. एतना जल्दी कंक्लूजन पर कूदने से अच्छा होगा कि सब लोग तनी वेट ऎण्ड वाच करें.. बाद में जिसको अपना राय बदलना होगा, बदलता रहेगा, हाँ नाही त!! दुर्र ई त आपका वाला चोरा लिये हम!! :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. सलिल भईया,
      बात आप एकदम सुपट कह दिए हैं, दिल्ली तो पहुँचिये गए हैं लोग-बाग़ बाकी दिल्ली अभी दूरे बुझा रहा है :)
      चलिए वेटिया लेते हैं बाकी वाच तो सब करबे कर रहे हैं

      Delete
    2. बाकी बात रहा चोराने-उराने का त सै बात एक बात, जे बा कि ना अभियो तक हम पेटेंट नहीं न करवाये इसका , येही खातिर निरफिकिर रहिये कौनो पिरोब्लेन नहीं न होगा :)

      हाँ नाही त !

      Delete
  16. सलिल जी ने सही कहा , अभी इंतज़ार करने की जरुरत है , किसी के आभा मंडल के प्रभाव में आने से पहले उसके जमीनी कार्य देख कर ही उसे आगे बढ़ाने का काम करना चाहिए , काम किये तो जनता आज कल खुद ही जाग गई है , आगे बढ़ा देगी उन्हें , नहीं तो सिमट कर रह जायेंगे । २०१४ में तो मुश्किल है ( फालतू में भाजपा के जले में नमक नहीं छिड़कना चाहिए ) १९ की तैयारी कर सकते है , २७२ अपने जैसे को खोजने उन्हे चुनावी राजनीति के लिए तैयार करने और जनता में उनके प्रति भी अपनी तरह विश्वास पैदा करने में । हा बशर्ते तब तक आम आदमी बने रहे तो , कही खास बन गए तो क्या होगा :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. अब 'आम' आदमी का बने रहना बहुत आवश्यक है, सच पुछा जाए तो मुद्दतों बाद सच्चा लीडर नज़र आया है, वर्ना ऐवें के ख़ासम-ख़ास लीडरों से मन उकता गया था.। चलिए देखते हैं तेल और तेल की घार… हमलोग :)

      Delete