Thursday, August 26, 2010

फूलों पर टिक गई है बात ...


एक तो हो रही बरसात 
उसपर इतनी लम्बी रात 

कश्ती मेरी डूब के उबरी 
तूफाँ ने फिर खाई मात 

ज़िक्र किया था पतझड़ का 
फूलों पर टिक गई है बात 

झूठ का उबटन चेहरों पर
ख़ाक कहेंगे सच्ची बात 

बिन मतलब बदनाम हुई मैं  
कोई और लगाए घात

कैसा रंग बसंत ले आया ?
पेड़ों पर न फूल न पात

फिर जा बैठे ग़ैर के शाने 
आख़िर दिखा दी तूने ज़ात

एक गीत ...आपके लिए...शायद ठीक लगे...गारंटी नहीं है...

24 comments:

  1. अदा दीदी
    पाय लागी ! प्रणाम ! चरण स्पर्श !
    हां , अब आशीर्वाद मिला है तो आगे बात हो …
    पहले तो गीत की ही प्रीत की ही जीत हुई है फिर से …
    रिम झिम गिरे सावन , सुलग सुलग जाए मन ,
    भीगे आज इस मौसम में , लगी कैसी ये अगन …

    वाह वाह ! वाह वाह !!
    कश्ती मेरी डूब के उबरी तूफां ने फिर खाई मात

    झूठ का उबटन चेहरों पर ख़ाक कहेंगे सच्ची बात


    क्या बात कही है !
    झूठ का उबटन चेहरे पर लगाए' मिले लोगों को भी … आगे क्या कहें ?
    आपके ब्लॉग पर आते ही पुरानी पोस्ट्स का ख़ज़ाना टटोल कर गीतों की दुनिया में खो जाने से मन शांत हो जाता है …
    यहीं रुकूंगा , लेकिन यहां से चला…

    शुभकामनाएं …
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  2. अदा दीदी
    पाय लागी ! प्रणाम ! चरण स्पर्श !
    हां , अब आशीर्वाद मिला है तो आगे बात हो …
    पहले तो गीत की ही प्रीत की ही जीत हुई है फिर से …
    रिम झिम गिरे सावन , सुलग सुलग जाए मन ,
    भीगे आज इस मौसम में , लगी कैसी ये अगन …

    वाह वाह ! वाह वाह !!
    कश्ती मेरी डूब के उबरी तूफां ने फिर खाई मात
    झूठ का उबटन चेहरों पर ख़ाक कहेंगे सच्ची बात


    क्या बात कही है !
    झूठ का उबटन चेहरे पर लगाए' मिले लोगों को भी … आगे क्या कहें ?
    आपक ब्लॉग पर आते ही पुरानी पोस्ट्स का ख़ज़ाना टटोल कर गीतों की दुनिया में खो जाने से मन शांत हो जाता है …
    यहीं रुकूंगा , लेकिन यहां से चला…

    शुभकामनाएं …
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  3. Bhai vah........kya baat hai! फिर जा बैठे ग़ैर के शाने आख़िर दिखा दी तूने ज़ात.

    Shaandaar panktiyan.....

    Aapko badhaai.........

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  4. हम नौटंकी क्या हुये,
    लग गयी जमात।

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  5. पतझड़ का सामना तो काँटे ही बखूबी कर सकते हैं, लेकिन फ़िर भी काँटा तो नहीं ही बना चाहिये सबको।
    दुनिया तो फ़ूलों से ही गुलज़ार होती है।
    हमेशा की तरह शानदार तस्वीर के साथ यह पोस्ट भी दिल को छू गई।
    गारंटी-वारंटी हम देख लेंगे जी आप तो गाना सुनवाती रहें बस।
    सदैव आभारी।

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  6. बहुत ही प्रभावशाली अभिव्यक्ति!!
    झूठ का उबटन चेहरों पर
    ख़ाक कहेंगे सच्ची बात
    बिन मतलब बदनाम हुई मैं
    कोई और लगाए घात
    सटीक!

    यह भी देखिये:
    http://shrut-sugya.blogspot.com/2010/08/blog-post_26.html

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  7. बिन मतलब बदनाम हुई मैं
    कोई और लगाए घात

    सही बात है बदनाम तो हमी होते हैं.......

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  8. आख़िर दिखा दी तूने ज़ात

    ज़ात की बात पर आज लोग लगाऎ बैठे है घात :)

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  9. कश्ती मेरी डूब के उबरी
    तूफाँ ने फिर खाई मात

    पता नहीं क्यों मुझे आपकी कविताओं में आत्मविश्वास के अंश ढूंढनें में मज़ा आता है !

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  10. सारी रचना ही अच्छी है लेकिन अंतिम पंक्ति कुछ खटका मार गई दी.. :(

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  11. bhut khub achchaa prbaahvshaali prstutikrn he. akhtar khan akela kota rajsthan

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  12. झूठ का उबटन चेहरों पर
    ख़ाक कहेंगे सच्ची बात

    बहुत खूब!! क्या बात है!!
    आपका लेखन एक मनुष्य की आम भावनाओं को व्यक्त करता है.

    समय हो तो अवश्य पढ़ें: पैसे से खलनायकी सफ़र कबाड़ का
    http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_26.html

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  13. '' एक तो हो रही बरसात
    उसपर इतनी लम्बी रात

    कश्ती मेरी डूब के उबरी
    तूफाँ ने फिर खाई मात

    ज़िक्र किया था पतझड़ का
    फूलों पर टिक गई है बात

    झूठ का उबटन चेहरों पर
    ख़ाक कहेंगे सच्ची बात

    बिन मतलब बदनाम हुई मैं
    कोई और लगाए घात

    कैसा रंग बसंत ले आया ?
    पेड़ों पर न फूल न पात

    फिर जा बैठे ग़ैर के शाने
    आख़िर दिखा दी तूने ज़ात''
    --- जिस सहजता को एक काव्य-प्रेमी प्राथमिक रूप से पाना चाहता है , उसे यहाँ देखा जा सकता है ! इन पंक्तियों को लिखने वाला इन अनुभवों से गुजरता है - जो जीवन में अस्वाभाविक नहीं हैं - इसलिए सहजता सहज-लब्ध होती है | एक एक अलहदा सी बात कहती दो दो पंक्तियाँ सीधी हैं / सधी हैं और प्रभाव में अचूक !
    गाने पर वही कहूंगा जो सदा से कहता आया हूँ ! चित्ताकर्षक स्वर !
    ...........आभार !

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  14. आप की रचना 27 अगस्त, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

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  15. झूठ का उबटन चेहरों पर
    ख़ाक कहेंगे सच्ची बात


    -गाना सुनकर आनन्द आ गया.

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  16. झूठ का उबटन चेहरों पर
    ख़ाक कहेंगे सच्ची बात


    -गाना सुनकर आनन्द आ गया.

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  17. बहुत ही बेहतरीन रचना!.................. बहुत खूब!

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  18. एक तो हो रही बरसात
    उसपर इतनी लम्बी रात

    अच्छी प्रस्तुति ... आजकल बारिश ने ऐसा ही हाल कर रखा है ...
    http://oshotheone.blogspot.com/

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  19. बहुत ही प्रभावशाली अभिव्यक्ति!!

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  20. बहुत ही प्रभावशाली अभिव्यक्ति!!

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  21. मेरा दिल कहता है - बहुत ही उम्दा और लाजवाब सत्यपरक रचना है..........

    बिन मतलब बदनाम हुई मैं
    कोई और लगाए घात........
    हमने फूल बिखरे राह में
    मिले हमे काँटों की सौगात..........

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