Tuesday, August 3, 2010

कब से आदत लग गई है ...!!


आदतन मैं इंतज़ार 
करती रही, 
आदतन तुम चले आए,
आदतन तुमने मेरी 
आँखों में झाँका,
आदतन मैं भी खो गई,
जाने कब से ये सिलसिला
चल रहा है,
पता भी नहीं चला,
मुझे तुम्हारी 
और तुम्हें मेरी
कब से आदत लग गई है ...!!



17 comments:

  1. मुझे तुम्हारी
    और तुम्हें मेरी
    कब से आदत लग गई है ...!!

    आदत ही तो है लग ही जाती है ...
    बहुत सुन्दर ..

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  2. मुझे तुम्हारी
    और तुम्हें मेरी
    कब से आदत लग गई है

    अच्छी आदतें छूटना भी नहीं चाहिए सुंदर अतिसुन्दर बधाई

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  3. प्रेम अपने सहज रूप में ऐसा ही होता है।

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  4. लागी छूटे ना --- अब तो सनम --
    चलिये ये आदत तो अच्छी है ।

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  5. Bahut pyari rachana! Na jane ham aadatan kya,kya karte hain..par ye aadaten to badee pyari-si hain!

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  6. मुझे तुम्हारी
    और तुम्हें मेरी
    कब से आदत लग गई है ...!!
    ...achhi aadat hamesh bhali achhi lagti hai..
    bahut achhi prastuti

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  7. बहुत सुन्दर, बेहद प्रभावशाली, कमाल कि अभिव्यक्ति!

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  8. खूबसूरत आदत ....छोटी छोटी बातें जो निरंतर घटित होती रहती हैं न जाने कब आदत बन जाती हैं ...

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  9. ये आदतें भी अजीब हैं आती इतनी आसानी से हैं जैसे कि मेहमान और जाती हैं किरायेदार की तरह...

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  10. प्रभावशाली प्रस्तुति,
    सहज चित्रण,
    सुन्दर चित्र।

    सदैव आभारी।

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  11. जाने कब आदत लग जाती है ...
    सुन्दर ...!

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  12. बहुत सुंदर और उम्दा आदत ..:-)

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  13. mam apne jo alfaaz likhe hai wo sirf alfaaz nahi hai. kafi logon ne apke lekhn ko padha hoga. par shayad wo umda log hi honge.. jo baat apne in sabdon ke peeche kahi hai samjhe honge ...
    beshak aapne apni jindgi ke safar.. ke samjh ki bahot gahri baat kisi aur ko aage kar ke likhi hai..
    mujhe padh kar kuch aisa laga

    gustakhi maaf mam hame samajh to nahi hai par gahre logo ki samjh ko samjhta hoon ..warna log to kuch bhi likhte hai...
    thank's mam
    apka anjan student
    sufi...

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