Monday, August 16, 2010

हम हैं इंडियन ...डोंट माइंड ...


हम !
उम्र में अब क़ैद हो रहे हैं
देखो 
हमारे बाल अब सफैद हो रहे हैं
कौन जाने
मियाद क्या है इस जिस्म की
अब तो 
खून भी रगों में सफैद हो रहे हैं
देखती हूँ
हर तरफ बर्फ सी गिरी हुई
सारे ही 
रंग अब सफैद हो रहे हैं
मेरी सोच 
को तो अब लग गए हज़ारो पर
पर
अलफ़ाज़ मेरे फिर क़ैद हो रहे हैं.....

हम हैं इंडियन ...डोंट माइंड ...

18 comments:

  1. बालों की सफेदी खून में भी उतर रही है ...वाह ..!
    और ये वाले महाशय तो सच्चे इंडियन ही हैं ...मस्त ...!

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  2. अच्छी अभिव्यक्ति।

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  3. श्वेत आयु का प्रतीक है, श्वेत शान्ति का प्रतीक है।

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  4. Girijesh ji ne kaha...

    शेखर एक जीवनी में सौन्दर्य की तलाश में शेखर गुलमर्ग से आगे बहुत आगे बर्फीले पहाड़ों और जमी हुई झील तक जाता है। सौन्दर्य को न पाकर निराश होता है लेकिन एक दिन अचानक ही मृत्यु सरीखे हिम क्षेत्र में उसे सौन्दर्य के दर्शन होते हैं। विराट सौन्दर्य के आगे उसकी सोच को भी हजारों पर लग गए से प्रतीत होते हैं लेकिन शब्द ऐसे हैं कि सराहते हुए भी लगता है - काश! कुछ और होता। ... कभी पढ़िएगा, बहुत सुन्दर भाग बन पड़ा है।

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  5. मुझे तो कविता बढ़िया पसंद आई .....

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  6. बेहतरीन अभिव्यक्ति... बहुत खूब!

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  7. balo ki safedi aur umar se lag raha hai ki ham bhi budhe Indian ho chuke hain..........:)

    badhiya rachna.......

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  8. खूबसूरत कविता लिखी है आपने.

    मेरा ब्लॉग
    खूबसूरत, लेकिन पराई युवती को निहारने से बचें
    http://iamsheheryar.blogspot.com/2010/08/blog-post_16.html

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  9. कौन जाने
    मियाद क्या है इस जिस्म की
    अब तो
    खून भी रगों में सफैद हो रहे हैं

    Bahut khoob !

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  10. "मेरी सोच
    को तो अब लग गए हज़ारो पर
    पर..."

    पर भी कतरे गए हैं :)

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  11. Hi...

    Astanchal ki taraf badhe jab...
    surya chhupe aur aaye raat...
    Chanda lekar aaye apni...
    sheetal chandani apne saath...

    Jeevan main bhi shwet rang...
    aata hai sheetalta ke saang...
    man main ek thahraao sa aata..
    thahre man ki har umang...

    Sundar Bhavabhivyakti...

    Deepak...

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  12. कौन जाने
    मियाद क्या है इस जिस्म की
    अब तो
    खून भी रगों में सफैद हो रहे हैं


    -डरा रही हैं कि .....कविता सुना रही हैं.

    बेहतरीन!!


    विडिओ देखकर मजा आया.

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  13. वाह! क्या बात है, बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ! कमाल कि पंक्तियाँ है!

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  14. मेरे आजाद भारत को अब देखिए,
    हो रहे कत्ल हैं बेसबब देखिए,
    इस नई नस्ल को बेअदब देखिए,
    कैसे आ पायेगा मुल्क में अब अमन।
    उन शहीदों को मेरा नमन है नमन।।

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  15. मंगलवार 17 अगस्त को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है .कृपया वहाँ आ कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ....आपका इंतज़ार रहेगा ..आपकी अभिव्यक्ति ही हमारी प्रेरणा है ... आभार

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  16. कौन जाने
    मियाद क्या है इस जिस्म की
    अब तो
    खून भी रगों में सफैद हो रहे हैं

    सच तो सच है :))

    सुन्दर चित्र
    सुन्दर रचना
    वीडियो अभी देखना बाकी है

    बर्फ को लेकर
    ये नजरिया आपका
    मन में वैराग्य भर रहा
    ऐसे लगा कोई यात्री
    उतरने से पहले रेल से
    घर जाने की तैयारी कर रहा
    भय है किस बात का
    ये तो है एक स्थिर नियम
    क्यों हर चीज को
    अपना समझते हैं हम
    सौंप दो जो उसका है उसको ही
    भक्ति होगी हर कर्म
    इसलिए तो था कभी
    अर्जुन ने सीखा कृष्ण से
    भक्ति का सच्चा मर्म
    [ http://my2010ideas.blogspot.com/2010/04/blog-post_04.html]

    ये कमेन्ट कुछ बड़ा हो गया ,इसके लिए क्षमा चाहता हूँ , ये रचना अभी बनाई है, और इसका सार ऊपर दिए गए लिंक वाली पोस्ट पर है

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